पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा की गिरफ्तारी का मुद्दा संसद में गूंजा, कांग्रेस और रास्वपा रहीं मौन
नेपाल के पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा की गिरफ्तारी का मामला सोमवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में विपक्षी दलों ने जोरदार ढंग से उठाया। हालांकि, प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) ने इस मुद्दे पर सदन में कोई टिप्पणी नहीं की।
सोमवार की बैठक में आकस्मिक और शून्यकाल के दौरान कांग्रेस और रास्वपा के सांसदों ने विभिन्न विषयों पर अपनी बातें रखीं, लेकिन चोलेन्द्र राणा की गिरफ्तारी का उल्लेख तक नहीं किया।
शनिवार रात हुई थी गिरफ्तारी, रविवार को रिहाई
शनिवार रात नेपाल पुलिस ने यह कहते हुए चोलेन्द्र राणा को उनके निवास से हिरासत में लिया था कि जनरेशन-ज़ेड (Gen Z) समूह की ओर से उन पर हमले की आशंका है। हालांकि, रविवार दोपहर पुलिस ने उन्हें परिवार की जिम्मेदारी में छोड़ दिया।
इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस और आलोचना शुरू हो गई।
कांग्रेस से उठने की थी उम्मीद, लेकिन नहीं उठा मुद्दा
न्याय व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने के बावजूद नेपाली कांग्रेस ने संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।
कांग्रेस की ओर से आकस्मिक समय में केवल सांसद टेकबहादुर गुरुङ ने बोलते हुए लगातार तीन दिनों की बारिश से अपने निर्वाचन क्षेत्र मनाङ में हुई जनधन की क्षति का विषय उठाया। शून्यकाल में कांग्रेस का कोई भी सांसद नहीं बोला।
रास्वपा भी रही चुप
सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसदों ने आकस्मिक और शून्यकाल में अपनी बातें रखीं, लेकिन चोलेन्द्र राणा की गिरफ्तारी और बाद में हुई रिहाई पर किसी ने भी एक शब्द नहीं कहा।
जब पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के लिए दिए गए “जनरेशन-ज़ेड से खतरे” के तर्क और उसके बाद हुई नाटकीय रिहाई की देशभर में आलोचना हो रही है, तब सत्तापक्ष की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी रही।
इन दलों ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की
पूर्व पदाधिकारियों की गिरफ्तारी और सरकार की कार्यशैली को लेकर अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन में तीखी प्रतिक्रिया दी।
आलोचना करने वालों में शामिल थे:
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सीपीएन (यूएमएल) के प्रमुख सचेतक ऐनबहादुर महर,
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल,
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श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद ध्रुव राय,
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राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के सांसद भरत गिरी।
इन सांसदों ने चोलेन्द्र राणा की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राज्य के दुरुपयोग, मनमानी कार्रवाई और बच्चों का खेल जैसी कार्यशैली करार दिया तथा सरकार और पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए।
विवाद का केंद्र
इस प्रकरण ने नेपाल में न्यायपालिका से जुड़े पूर्व उच्च पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया, पुलिस के निर्णय और सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। संसद में विपक्ष के कुछ दलों ने इस पर सरकार से जवाबदेही की मांग की, जबकि नेपाली कांग्रेस और रास्वपा की चुप्पी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है।


