खूंखार आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क का सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी बना अफगानिस्तान का गृहमंत्री

जिसके सिर पर अमेरिका ने इनाम घोषित कर रखा है तालिबान ने अब उसी सिराजुद्दीन हक्कानी को अफगानिस्तान का नया गृहमंत्री बना दिया है। मंगलवार को तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी केयरटेकर सरकार बना ली। इस सरकार में सिराजुद्दीन हक्कानी को गृहमंत्री बनाया गया है। सिराजुद्दीन हक्कानी का नाता पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान इलाके से है। खूंखार आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क को चलाने वाले सिराजुद्दीन हक्कानी के बारे में कहा जाता है कि वो नॉर्थ वजीरिस्तान के मिराम शाह इलाके में रहता है। हक्कानी नेटवर्क के इस शीर्ष आतंकवादी का नाम FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में अभी भी शामिल है। सिराजुद्दीन हक्कानी के कारनामों की लिस्ट भी काफी बड़ी है।
अफगानिस्तान के नए गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी का नाम वैश्विक स्तर के आतंकवादियों की सूची में है। खास बात यह भी है कि अमेरिका ने उसके बारे में सूचना पर 50 लाख डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। अमेरिका सिराजुद्दीन हक्कानी को अपना बड़ा दुश्मन मानता है। साल 2008 में जनवरी के महीने में काबुल में एक होटल पर हुए हमले का आरोप सिराजुद्दीन के सिर पर है। इस हमले में छह लोग मारे गये थे, जिसमें अमेरिकी भी शामिल थे। यूनाइटेड स्टेट के खिलाफ अफगानिस्तान में क्रॉस बॉर्डर अटैक में भी सिराजुद्दीन का हाथ माना जाता रहा है। इसके अलावा साल 2008 में अफगानी राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या की साजिश रचने में भी इस खूंखार आतंकी का नाम सामने आया था।
तालिबान-अलकायदा से है नजदीकी
हक्कानी नेटवर्क के जरिए पूरी दुनिया में आतंक मचाने वाले सिराजुद्दीन के बारे में यह भी बताया जाता है कि तालिबान और अलकायदा से उसके करीबी संबंध है। हक्कानी का नाम वैसे तो कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है, लेकिन जिन तीन बड़ी घटनाओं में इसका सीधा हाथ रहा है, उनमें से दो घटनाएं भारतीय दूतावास पर बड़े आत्मघाती हमले से जुड़ी हैं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान से सीधा संबंध होने की वजह से भी यह आतंकी संगठन अब भारत के लिए बड़ी चिंता का कारण बना है।
एक वक्त था जब अफगानिस्तान में सरकार के खिलाफ हमलों में तालिबान से ज्यादा हक्कानी नेटवर्क का नाम सामने आने लगा था। हक्कानी नेटवर्क के ऑपरेशन की कमान जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे सिराजुद्दीन हक्कानी ने संभाली और कहा जाता है कि क्रूरता के मामले में वो अपने पिता से भी आगे है। साल 2008 से लेकर 2020 तक अफगानिस्तान में हुए कई बड़े आतंकवादी हमलों में सिराजुद्दीन का हाथ था। यह भी बताया जाता है कि हक्कानी नेटवर्क से 15 हजार आतंकी जुड़े हुए हैं।
पाकिस्तान को हक्कानी पसंद है
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI हक्कानी नेटवर्क को पनाह देती रही है और उसे समय-समय पर भारत के खिलाफ इस्तेमाल करती रही है। पूर्वी अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क का प्रभाव सबसे ज्यादा है। अफगानिस्तान में प्रभावी इस संगठन का बेस पाकिस्तान की उत्तर-पश्चिम सीमा में है। पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान में तो इसकी समानांतर सरकार चलती है। पिछले कुछ सालों में इस संगठन की गतिविधियां काफी बढ़ी हैं। तालिबान लीडरशिप में भी हक्कानी नेटवर्क की उपस्थिति बढ़ी है। 2015 में नेटवर्क के मौजूदा प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी को तालिबान का डिप्टी लीडर बनाया गया था।
आपको बता दें कि अफगानिस्तान के नये प्रधानमंत्री मुल्ला अखुंद क्वेटा स्थित रहबरी शूरा के प्रमुख हैं। रहबरी शूरा को क्वेटा शूरा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि ये पाकिस्तान के बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में है। मुल्ला अखुंद पख्तून मूल के हैं और इनकी रिहाइश कंधार की है। ये तालिबान के फाउंडर मेंबर भी हैं। दरअसल शूरा एक अरबी शब्द है। शूरा, समिति या कमेटी जैसी संस्था होती जो सलाह देने का काम करती है। पाकिस्तान के क्वेटा शहर से तालिबान के कई बड़े नेता जुड़े हुए हैं और वहीं से फ़रमान भी जारी करते रहे हैं इसीलिए तालिबान की ये समिति क्वेटा शूरा कहलाती है।

