Sat. Sep 12th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन का महीना, जानिए विशेष महत्व

 

आचार्य राधाकान्त शास्त्री । श्रावण मास में आने वाले सोमवार के दिनों में भगवान शिवजी का व्रत एवं पूजन होता है विशेष फलदायी
सावन माह में शिवभक्त श्रद्धा तथा भक्ति के अनुसार शिव की उपासना करते हैं। सावन माह में शिव की भक्ति के महत्व का वर्णन ऋग्वेद में किया गया है। चारों ओर का वातावरण शिव भक्ति से ओत-प्रोत रहता है। शिव मंदिरों में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। भक्तजन दूर स्थानों से जल भरकर लाते हैं और उस जल से भगवान का जलाभिषेक करते हैं।
प अनुसार सावन का यह माह शिवभक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष सावन मास आरम्भ 6 जुलाई से होगा। श्रावण मास में आने वाले सोमवार के दिनों में भगवान शिवजी का व्रत एवं पूजन विशेष फलदायी होता है।

सावन सोमवार महत्व :-

श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान श्री शिव की पूजा करने से व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। श्रावण मास के विषय में प्रसिद्ध एक पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास के सोमवार व्रत, जो व्यक्ति करता है उसकी सभी इछाएं पूर्ण होती है। इन दिनों किया गया दान पूण्य एवं पूजन समस्त ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल देने वाला होता है। इस व्रत का पालन कई उद्देश्यों से किया जा सकता है।

वैवाहिक जीवन की लम्बी आयु और संतान की सुख-समृ्द्धि के लिये या मनोवांछित वर की प्राप्ति करती है। सावन सोमवार व्रत कुल वृद्धि, लक्ष्मी प्राप्ति और सुख -सम्मान देने वाले होते हैं। इन दिनों में भगवान शिव की पूजा जब बेलपत्र से की जाती है, तो भगवान अपने भक्त की कामना जल्द से पूरी करते है। बिल्व पत्थर की जड में भगवान शिव का वास माना गया है इस कारण यह पूजन व्यक्ति को सभी तीर्थों में स्नान करने का फल प्राप्त होता है।

यह भी पढें   जनकपुरधाम वार्ड 23 का कार्यालय भवन का प्रथम चरण पूर्ण

श्रावण सोमवार पूजा:-

इस व्रत का आरंभ सोमवार के दिन प्रात:काल से हो जाता है। प्रात:काल में उठने के पश्चात स्नान और नित्यक्रियाओं से निवृत होकर घर की सफाई कर, पूरे घर में गंगा जल या शुद्ध जल छिडकर, घर को शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद घर के ईशान कोण दिशा में भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए। मूर्ति स्थापना के बाद सावन मास व्रत संकल्प लेना चाहिए। श्रावण मास में केवल भगवान श्री शंकर की ही पूजा नहीं की जाती है, बल्कि भगवान शिव की परिवार सहित पूजा करनी चाहिए।

सोमवार के व्रत में भगवान भगवान शिवजी समेत श्री गणेश जी, देवी पार्वती व नन्दी देव एवं नागदेव मूषक राज सभी की पूजा करनी चाहिए। पूजन सामग्री में जल, दुध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृ्त,मोली, वस्त्र, जनेऊ, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बेल-पत्र, भांग, आक-धतूरा, कमल,गट्ठा, प्रसाद, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, मेवा, दक्षिणा चढाया जाता है। इस दिन धूप दीया जलाकर कपूर से आरती करनी चाहिए।

पूजा करने के बाद एक बार भोजन करना चाहिए.सावन के व्रत करने से व्यक्ति को दुखों से मुक्ति मिलती है और सुख की प्राप्ति होती है। सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से शुरु होकर सूर्यास्त तक किया जाता है। व्रत के दिन सोमवार व्रत कथा सुननी चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति को दिन में सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन करना चाहिए ।
श्रावण(सावन) में शिव उपासना से सर्व सिद्धि एवं
अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है।

यह भी पढें   बदलते हिमालय, पिघलते ग्लेशियर और बढ़ता मानवीय दबाव भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी : बिमल सरार्फ

आराकाशा के अध्ययन ग्रंथों के अनुसार श्रावण मास में शिव की पूजा करनी चाहिए। शिव की उपासना और व्रत रखने से उत्तम फल मिलते हैं..

* श्रावण के पावन माह में शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठित करवाकर स्थापित करने से व्यवसाय में वृद्धि और नौकरी में तरक्की मिलती है।
पवित्र श्रावण मास 6 जुलाई से आरंभ हो रहा है , इसमे यह 7 बहुत सरल उपाय हैं खास सबके लिए इससे मिलेगी हर चिंता से मुक्ति एवं जीवन का सुगम मार्ग

* श्रावण माह में सोमवार को दिन , घर या मंदिर शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करवा कर धूप-दीप जलाकर मंत्र पाठ एवं जप करने से समस्त बाधाओं का शमन होता है।
* श्रावण मास में सामान्य शिव उपासना से भी मनोवांछित फल मिल सकता है अगर मन शुद्ध और आचरण पवित्र हो तो सभी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है ।
* इस मास में भगवन भोलेनाथ माता और माता पार्वती दोनों ही शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

*  शिव जी का पूरा परिवार, गण और अवतार इस मास में प्रसन्न मुद्रा में वरदान देते हैं अत: सबको इस मास का पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।

* किसी भी बीमारी से परेशान होने पर और प्राणों की रक्षा के लिए इस मास में महामृत्युंजय मंत्र का जप करें या योग्य आचार्यों से करावें, महामृत्युंजय मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से ही करें। मंत्र दिखने में जरूर छोटा दिखाई देता है, किंतु प्रभाव में अत्यंत चमत्कारी है।
अतः सम्भव हो सके तो रोज कम से कम 11 या 21 बार लिखें भी जो मंत्र इस प्रकार है-

यह भी पढें   एसीसी प्रीमियर कप– हांगकांग ने दिया नेपाल को जीत के लिए २६२ रनों का लक्ष्य

* संपूर्ण महामृत्युंजय मंत्र *

ॐ हौं ॐ जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ

अन्य सरल मंत्र

* ॐ नमः शिवाय

* ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमय ह्रीं ऐं ॐ।।

* महिलाएं सुख-सौभाग्य के लिए भगवान शिव की पूजा करके दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें।

मंत्र : – ॐ ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ॐ।

* लक्ष्मी अपने श्री स्वरूप में अखंड रूप से केवल भगवान शिव की कृपा से ही जीवन में प्रकट हो सकती हैं। अखंड लक्ष्मी प्राप्ति हेतु निम्न मंत्र की दस माला का जाप करें।

मंत्र- ॐ श्रीं ऐं ॐ।

* शादी में हो रही देरी दूर करने के लिए इस मंत्र के साथ शिव-शक्ति की पूजा करें।

मंत्र – हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम।।

* संपूर्ण पारिवारिक सुख-सौभाग्य हेतु निम्न मंत्र का जप भी कर सकते हैं।

मंत्र- ॐ साम्ब सदा शिवाय नम:।
महादेव का आशीर्वाद आप सब पर बनी रहे,
महादेव आपको उत्तम आयु, आरोग्यता,, सर्वोत्तम शिक्षा, ज्ञान, सर्वश्रेष्ठ धर्म-कार्य, अच्छी पद-प्रतिष्ठा प्रदान करें।

आचार्य राधाकान्त शास्त्री,ब्रह्म वाणी यज्ञ ज्योतिष आश्रम कालीबाग बेतिया, संपर्क – 9934428775

आचार्य राधाकान्त शास्त्री,

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com