जसपा में अनिल झा और राजकिशोर यादव सहित कई नेता असंतुष्ट, एकीकरण प्रक्रिया प्रभावित
काठमांडू, १९ जून । समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) को मिलाकर जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) बनाने का निर्णय तो हो चुका है, लेकिन जसपा को अभी तक कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है । निर्वाचन आयोग की ओर से नवगठित पार्टी को स्वीकृत प्राप्त होने के बाद ही जसपा को कानूनी मान्यता मिल सकती है, जो प्रक्रिया में ही है । लेकिन नव गठित पार्टी के अन्दर कई राजनीतिक समस्या भी है, जिसके चलते एकीकरण प्रक्रिया ही प्रभावित होने लगी है ।
जसपा निकट स्रोत का मानना है कि तत्कालीन राजपा में रहे ६ अध्यक्षों में से दो अध्यक्ष अनिल झा और राजकिशोर यादव नवगठित जसपा के प्रति सबसे अधिक असंतुष्ट हैं । विशेषतः पार्टी एकीकरण संबंधी ड्राफ्ट तैयार करते वक्त झा और यादव पक्षधर को खबर नहीं की थी । यहां तक की एकीकरण प्रक्रिया में उन लोगों के पक्षधर नेताओं को समावेश भी नहीं किया गया, यही कारण अभी तक एकीकरण माइन्यूट में झा और यादव ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं । जब तक इन झा और यादव हस्ताक्षर नहीं करते, तब तक समस्या का समाधान होनेवाला नहीं है ।
कहा जाता है कि जब तक एकीकृत पार्टी में उन लोगों को सम्मानजनक जिम्मेदारी नहीं मिलती, तब तक वे लोग अपने अड़ान में ही रहेंगे । कहा गया है कि झा और यादव की असंतुष्टी के कारण ही पार्टी एकीकरण संबंधी बांकी प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पा रही है । ऐसी ही पृष्ठभूमि में पूर्व समाजवादी पार्टी से भी असंतुष्टी की आवाज बाहर आने लगी है ।
समाजवादी के साथ एक साल पहले एकीकृत जनमुक्ति पार्टी संबंद्ध नेताओं ने अपनी असंतुष्टी जाहिर किया है । तत्कालीन जनमुक्ति पार्टी संबंद्ध नेताओं को कहना है कि एकीकृत पार्टी में उन लोगों का सही मूल्यांकन ही नहीं हो रहा है । तत्कालीन समय में समाजवादी और जनमुक्ति पार्टी के बीच, जो नेता जिस पोजिसन में हैं, उस को उसी पोजिसन में रखने के लिए सहमती बनी थी । अर्थात् तत्कालीन जनमुक्ति पार्टी के सह–अध्यक्ष मानध्वज ब्लोन को समाजवादी पार्टी में अध्यक्ष मण्डल में रखने के लिए सहमती बनी थी ।
इसी बीच में राजपा और समाजवादी पार्टी बीच एकता हो गई । तत्कालीन जनमुक्ति पार्टी संबंद्ध नेताओं का कहना है कि नव गठित पार्टी में उन लोगों को अनदेखा किया जा रहा है । समाचार स्रोत का मानना है कि समाजवादी (तत्कालीन जनमुक्ति पार्टी संंबंद्ध) नेता और राजपा के असंतुष्ट नेताओं के बीच कई बार इस विषयों को लेकर भेटवार्ता हो चुकी है, जहां जसपा के वर्तमान नेतृत्व के प्रति उन लोगों ने असंतुष्टी जाहिर किया है ।
जनमुक्ति पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को मानना है कि नव गठित पार्टी जसपा सिर्फ प्रदेश नं. २ को लक्षित कर निर्माण किया जा रहा है, यहां अन्य प्रदेशों के प्रतिनिधि नगन्य हैं । कहा गया है कि जसपा कार्य समिति में पहाडी समुदाय, आदिवासी जनजाति और दलित समुदाय के लोग समावेश नहीं हैं, यहां तक कि प्रदेश नं. १, बागमती प्रदेश, गण्डकी प्रदेश और सदूरपश्चिम प्रदेश से एक भी प्रतिनिधि कार्य समिति में नहीं हैं । उन लोगों ने यह भी कहा है कि ऐसी अवस्था में जसपा सिर्फ प्रदेश नं. २ केन्द्रीत क्षेत्रीय पार्टी ही बनेगी, राष्ट्रीय पार्टी नहीं ।

