आषाढ़ की पूर्णिमा ही क्यों है गुरु पूर्णिमा ?
काठमांडू, ९ जुलाई | हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा रविबार ९ जुलाई को मनाया जा रहा है इसे व्यास पूजा भी कहते हैं । व्यास मुनि को प्रथम गुरु माना गया है ।
गुरु व्यास ने सनातन धर्म के चारों वेदों का अध्ययन किया था ।ज्ञान देने वाला गुरु कहलाता है । तंत्र, मंत्र अध्यात्म का ज्ञान देने वाला सदगुरू कहलाता है । माना जाता है कि ऐसे गुरु की प्राप्ति पिछले जन्मों के कर्म से होती है । दीक्षा, प्राप्ति जीवन की आधारशिला है । इससे मनुष्य को अपने लक्ष्य की प्राप्ति, बुद्धि, ऐश्वर्य , दिव्यता, तथा चैतन्यता प्राप्त होती है । और इससे मानव जीवन के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच जाता है । इसलिये मानते है कि मनुष्य को दीक्षित होना चाहिये क्योंकि इसके बिना मोक्ष की प्राप्ति नही होती । गुरु का महत्व निम्न पंक्तियों से समझ सकते है
गुरु बर्ह्मा, गुरु र्विष्णु, गुरु र्देवो महेश्वराय ।
गुरु साक्षात पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः ।
सिख धर्म केवल एक ईश्वर और अपने दस गुरुओं की वाणी को ही जीवन का वास्तविक सत्य मानता है
गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागू पावं।
बलिहारी गुरु आपनो गोविंद दियो बताय ।
यानि ईश्वर से भी महत्वपूर्ण गुरु का स्थान माना गया है । क्योंकि वही हमे राह दिखाता है ।


