भारत के साथ व्यापार घाटा कम करने और निवेश बढ़ाने के लिए संयुक्त पहल जरूरी: अञ्जन श्रेष्ठ
नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के अध्यक्ष अञ्जन श्रेष्ठ ने भारत के साथ व्यापार घाटा कम करने, निवेश की बाधाओं को दूर करने और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग का विस्तार करने के लिए दोनों देशों से संयुक्त पहल करने का आग्रह किया है।
नेपाल–भारत उद्योग वाणिज्य संघ (निक्की) की 32वीं वार्षिक आमसभा को संबोधित करते हुए श्रेष्ठ ने नेपाली उत्पादों की भारतीय बाजार तक पहुंच आसान बनाने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल करने और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे में सुधार करने पर जोर दिया।
उनके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025/26 में नेपाल और भारत के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.2 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में नेपाल ने भारत को लगभग 1.78 अरब अमेरिकी डॉलर के सामान का निर्यात किया, जबकि भारत से करीब 8.32 अरब अमेरिकी डॉलर के सामान का आयात किया गया।
श्रेष्ठ ने कहा कि व्यापार असंतुलन कम करने के लिए नेपाली उत्पादों की निर्यात क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में भारतीय निवेश आकर्षित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि व्यापार नीतियों में पूर्वानुमान की स्पष्टता बनाए रखने और कारोबार की लागत कम करने से दोनों देशों के व्यवसायियों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
गुणवत्ता प्रमाणन में देरी बड़ी बाधा
श्रेष्ठ ने बताया कि भारतीय बाजार में प्रवेश के दौरान नेपाली उत्पादों को गुणवत्ता प्रमाणन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए नेपाल के गुणवत्ता तथा नाप-तौल विभाग और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने विशेष रूप से इस्पात, जूते और प्लाइवुड जैसे उत्पादों के प्रमाणन में होने वाली देरी का उल्लेख किया। उनके अनुसार, बीआईएस प्रमाणपत्र प्राप्त करने में छह महीने से एक वर्ष तक का समय लग जाता है। प्रमाणपत्र मिलने तक उसके नवीनीकरण का समय नजदीक आ जाने से नेपाली उद्योगियों और व्यवसायियों का उत्साह प्रभावित होता है।
श्रेष्ठ ने नेपाली जूट उत्पादों पर हाल ही में लगाए गए एंटी-डंपिंग शुल्क को भी नेपाल के जूट उद्योग के विकास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए चुनौती बताया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए दोनों देशों की सरकारों के बीच उच्चस्तरीय समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
जलविद्युत और निर्यातोन्मुख उद्योगों में निवेश का आह्वान
श्रेष्ठ ने कहा कि नेपाल जलविद्युत, विद्युत प्रसारण बुनियादी ढांचे, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी और निर्यातोन्मुख उद्योगों में भारतीय निवेश का स्वागत करता है।
उनके अनुसार, स्पष्ट नीतियां, मजबूत विद्युत प्रसारण बुनियादी ढांचा और दीर्घकालीन निवेश की गारंटी सुनिश्चित की जाए तो भारत को बिजली का निर्यात बढ़ाया जा सकता है। इससे नेपाल में रोजगार के अवसर सृजित करने और सरकारी राजस्व बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए व्यापारिक बाधाओं को दूर करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

