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भारत की लोकसभा ने तीन तलाक बिल को ध्वनि मत से पास कर दिया, कांग्रेस के सांसदों ने लोकसभा से वॉकआउट किया

 

नई दिल्ली| भारत की लोकसभा ने आज तीन तलाक बिल को पास कर दिया है |  लोकसभा में आज यानी गुरुवार को तीन तलाक बिल पेश किया गया। इसे देखते हुए भाजपा ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी किया था और उन्हें सदन में उपस्थित रहने को कहा था। इस विधेयक में एक साथ तीन तलाक बोलकर तलाक देने को अपराध करार दिया गया है। सदन में इस बिल पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ।

तीन तलाक बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस के सांसदों ने लोकसभा से वॉकआउट किया. वहीं असदुद्दीन ओवैसी के संशोधन प्रस्ताव को लोकसभा में खारिज कर दिया गया. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों को इसके लिए व्हिप जारी किया था और उनसे सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा था. वहीं, कांग्रेस ने भी इससे पहले अपने राज्यसभा सांसदों को सदन में उपस्थित होने के लिए व्हिप जारी किया था.

इससे पहले, लैंगिक न्याय को नरेंद्र मोदी सरकार का मूल तत्व बताते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक पर रोक लगाने संबंधी विधेयक सियासत, धर्म, संप्रदाय का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह ‘नारी के सम्मान और नारी-न्याय’ का सवाल है और हिंदुस्तान की बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा संबंधी इस पहल का सभी को समर्थन करना चाहिए. रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019′ को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया जिसमें विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की संरक्षा करने और उनके पतियों द्वारा तीन बार तलाक बोलकर विवाह तोड़ने को निषेध करने का प्रावधान किया गया है. आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किये जाने का विरोध करते हुए इस संबंध में सरकार द्वारा फरवरी में लाये गये अध्यादेश के खिलाफ सांविधिक संकल्प पेश किया. संकल्प पेश करने वालों में अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर, प्रो सौगत राय, पीके कुन्हालीकुट्टी और असदुद्दीन औवैसी भी शामिल हैं.

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प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस विधेयक को भाजपा सरकार लक्षित एजेंडे के रूप में लायी है. यह राजनीतिक है. इस बारे में अध्यादेश लाने की इतनी जरूरत क्यों पड़ी. उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में उच्चतम न्यायालय का फैसला 3:2 के आधार पर आया. वहीं, विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि संविधान के मूल में लैंगिक न्याय है तथा महिलाओं और बच्चों के साथ किसी भी तरह से भेदभाव का निषेध किया गया है. मोदी सरकार के मूल में भी लैंगिक न्याय है. हमारी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्जवला’ जैसी योजनाएं महिलाओं को सशक्त बनाने से जुड़ी हैं. इसी दिशा में पीड़ित महिलाओं की संरक्षा के लिए हम कानून बनाने की पहल कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि तीन तलाक की पीड़ित कुछ महिलाओं द्वारा उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था. यह 5 न्यायमूर्तियों की पीठ थी.। इस फैसले का सार था कि शीर्ष अदालत ने इस प्रथा को गलत बताया. इस बारे में कानून बनाने की बात कही गयी. प्रसाद ने कहा, तो अगर इस दिशा में आगे नहीं बढ़े तो क्या पीड़ित महिलाएं फैसले को घर में टांग लें. प्रसाद ने कहा कि यह नारी के सम्मान और नारी-न्याय का सवाल है, धर्म का नहीं. प्रसाद ने कहा कि पिछले साल दिसंबर में तीन तलाक विधेयक को लोकसभा ने मंजूरी दी थी. लेकिन यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका.

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संसद के दोनों सदनों से मंजूरी नहीं मिलने पर सरकार इस संबंध में अध्यादेश लेकर आयी थी जो अभी प्रभावी है. विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि 2017 से अब तक तीन तलाक के 574 मामले विभिन्न स्रोतों से सामने आये हैं. मीडिया में लगातार तीन तलाक के उदाहरण सामने आ रहे हैं. इस विधेयक को सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. यह इंसाफ से जुड़ा विषय है. इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है. प्रसाद ने कहा कि 20 इस्लामी देशों ने इस प्रथा को नियंत्रित किया है. हिंदुस्तान एक धर्मनिरपेक्ष देश है तो वह ऐसा क्यों नहीं कर सकता. उन्होंने बताया कि इसमें मजिस्ट्रेट जमानत दे सकता है. इसके अलावा भी कई एहतियाती उपाये किये गये हैं.

कांग्रेस ने तीन तलाक को निषेध करने वाले विधेयक को स्थायी समिति को भेजने की मांग करते हुए कहा कि तीन तलाक को फौजदारी का मामला बनाना उचित नहीं है. लोकसभा में ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019′ पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि भाजपा की तरफ से यह भ्रांति फैलायी जा रही है कि हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट नहीं है. हम साफ करना चाहते हैं कि हमारा रुख स्पष्ट है. तीन तलाक के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के फैसले का सबसे पहले कांग्रेस ने स्वागत किया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध सिर्फ तीन तलाक को इसे फौजदारी मामला बनाने से है, जबकि यह दीवानी मामला है.

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गोगोई ने इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की. उन्होंने कहा कि लाखों हिंदू महिलाओं को उनके पतियों ने छोड़ दिया है, उनकी चिंता क्यों नहीं की जा रही है? इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी विधेयक का विरोध किया और कहा कि इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए और पतियों से अलग रहने को मजबूर सभी धर्मों की महिलाओं के लिए एक कानून बनना चाहिए. उन्होंने इस विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ करार देते हुए दावा किया कि यह विधेयक मुसलमानों की बर्बादी के लिए लाया गया है. जावेद ने सवाल किया कि जब मुस्लिम पुरुष जेल में होगा तो पीड़ित महिला को गुजारा भत्ता कौन देगा? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार ने पहले मुस्लिम पुरुषों को आतंकवाद के नाम पर जेल में डाला, फिर भीड़ द्वारा हिंसा के जरिये निशाना बनाया और अब इस प्रस्तावित कानून के जरिए उनको जेल में डालना चाहती है.

कांग्रेस सांसद ने कि अगर सत्तारूढ़ पार्टी मुस्लिम महिलाओं के हित के बारे में इतना सोचती है तो उसके 303 सांसदों में एक भी मुस्लिम महिला क्यों नहीं है? उन्होंने सवाल किया कि सरकार को भीड़ द्वारा हिंसा के शिकार परिवारों की चिंता क्यों नहीं हो रही है? जावेद ने आरोप लगाया कि इस सरकार में अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है.

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