Sat. Aug 15th, 2020

कोरानाग्रस्त अर्थव्यवस्था और दूरगामी असर पड़ने वाला बजट : डॉ. श्वेता दीप्ति

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हिमालिनी  अंक मई 2020 । पूरा विश्व कोरोना की वजह से आर्थिक मंदी से गुजर रहा है और आने वाले समय में इसके दूरगामी असर पड़ने वाले हैं । व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण खरबों डॉलर के अनुमानित नुकसान के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आएगी । समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यूएन व्यापार रिपोर्ट में विकासशील देशों के लिए गंभीर चिंताएं जताई गई हैं जिसमें भारत और चीन अपवाद हो सकते हैं । दुनियाभर में तेजी के साथ फैल रहे घातक कोरोना वायरस ने वैश्विक अर्थव्यस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसके चलते वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ा है ।

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दो महीने पहले उच्चतम स्तर पर रहने वाला स्टॉक मार्केट में आज २० फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है । तेल की बढ़ी आपूर्ति और मांग में कमी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से कोरोना पर २४ जनवरी को हुई पहली बैठक के बाद से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में ५० फीसदी की गिरावट आ चुकी है । कोरोना का दुनिया के व्यवसायों पर असर साफतौर पर देखा जा सकता है, जहां कंपनियां अपने आपरेशंस कम कर रही हैं, कर्मचारियों से यह कहा जा रहा है कि वे घरों से काम करें और उत्पादन के लक्ष्य को कम किया जा रहा है । आर्गेनाइजेशन फॉर इकॉनोमिक को–ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) ने अंतरिम आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में मार्च के पहले हफ्ते में कोविड के चलते वैश्विक जीडीपी में ५० बेसिस प्वाइंट (२०१९ में २.९ प्रतिशत से २.४ प्रतिशत) का अनुमान लगाया है ।

१०० बेसिस प्वाइंट एक प्रतिशत प्वाइंट के बराबर है । एशियन डेवलपमेंट बैंक ने मार्च के पहले हफ्ते में जारी प्रेस रिलीज में यह कहा कि कोरोना का विकासशील एशियाई अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होगा। इसने अनुमान लगाया कि कोरोना से दुनिया की अर्थव्यवस्था को ७७ बिलयन डॉलर से ३४७ बिलयन तक यानि वैश्विक जीडीपी का ०.१ प्रतिशत से ०.४ प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है । गोल्डमेन सैच्स की रिपोर्ट (फरवरी के आखिरी हफ्ते में जारी) के अनुसार, कोरोना वायरस के चलते चीन की अर्थव्यवस्था में रुकावट आने के बाद २००८ में आई आर्थिक मंदी के बाद अब तक का बड़ा वस्तुओं की मांग को लेकर यह झटका है । जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके चीफ ग्लोबल स्ट्रेटजिस्ट डॉक्टर डेविड केली ने बताया कि सामाजिक तौर पर दूर रहने का असर साल २०२० के दूसरे क्वार्टर में देखा जाएगा । रिपोर्ट में यहा कहा गया— ‘सोशल डिस्टेंशिंग के बाद समुद्री पर्यटन, एयर लाइंस, होटल्स, कसिनो, खेलों को कार्यक्रम, मूवीज, थिएटर्स, रेस्टुरेंट और अन्य उद्योगों पर होगा ।’ उन्होंने अंदेशा जताया का इसका अमेरिका समेत दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर होगा और आने वाले महीने में कई लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ेगा ।

विश्व भर की इस विषम परिस्थिति से नेपाल भी अछूता नहीं है । देश में फिलहाल सभी बंद है । इस वर्ष को सरकार ने पर्यटन वर्ष घोषित किया था । जिसे वर्तमान परिस्थितियों में वापस ले लिया गया किन्तु इसके प्रचार प्रसार में करोड़ों का खर्च किया जा चुका था । विदेशों से आने वाले रेमिट्यान्स बंद हैं । इतना ही नहीं सरकार यह भी जान रही है कि विदेश गए लाखों नेपाली बेरोजगार होने वाले हैं और वापस अपने देश आने वाले हैं । ऐसे में नए आर्थिक वर्ष में आने वाले बजट से कई उम्मीदें जुड़ी हुई हैं । सरकार द्वारा २ ९ मई को लाए जाने वाले वार्षिक बजट में न केवल उस अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिश होगी जो कोरोना वायरस के कारण संकट में है, बल्कि कोरोना की स्थिति से निपटने के लिए उचित आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों को भी लाना होगा ।

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कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रव्यापी बंद के कारण, पर्यटन, उद्योग, व्यापार, व्यापार, विनिर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त और बुनियादी ढांचे के निर्माण सहित देश के सभी क्षेत्र आज एक ठहराव पर हैं । बजट में कोरोना की वजह से हमारे उद्योग और व्यापार को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अनुदान और ऋण पैकेज और अन्य राहत पैकेजों को शामिल करने की आवश्यकता है, ताकि आगे के नुकसान को रोका जा सके और हमारे व्यवसायों को बचाए रखा जा सके । मौजूदा जटिल स्थिति में आने वाले बजट से कई उम्मीदें हैं । आगामी बजट में अर्थव्यवस्था पर कोरोना प्रकोप के अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक प्रभाव को बदलने और उन चुनौतियों को अवसरों में बदलने और हमारी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी भी है ।

इतिहास में पहली बार, हमारे स्वास्थ्य क्षेत्र और अर्थव्यवस्था में अचानक संकट आया है । देश को इस संकट से बचाना आगामी बजट की एक बड़ी चुनौती है । इस चुनौती का सामना करने के लिए राज्य, निजी क्षेत्र और लोगों के सहयोग और समन्वय की आवश्यकता है । इसके लिए आवश्यक वातावरण बनाने का काम भी आगामी बजट और सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों का हिस्सा है । इसलिए, इस बजट की जिम्मेदारी है कि वह इस माहौल को बनाने के लिए उचित कदम उठाए । गरीबी उन्मूलन, सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना, आर्थिक, सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और समानता कार्यक्रम, साथ ही आगामी बजट, सभी क्षेत्रों में उच्च उम्मीदें हैं, ताकि वर्तमान संकट अर्थव्यवस्था को आसानी से प्रबंधित किया जा सके । लंबे समय तक बंदी के कारण सभी आर्थिक गतिविधियाँ ठप पड़ी हैं । इसने खाद्य संकट को प्रभावित किया है और सबसे कठिन रोजगार दिया है । इसलिए, कृषि उत्पादन बढ़ाना और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना आगामी बजट की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए ।

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नेपाल एक कृषि प्रधान देश है । अब भी, दो–तिहाई आबादी पारंपरिक निर्वाह कृषि पर निर्भर है । बढ़ती कृषि और विदेशी रोजगार के कारण कुल कृषि योग्य भूमि का २५ प्रतिशत से अधिक बंजर है । कोरोना के आतंक और बंदी के कारण देश और विदेश से गांव लौटने वाले लोगों की संख्या २ मिलियन तक पहुंच गई है । लंबे समय तक बंदी ने कई लोगों के लिए आजीविका की समस्याओं का जोखिम बढ़ा दिया है और संकट में भी डाल दिया है । हालांकि कोरोना का प्रकोप कम हो भी जाए तो भी स्थिति सामान्य होने में काफी समय लगेगा । न तो विदेशी रोजगार की स्थिति तुरंत अपने पुराने रूप में वापस आ सकती है और न ही घरेलू उद्योग और व्यापार ही सुगम हो पाएगा । यह भी निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि दस लाख से अधिक श्रमिक अपनी नौकरी खो देंगे और बेरोजगार हो जाएंगे । कृषि के आधुनिकीकरण और व्यावसायीकरण के बिना इन सभी जनशक्ति को तत्काल रोजगार प्रदान करना संभव नहीं है । इसलिए देश को कृषि के क्षेत्र पर अधिक ध्यान देकर इसे मजबूत बनाना चाहिए इसके लिए आगामी बजट में इस संबंध में विशेष कार्यक्रम लाना आवश्यक है ।

इसी प्रकार, बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करने के लिए बड़ी श्रम आधारित परियोजनाओं को लागू किया जा सकता है । बड़ी और बहुमुखी परियोजनाएं हजारों और लाखों नौकरियां पैदा कर सकती हैं । इसके लिए बड़े जल विद्युत, सिंचाई परियोजनाएं, सड़कें, कृषि और अन्य बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम बजट में लाए जा सकते हैं । सरकार ने प्रधान मंत्री रोजगार कार्यक्रम चलाकर कुछ रोजगार सृजित करने का प्रयास किया है । इस कार्यक्रम को संशोधित करने और इसे अधिक व्यापक बनाने और बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करने के लिए बजट में विशेष कार्यक्रम लाना आवश्यक है । इसी प्रकार, सार्वजनिक–निजी भागीदारी के माध्यम से उन्हें संचालित करके बड़ी संख्या में नौकरियों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक आवास जैसे कार्यक्रमों को बनाकर बड़ी संख्या में नौकरियों का सृजन किया जा सकता है ।

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एक और प्रमुख क्षेत्र जो देश में रोजगार के अवसर पैदा करता है, वह है घरेलू, लघु और मध्यम उद्यम और व्यवसाय ।
भूकंप के बाद बहुत मुश्किल से देश अपनी गति पकड़ रहा था । भूकम्प की चपेट में आने वाले छोटे उद्योग और व्यवसाय अभी फलने–फूलने लगे थे । वर्तमान लंबे समय से लॉकडाउन होने के कारण, ये छोटे व्यवसाय एक बार फिर से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं । ऐसे छोटे व्यवसायों और उद्यमियों को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है । बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के लिए, इस तरह के छोटे व्यवसायों और उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम लाना आवश्यक है । बजट के माध्यम से निवेश के अनुकूल माहौल बनाकर लघु उद्योग में नए निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यावसायिक सुविधा और प्रोत्साहन कार्यक्रम लाया जा सकता है ।
दूसरी तरफ शैक्षिक बेरोजगारी हमारी एक और बड़ी समस्या होने वाली है । यह अनुमान है कि हर साल लगभग ५००,००० शैक्षणिक श्रमशक्ति श्रम बाजार में प्रवेश करती है । लेकिन व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की कमी के कारण ऐसी जनशक्ति श्रम बाजार में रोजगार पाने में सक्षम नहीं है ।

ऐसे लोगों को रोजगार के साथ–साथ स्व–रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों के लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करने से ही जो लोग स्वरोजगार करने के इच्छुक हैं, उनके लिए प्रबंधन किया जाना चाहिए ताकि नेपाल की अर्थव्यवस्था, जो अभी संकट में है उसका निदान किया जा सके । संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था का प्रबंधन निश्चित रूप से आसान नहीं है । लेकिन इसे आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है यदि निजी क्षेत्र, जो देश की अर्थव्यवस्था के दो–तिहाई से अधिक सभी क्षेत्रों में योगदान देता है, उस पर अति आवश्यक रूप से ध्यान दिया जाए और उसके लिए जरुरी नीति सरकारी तौर पर बनाई जाए तभी वह आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है ।वर्तमान में इन सारी बातों पर सरकार को धयान देने की आवश्यकता है और आगामी बजट में इसे शामिल करना होगा तभी देश इस कोरोना से आए संकट से देश को निकाल सकती है । वरना देश इस महामारी से आई समस्याओं से निकल नहीं सकेगा और देश में भूख, गरीबी और बेरोजगारी की महामारी अपना जड़ जमा लेगी ।

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