Wed. Sep 30th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

विश्व सूफी सम्मेलन में मोदी जी की मोहक अभिव्यक्ति

 

शब्दों में वह जादू होता है जो आपके प्रतिद्वन्धियों को भी आपके करीब ले आता है । आपकी सटीक अभिव्यक्ति में वह असर होता है जो उन्हें भी आपकी तारीफ करने को मजबूर कर देता है जो निरंतर आपके खिलाफ बोल रहे होते हैं । भारतीय प्रधानमंत्री के जितने प्रशंसक हैं उतने ही उनके आलोचकों की कमी भी नहीं है । शायद सफलता की राह इसी तरह तय होती है जहाँ बढते कदम को पीछे खींच लेने की कोशिश में लोग लगे रहते हैं ।

किन्तु यह आलोचना या खामियों को निकालना ही व्यक्ति को आगे की राह तय करने में सहायक सिद्ध होता है । भारतीय प्रधानमंत्री की अभिव्यक्ति, उनकी शैली, उनकी प्रस्तुति सभी हमेशा से तारीफ–ए–काबिल रही है । जब वो बोलते है. तो एक ऐसा शमा बँध जाता है कि लोग उनकी सोच से अलग खुद की सोच को रख ही नहीं पाते हैं । नेपाल में आकर जब उन्होंने भाषण दिया था तो उनके हाथ भी ताली बजाने से खुद को रोक नही. पाए थे जो उनके कट्ट र आलोचक थे ।

अब तक विश्व में उन्होंने जहाँ भी अपनी बातों को रखा सब सम्मोहित होकर उन्हें सुनते रहे । फिलहाल मार्च १७,२०१६ को विश्व सूफी सम्मेलन में मोदी जी के सम्बोधन ने उन्हें एक बार फिर से चर्चित कर दिया है ।
एक सारगर्भित और सार्थक मंतव्य रहा उनका । भारतीय संस्कृति और उसकी पहचान को उन्होंने बड़ी ही खूबसूरती से एक ही वाक्य में जाहिर कर दिया ‘वसुधैवकुटुम्बकम् में विश्वास करने वाली जनता के बीच स्वागत है’ । यह एक वाक्य भारतीय जनता और उसकी परम्परा को परिभाषित कर देती है । इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि कुरानशरीफ भी यही कहता है कि सभी मानव समुदाय एक ही हैं बस इंसान ही इसे टुकड़ों में बाँटता है । महान पर्सियन सुफी कवि सादी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वो भी मानते थे कि सभी मनुष्य की उत्पत्ति का स्रोत एक ही है । कोई धर्म विभेद की बात नहीं कहता सभी मानवता और नैतिकता की ही बात सिखाते हैं ।

यह भी पढें   नारायणी नदी में बाढ़ का खतरा बढ़ा, देवघाट में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

विश्व सूफी सम्मेलन का आयोजन अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है । सम्पूर्ण विश्व अभी एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ हिंसा का बोलबाला है । ऐसे समय में यह कार्यक्रम एक असाधारण कार्यक्रम है । मोदी ने कहा कि यह वह समय है जब युवाओं का भविष्य बन्दूक की नोक पर टिका हुआ है उनकी स्वच्छंद हँसी एक काले साए में खो गई है । ऐसे समय सूफी संतो की सौम्य वाणी अत्यन्त मायने रखती है । यह सभा और यह समुदाय संघर्षरत इस संसार में शान्ति, धैर्य और प्रेम में समर्पित है । इस्लामिक धर्म की महत्ता को भी मोदी जी ने बहुत ही प्रभावशाली तरीके से रखा । उन्होंने कहा कि इस्लामिक सभ्यता प्रचुर विविधता का प्रतिनिधित्व करता है ।

 

यह सभ्यता १५वीं शताब्दी में विज्ञान, औषधि, साहित्य, कला, वास्तु और वाणिज्य में उच्चतम तरक्की हासिल करने वाली सभ्यता है । इस्लाम प्राचीन इजिप्ट, मेसोपोटेमिया, अफ्रिका, पर्सियन मध्य एशियाली और ककेशियन प्रदेश तथा पूर्वी एशियाली क्षेत्र, बुद्ध दर्शन और भारतीय दर्शन तथा विज्ञान जैसे विविध सभ्यता के साथ घुलमिल कर इस सभ्यता का अद्भुत क्षमता के साथ उदय हुआ है । यह सभ्यता पारदर्शिता, विश्वास, मानवता, एकता का सीख देती है और यही सूफी सन्देश भी है । इजिप्ट और पश्चिम एशिया में इसकी उत्पत्ति के साथ ही विश्वास और मानवीय मूल्यों की मान्यता के साथ अन्य आध्यात्मिक विचारों से सीख लेता हुआ सूफीवाद का प्रचार प्रसार दूर तक फैला हुआ है । सूफीवाद धर्म के दायरे से ऊपर परमेश्वर के साथ साक्षात्कार कर के विश्वव्यापी मानव हित की चाहत रखता है ।

यह भी पढें   पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा की गिरफ्तारी का मुद्दा संसद में गूंजा, कांग्रेस और रास्वपा रहीं मौन

हजरत निजामुद्दिन औलिया ने कहा है कि मानवता के लिए भगवान को प्रेम करने वाले और भगवान के लिए मानव को प्रेम करने वाले ही भगवान के प्रिय होते हैं । यह मानवता का एकाकार का सन्देश है कि सभी भगवान की सृजना है । इसलिए सूफी धर्म में मानव की सेवा ही भगवान की सेवा है । हिन्दू परम्परा में माना गया है कि एक विशाल समुद्र अपने भीतर विभिन्न पहाड़ों से निकली नदी को समाहित करता है इसी तरह बुल्ले शाह के ज्ञान सभी के हृदय में समाहित होता है यही समय की माँग भी है ।

हम जब अल्लाह का ९९ नाम सोचते हैं तो यह पता चलता है कि कोई भी नाम हिंसा में विश्वास नहीं करता । सूफीवाद शांति, सहअस्तित्व, दया और समानता की आवाज है जो विश्वव्यापी भ्रातृत्व का आह्वान करता है । भारत की खुली विचारधारा और भूमि में सूफीवाद ने अपना विस्तार किया और भारत की आध्यात्मिक मूल्य और परम्परा के साथ सम्बद्ध हो पाया । जिसका असर ह मभारतीय परम्परा, कला, संस्कृति में स्पष्ट देख सकते हैं । बाबा फरीद की कविता और गुरुग्रन्थ साबिह में हम इस भावना को अनुभूत करते हैं । भारत की कविता और भारतीय संगीत में इसका प्रभाव देख सकते हैं । अमीर खुसरो के योगदान को विस्मृत नहीं किया जा सकता है ।

भारत की भूमि में सूफीवाद फैला । भारत की धरती सबके लिए रही है चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय का हो । आज धर्म की ओट में जो आतंकवाद जन्म ले रहा है सच कहा जाय तो उनका कोई धर्म ही नहीं है । बच्चों के स्कूल, प्रार्थना स्थल, शहरों की अमूल्य सम्पदा सभी आतंकवाद की वजह से त्रसित हैं । आतंक के विरुद्ध हमें लड़ना है । यह लड़ाई न किसी जाति, न किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध है बल्कि यह सिर्फ मानवता के पक्ष और आतंक के खिलाफ की लड़ाई है । आज आतंक से लड़ने के लिए हम अरबों खर्च करते हैं अगर यह आतंक नहीं होता ता यह राशि हम गरीबों के उद्धार के लिए खर्च कर सकते थे । अगर एक व्यक्ति की हत्या होती है तो यह सम्पूर्ण मानवता की हत्या होती है और अगर एक मनुष्य को हम जीवन देते हैं तो सम्पूर्ण मानव जाति को जीवन देते हैं । हमें हजरत मोइद्दिन के संदेश से प्रेरित होना होगा और बाइबिल की सीख को भी आत्मसात करना होगा । हमें कबीर, गुरुनानक, स्वामी विवेकानन्द, गौतमबुद्ध इन सभी के बताए रास्ते पर बढ़ना होगा । इन सबको मिला कर हमें मानवता का एक गीत, विविधता और एकता का बन्धन, दया और उदारता की सेवा, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ने की प्रतिबद्धता और शांति को आगे बढ़ाने के लिए दृढ होना होगा । आज विश्व को इसी प्रण शक्ति की आवशयकता है । हम सब को मिलकर इस विश्व को एक सुन्दर बगीचे में परिणत करना होगा इसका संकलप लेना होगा ।

यह भी पढें   युवाओं में नशे की रोकथाम के लिए सेलिब्रिटी और सार्वजनिक व्यक्तित्वों का नैतिक दायित्व

उक्त अवसर पर कहे गए हर वाक्य की अगर विवेचना की जाय और उसे विश्व समुदाय आत्मसात करे तो निश्चय ही विश्व मानवता की उस राह पर आगे बढ़ेगा जहाँ शांति, समृद्धि और सुशासन की परिकल्पना होगी । भारतीय प्रधानमंत्री का यह भाषण बहुत ही गरिमामयी, प्रभावशाली और हृदयंगम करने वाला था । आत्मविभार करने वाला था । आज विश्व को मिलकर आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा और धर्म के नाम पर जो दुकानें खुली हैं उन्हें बन्द करवाना होगा तभी मानवता का कल्याण हो सकता है । (हि.स.)

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com