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बेतिया जेल में कुव्यवस्था तथा कोरोना को लेकर कैदियों में बना डर

 
सुबोध कुमार मिश्रा, बेतिया 2अप्रैल 2020 । जिला पश्चिमी चंपारण बेतिया मंडल कारा में मंडल कारा अधीक्षक तथा जेल जमादार के द्वारा कैदियों को शोषण करने का मामला प्रकाश में आया है ।
बता दें कि माननीय न्यायालय एवं राज्य सरकार के निर्देशानुसार बिहार के सभी जिलों के जेलों में कैदियों को अपनी परिजनों से मुलाकात करने की व्यवस्था वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा अपने घर से मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप के माध्यम से की गई है जिसका समय सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक निर्धारित किया गया है ।
इसी के बीच कैदी अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए, परिजनों को बताया कि  इस महामारी में जेल के अंदर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं  कैदियों के परिजनों ने बताया की जेल के अंदर कैदियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है जिसको लेकर के सैकड़ों की संख्या में कैदियों ने जिला पदाधिकारी बेतिया, जेल महानिरीक्षक पटना, तथा अध्यक्ष मानवाधिकार आयोग पटना को 24 मार्च 2020 को आवेदन द्वारा जांच कमेटी का गठन करने के लिए गुहार लगाई गई है।
जहां बंद कैदियों ने जेल अधीक्षक और वार्ड जमादार पर आरोप लगाते हुए आवेदन में कहा है कि मंडल कारा बेतिया में बंदियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन भोजन तालिका के अनुसार नहीं दिया जाता है और जो भोजन, जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया जाता है, उसकी गुणवत्ता ऐसी होती है जैसे कि किसी मवेशियों के लिए तैयार किया गया हो उसके साथ दैनिक उपयोगी वस्तुओं का भी वितरण नहीं किया जाता है।
नया बंदी जब जेल में आते हैं तो उससे ₹4000 से लेकर ₹5000 जेल अधीक्षक और  जेल जमादार द्वारा लिया जाता है इसके साथ कोई पुराना बंदी जेल अधीक्षक और जेल जमादार के तानाशाही रवैए के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसको जेल अधीक्षक के संरक्षण में जेल जमादार द्वारा बहुत ही बुरी तरह मारा-पीटा जाता है और सेल में बंद कर दिया जाता है तथा उसका चालान कर दिया जाता है।
बंदियों को जेल जमादार द्वारा सेल में बंद किया जाता है उसे पुनः सेल से निकालने के लिए जमादार द्वारा 4000 से ₹5000 की अवैध वसूली के साथ निकाला जाता है। वही बंद कैदियों ने आरोप लगाया कि जेल जमादार का कार्यकाल मंडल कारा से पूर्ण हो चुका है तथा उनका हस्तांतरण केंद्रीय  कारा मोतिहारी में कर दी गई है उसके बावजूद स्वजातीय होने के कारण एवं अवैध वसूली, बंदियों के शोषण के उद्देश्य से उनको जेल अधीक्षक द्वारा मंडल कारा में ही रखा गया है ।
इसके साथ कैदियों से मोबाइल पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के क्रम में कुछ परिजनों ने बताया कि एक कमरे में 50 से 60 व्यक्तियों को रखा जाता है वैसे में कोरोनावायरस के लेकर के महामारी का भी डर बना रहता है तथा कैदियों के बीच कोरोना वायरस के लेकर सोशल डिस्टेंस का अनुपालन नहीं किया जाता है और ना ही उन्हें सैनिटाइजर या मास्क की भी व्यवस्था भी जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध नहीं किया गया है।
वही मंडल कारा में बंद कैदियों और उनके परिजनों का कहना है कि कोरोना वायरस के लेकर के जिला प्रशासन अपने अंतर्गत मंडल कारा में जांच टीम गठित कर जांच के आलोक में उचित कार्रवाई करें। इस संबंध में 31 मार्च दिन मंगलवार को संवाददाता ने जब मंडल कारा अधीक्षक से मुलाकात कर बात करनी चाहिए तो जेल प्रहरी द्वारा कहा गया कि साहब अभी मीटिंग में व्यस्त है लगभग 1 घंटे ठहरने के बाद भी जेल अधीक्षक से उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी वही मंडल कारा गेट के बाहर कैदियों को जांच करने आए डॉ एन डी सिंह से संवाददाता कोरोना वायरस को लेकर अंदर कैदियों की स्वास्थ्य संबंधी पूछा गया तो उन्होंने बताया की सभी कैदी स्वस्थ है और उन्हें समय पर सभी चीजें मुहैया जेल प्रशासन द्वारा कराई जा रही है। अब सच्चाई कहां तक है ये जिला प्रशासन अधिकारी के जांच के दौरान स्पष्ट की जा सकेगी।

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