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बड़ा दशैं: पहला दिन – घटस्थापना और ‘जमरा’ बोने की पावन परंपरा

 

नेपाल में नवरात्रि को ‘बड़ा दशैं’ (Bada Dashain) या ‘शारदीय नवरात्र’ के रूप में मनाया जाता है। यहाँ पहले दिन (प्रतिपदा) का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भारत से मिलता-जुलता होने के बावजूद, नेपाल की कुछ अपनी विशेष और अनोखी परंपराएँ हैं

नेपाल में दुर्गा पूजा का पहला दिन केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि वर्ष के सबसे बड़े राष्ट्रीय और पारिवारिक उत्सव ‘बड़ा दशैं’ के औपचारिक शुभारंभ का दिन होता है। इस दिन को नेपाल में घटस्थापना कहा जाता है।

1. घटस्थापना और ‘जमरा’ (Jamara) की विशेष विधि

नेपाल में घटस्थापना के दिन घर के पूजा गृह या ‘दशैं घर’ (दशैं के लिए विशेष रूप से तय स्थान) में कलश स्थापना की जाती है।

● बालू और मिट्टी की वेदी: कलश स्थापित करने वाली जगह पर गोबर से लीपकर, साफ नदी की रेत (बालू) या मिट्टी की वेदी बनाई जाती है।
● जमरा (जौ के अंकुर) बोना: नेपाल की सबसे मुख्य परंपरा है—इस वेदी पर जौ (Barley) और कभी-कभी गेहूँ या मकई के बीज बोए जाते हैं। इसे नेपाल में ‘जमरा छर्ने’ कहा जाता है।
● अंधेरे कमरे में सुरक्षा: इस वेदी को सीधी धूप से दूर अंधेरे में रखा जाता है ताकि 9 दिनों में जौ के पौधे पीले-हरे रंग के सुंदर, लंबे और पवित्र अंकुर बन सकें। यही ‘जमरा’ 10वें दिन (विजयादशमी) को घर के बड़े-बुजुर्गों द्वारा टीका लगाने के साथ कान के पीछे या सिर पर आशीर्वाद के रूप में लगाया जाता है।

2. माँ शैलपुत्री पूजन और ‘दशैं घर’ की परंपरा

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नेपाल में भी पहले दिन नवदुर्गा की प्रथम रूप माँ शैलपुत्री की विशेष आराधना होती है।

● हनुमान ढोका का ‘दशैं घर’: काठमांडू के ऐतिहासिक वसंतपुर (हनुमान ढोका) स्थित राजप्रासाद के ‘दशैं घर’ में नेपाल पंचांग निर्णायक समिति द्वारा तय किए गए शुभ मुहूर्त (साइत) में औपचारिक रूप से महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के साथ घटस्थापना की जाती है।
● अखंड दीप और सप्तशती पाठ: घटस्थापना के साथ ही 9 दिनों तक जलने वाला अखंड दीपक जलाया जाता है और दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ) का वाचन शुरू होता है।

3. पारिवारिक और सांस्कृतिक माहौल (नेपाली भावना)

● परदेसियों की घर वापसी: नेपाल में घटस्थापना का दिन आते ही गाँव-घर में उत्सव की लहर दौड़ जाती है। नौकरी या पढ़ाई के लिए बाहर गए लोग अपने-अपने घर लौटने लगते हैं।
● पवित्रता और उमंग: घरों की लिपाई-पोताई और सफाई की जाती है। यह दिन परिवार में समृद्धि, शांति और माँ दुर्गा के आगमन का संदेश लेकर आता है।

आलेख के लिए नेपाल संदर्भ  

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“नेपाल में बड़ा दशैं का पहला दिन (घटस्थापना) केवल कलश स्थापना नहीं, बल्कि आस्था और ‘जमरा’ के रोपण का पावन क्षण है। अंधेरे कमरे में बोया गया जौ का हर एक बीज माँ शैलपुत्री की कृपा और 10वें दिन मिलने वाले पारिवारिक आशीर्वाद का प्रतीक बनता है।”

“घटस्थापना केवल मिट्टी के बर्तन में जल भरने या बीज बोने की क्रिया नहीं है; यह अपने भीतर छिपी नकारात्मकता को त्यागकर चेतना के नए अंकुर फोड़ने की यात्रा है। बड़ा दशैं और दुर्गा पूजा का यह प्रथम दिवस हमें सिखाता है कि जब हमारी नीव हिमालय जैसी दृढ़ होगी, तभी हम जीवन में असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त कर सकेंगे।”

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