घूस महात्म्य का पाठ करें और अमल करें
बिम्मी शर्मा
पशु भूस खाते हैं और मनुष्य घूस । जिसकी जो खाने की हैसियत होती है वह वही खाता है । पशु को अगर घूस खिलाओ तो वह नहीं खाएगा और न मनुष्य ही भूस खिलाने पर खाएगा । इसी लिए जिसको जो खाना होता वही खाता है । ईस में आश्चर्य मानने की बात क्या है ? मनुष्य घूस खाने पर तहलका मच जाता है, पूरी मीडिया में वह छा जाता है । पर पशु रोज ही भूस खाते है पर वह कभी समाचार का विषय नहीं बनता । मनुष्य का घूस खाने पर ईतनी हाय तौबा क्यों ? वह खाने वाला चीज ही खा रहा है । कोई अलकत्रा, पत्थर या सिमेंट तो नहीं खा रहा ? तो उस ईसान को चुपचाप घूस खाने दो । कोई ईंसान जब आफिस में घूस खाएगा तब न उस के घर में चैन की वंशी बजेगी । घूस खाने और पचाने के कारण ही वह आलिशान बगंला मे रहता है, उसके पास कार होती है । बच्चे बढिया स्कूल में पढ्ते है, उसकी बीबी गहने और कपडों से लकदक हो कर खुश रहती है । वह खुद भी घूस खाने के कारण शराब पी कर और पान चबा कर अपने दोस्तों में खुशियों के रुप में पैसे बाँटता है । यदि इंसान घूस न खाए तो उसका जीना दुश्वार हो जाए । बीबी उसको घर में घुसनें ही नहीं देगी । अब रुठी हुई बीबी किस को अच्छी लगती है भला ? अब बीबी रुठी रहेगी तो बच्चे भी मिमियाने लगेगें । ईसी लिए मजे से घूस खाओ और अपना भविष्य सुरक्षित करो । बिना भोजन भजन ना होई गोपाला चाहे ले लो कंठी माला । भोजन यानी पैसा । पैसा है तो भोजन और भजन दोनों है नहीं तो कुछ भी नहीं है । जो घूस नहीं खाते और बडे ईमान कि प्रतिमूर्ति बने फिरते है उनकी हालात आपने देखी है ? बेचारे मरियल से रहते है । घर में हमेशा बिबी और बच्चो का किचकिच होता रहता है । बीबी भूखी शेरनी की तरह दहाडती रहती है । बजार मे जब वह चलता है तो सिर्फ विंडो शपिगं करता है और खाने पीने की सामान को लार टपकाते हुए देखता रहता है पर बेचारा खरीद नहीं पाता । बेचारा सब्जी भी सब से सस्ता और सडा हुआ खरीद कर घर ले जाता है । जो कभी, कभार बीबी उसके मूंह में ही फेंक देती है । बेचार ईमानदार ईंसान का जीवन जानवर से भी बदतर है । इसी लिए घूस खुद भी खाईए और दुसरो को भी खिलाईए । घूस खाने से ही सभी के जीवन में कल्याण होता है । जो घूस खाते है उनका बीमार होने पर ईलाज जल्दी होता है । किसी बीमारी या अप्रेशन करनें में पांच लाख रुपएं का खर्च आया तो जो ईमानदार है वह सुनते ही बेहोश हो जाएगा और दुबारा उठ नहीं पाएगा । पर जो घूस खा कर मोटा हुआ ईंसान है वह बडे फक्र से अपना या अपनों का ईलाज करेगा और करवाएगा ।इसी लिए स्वस्थ्य रहने और लंबी उम्र के लिए घूस खाना जरुरी है । अरे जो घूस ही नहीं खा पाया वह जीवन में और क्या खा पाएगा ? उसका तो हाजमा ही सूखी और जली हुई रोटी और पानीदार सब्जी खा कर बिगड चुका होता है । बेचारा सपनें मे ही आलिशान घर और नर्म बिस्तर को देखता और सोता है । हकीकत में तो वह खपरैल के मकान के अदंर चटाई मे सोता है । सभी को जीवन में घूस खाना अपरिहार्य है । यह संविधान में ही लिखवा कर कानून बना देना चाहिए । ताकि कोई घूस खाते हुए किसी को रगेंहाथों न पकड सके । पकड्ने पर भी कानून में लिखा होने के कारण घूस खाने वाले व्यक्ति को ससम्मान बरी कर देनी चाहिए । इतनी महंगाई में भूस खाना भी बहुतमहंगा पडता है तब ईसान दालरोटी खाए तो कैसे खाए ? इसी लिए ईसान जब किसी जानवर को भूस खाते हुए देखता है तो मन ही मन सोचता है । यह जानवर भुष खा सकता है तो मैं घुष क्यों नहीं खा सकता ? घुष खाना मेरा मौलिक अधिकार है जैसे गाय, बैल और भैंस का भुष खाना । इसी लिए घूस खाने में शर्म नहीं करनी चाहिए । जिसने किए शर्म उसके फूटे कर्म । अब जो ईमानदार होगा वह घूस खाने में शर्म मान कर नैतिकता की दुहाई देता है । ईसी लिए खुद भी कगांल हो कर अपनी आने वाली पीढी को भी कगांल और दरिद्र बना कर ही मारेगा । किसी बडे खर्थ शास्त्र के विद्धान ने कहा है कि गरीब पैदा होना तुम्हारी गलती नहीं पर गरीबी में ही मरना जरुर तुम्हारी गलती है । यह बिचारा ईमानदार लोगों पर पूरी तरह सही बैठता है । गरीबी में पैदा हो कर बेचारे अपनी ईमानदारी के चलते गरिबी में ही मर जाते हैं । थोडा घूस खा लेते तो ईनका क्या जाता ? परिवार सुखी रहता नर्क से ही सही पिर्तृ आशिर्वाद देते । भगवान भी पैसे की आराधना से धन्य हो जाते । गरीब या ईमानलार ईसान से भगवान भी प्रसन्न नहीं होते । बेचारा तंगी के चलते न कभी फूल प्रसाद चढाता है न भगवान को चंदा ही देता है । अब ऐसे भिखारी से भला भगवान कैसे और क्यों प्रसन्न होगें । भगवान को मेवा, मिष्ठान खाने की आदत जो पड गयी है । ईसी लिए देव ऋण, पितृ ऋण और गुरु के ऋण से त्राण पाने के लिए भी घूस खाना जरुरी है । घूस खाओगे तब न बद्रीनाथ धाम मे. जा कर पितरों को पिंड दे कर खुश करोगे । घूस खाओगे तभी न गुरु पूर्णिमा में अपने गुरु को कीमती उपहार दे पाओगे । भगजान को भी भारी भोग लगा कर प्रसन्न करोगे । घूस खाने से ईहलोक ही नहीं परलोक भी सुधर जाएगा । सीधे नर्क से स्वर्ग मे बैठने को मिलेगा । इसी लिए घूस खाने में हिचकिाओ मत । यह तो हमारी सभ्यता और संस्कार है जो घूस खाने के लिए ही बना है । हमारी आंत भले ही और कुछ न पचा पाए पर घूस को आराम से पचा लेता है । हम पशु थोडे ही हैं जो भूस खाएगें हम तो ईंसान है बडे फख्र से घूस ही खाएगें । जो घूस नहीं खाए या खाने में परहेज करे वर वास्तव में ईंसान ही नहीं है । ईसी लिए ईंसान का चोला मिला है तो ईस चोले को अतं मे अच्छी तरह से सदगत करने के लिए भरपूर घूस खाना चाहिए । बिना घूस खाए जीवन अकारथ हो जाती है । जीवन में घूस है तो सब बहारें और खुशी मूठ्ठी में है नहीं तो सब बेकार और खकार है । इसी लिए घूस खाने और खिलाने से पीछे मत हटिए । यही तो एक शै है जो ईंसान को जिंदा रखती है । नहीं तो पशु और मनुष्य में अतंर क्या रह जाता ? यह अतंर भूस और घूस ही बताता है ।

