भारतीय सामाजिक व्यवस्था मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में कारगर है: डॉ मनोज तिवारी
डॉ मनोज तिवारी, वाराणसी । विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2021 के अवसर पर मंडलीय मनोवैज्ञानिक केंद्र, मुरादाबाद द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया जिसका थीम था “एक असामान दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य”।
वेबीनार को विशिष्ट वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए डॉ मनोज कुमार तिवारी, वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, एआरटी सेंटर, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू ने कहा कि विश्व की तुलना में आज भी भारतवर्ष में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं कम है। दुनिया में 6 से 1 व्यक्ति मानसिक स्वास्थ समस्या से पीड़ित है तो वहीं भारत में 7 में से 1 व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहा है, इसके लिए भारत की प्राचीन पारिवारिक विरासत व सामाजिक सहयोग तंत्र जिम्मेदार है। भारत के लिए चिंता का विषय मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता एवं संसाधनों की कमी है। भारत में आज भी लोग सोचते हैं कि मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता के पास वही लोग जाते हैं जो पागल हो। डॉ तिवारी ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों में अकेलेपन की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण मानसिक स्वास्थ्य एवं समायोजन की समस्या बढी़ हैं जिसे निपटने के लिए आवश्यक है कि समाज के सभी वर्ग योगदान दें।
प्रो. मो. गालिब हुसैन पूर्व हेड एवं डीन, सामाजिक विज्ञान संकाय, जामिया मिलिया इस्लामिया ने वेबीनार को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बताया कि कोरोना के कारण पूरी दुनिया में स्वास्थ संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं उसमें मानसिक स्वास्थ समस्याएं भी शामिल है। इससे निपटने के लिए आवश्यक है कि समाज के सभी व्यक्ति मिलजुल कर एक दूसरे का सहयोग करें, उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए विस्तार से चर्चा किया।
वेबीनार को संबोधित करते हुए डॉ कुमार मंगलम सारस्वत ने दुनिया व भारत में वर्तमान मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं एवं संसाधनों की स्थिति पर प्रकाश डाला वेबीनार की सहसंयोजिका रीना तोमर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को स्वीकार नहीं करता और न ही उसके निदान-उपाचार के लिए प्रयास करता है। वेबीनार के संरक्षक व मंडलीय मनोवैज्ञानिक मुरादाबाद श्री सुंदरम सक्सेना जी के मार्गदर्शन में संपूर्ण विश्व विनाश संपन्न हुआ।
वेबीनार में विभिन्न प्रदेशों से शिक्षक, प्रशिक्षक, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी जुड़े रहें। वैगनआर का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ कुमार मंगलम सारस्वत ने किया।


