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श्रीकृष्ण की प्राणप्रिया राधा जी का प्रकाट्य दिवस राधाष्टमी

 

भगवान श्रीकृष्ण की प्राणप्रिया राधा जी का शुक्रवार 06 सितंबर को प्रकाट्य दिवस या जन्मदिवस है। राधा जी का भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बरसाना में वृषभानु और कीर्ति जी के घर जन्म हुआ था। राधाष्टमी के दिन फलाहार करते हुए व्रत रखा जाता है, दोपहर में राधा रानी की विधि विधान से पूजा की जाती है। पूजा के पश्चात राधाजी की आरती होती है। घी के दीपक या कपूर से राधाजी की आरती करें और घंटी तथा शंख बजाएं। साथ ही साथ राधाजी की आरती का पाठ भी करें।

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राधा जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं, उनको धन-धान्य से परिपूर्ण कर देती हैं। राधाजी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।

राधा जी की आरती

आरती श्री वृषभानुसुता की |

मंजु मूर्ति मोहन ममताकी || टेक ||

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,

विमल विवेकविराग विकासिनि ,

पावन प्रभु-पद-प्रीति प्रकाशिनि,

सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ||

मुनि-मन-मोहन मोहन मोहनि,

मधुर मनोहर मूरती सोहनि,

अविरलप्रेम-अमिय-रस दोहनि,

प्रिय अति सदा सखी ललिताकी||

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संतत सेव्य सत-मुनि-जनकी,

आकर अमित दिव्यगुन-गनकी,

आकर्षिणी कृष्ण-तन-मनकी,

अति अमूल्य सम्पति समता की||
कृष्णात्मिका, कृष्ण-सहचारिणि,

चिन्मयवृन्दा-विपिन-विहारिणि,

जगज्जननि जग-दुःखनिवारिणि,

आदि अनादिशक्ति विभुताकी ||

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