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१० रुपयों की पोलिमर नोट प्रिन्ट में भ्रष्टाचार, तत्कालीन गभर्नर रावल विरुद्ध मुद्दा

 

काठमांडू, २१ दिसम्बर । अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग ने आशंका की है कि वि.सं. २०५९ साल में प्रिन्ट की गई १० रुपया दर की पोलिमर (प्लास्टिक) नोट प्रिन्ट में भ्रष्टाचार हुआ है । ऐसी आशंका सहित अख्तियार ने तत्कालीन गभर्नर तिलक रावल, राष्ट्र बैंक के तत्कालीन नोट विभाग प्रमुख उपेन्द्रकेशरी पौड्याल और फ्लावर लिमिटेड के स्थानीय प्रतिनिधि हिमालयबहादुर पाण्डे के विरुद्ध विशेष अदालत में बिहीबार भ्रष्टाचार मुद्दा दायर किया है ।
स्मरणीय है, उक्त पोलिमर नोट अष्ट्रेलिया में प्रिन्ट कर बाजार में लाया गया था । इसी प्रकरण में अष्ट्रेलियन सरकार ने अपने देश के दोषी के ऊपर ७ साल पहले ही कारवाही की थी । उस समय एक ही बार ५ करोड थान पोलिमर नोट प्रिन्ट की गई थी । नोट प्रिन्ट करने के लिए ३० लाख रुपैयां अष्ट्रेलियन डॉलर खर्च की गई थी, लेकिन सम्झौता नेपाली १३ करोड़ रुपयों में हुई थी । जब गुणस्तर के कारण बाद में पोलिमर नोटों में समस्या दिखाई देने लगी, कहा गया था कि पोलिमर नोट नेपाल के लिए किफायती होगी । लेकिन इसकी उम्र कागजी नोट से कम दिखाई देने लगी, कारण था– कमजोर गुणस्तर । जानकार लोगों का मानना है कि कमसिन के चक्कर में कमजोर गुणस्तर की नोट प्रिन्ट की गई थी ।
पता चला है कि नोट प्रिन्ट में संलग्न अष्ट्रेलियन कर्मचारियों ने १० प्रतिशत कमिसन लिया है । इसतरह अवैध कमिसन लेनेवाले उन लोगों के ऊपर ७ साल पहले ही कारवाही हो चुकी है । लेकिन नेपाल में ७ साल के बाद कर्मचारियों के ऊपर छानबिन शुरु होने लगा है ।

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