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डा श्रीगोपालनारसन एडवोकेट

इन्दिरा गांधी ने कभी अपनी जान की परवाह नही की। उनके जीवन का आखिरी सम्बोधन भी यही रहा कि मेरे खून का एक एक कतरा देश के लिए काम आए और सच में उन्होने अपने शरीर का एक एक कतरा देश पर न्योछावर करके दिखाया।आयरन लेडी के नाम से मशहूर इन्दिरा गांधी ने प्रधानमन्त्री के रूप में देश की सेवा करते हुए भारत को न सिर्फ दुनियाभर में पहचान दिलाई बल्कि दुनिया को अपनी व देश की ताकत का लोहा भी मनवाया। बचपन में आजादी की लडाई के दौरान बाल वानर सेना खडी कर अंग्रेजो को चुनौती देने वाली इन्दिरा बाल्यवस्था से ही देश पर न्योछावर होने को आतुर थी। अपने पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू से राजनीतिक प्रशिक्षण प्राप्त कर एक परिपक्व नेता बनी इन्दिरा ने कभी पीछे मुडकर नही देखा और देश की एकता व अखण्डता के लिए सदैव आगे बढती चली गई।जीवन पर्यन्त राष्टृ के प्रति समर्पित रही .
कडी मेहनत,पक्का इरादा,दूरदृष्टि जैसे जीवन सूत्र दुनिया को देने वाली इन्दिरा गांधी ने बीस सूत्री कार्यक्रम देश मे लागू कर गांव स्तर पर विकास का रास्ता तैयार किया। वे चाहती थी कि सबसे पहले गांव खुशहाल हो तो देश अपने आप खुशहाल हो जाएगा। उनकी सुदृड विदेश नीति की बदोलत भारत ने दुनियाभर के देशों के बीच अपनी खास पहचान बनाई। वही देश के अन्दर समाज के आखिरी व्यक्ति के चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए इन्दिरा गांधी हमेशा बेचैन रहती थी।गजब की फूर्तिली व देश तथा समाज के लिए हमेशा अच्छा सोचने वाली इन्दिरा गांधी ने दुनिया भर में भारत को नई पहचान देने का काम किया। उन्होने अपने रहते कभी तिरंगें को झुकने नही दिया और भारत का लौहा दुनिया भर में मनवाया। इन्दिरा गांधी देश के गरीबों की मसीहा थी जिन्होने जीवन पर्यन्त ग्राम स्तर के विकास कार्यक्रम चलाकर गरीबो को खुशहाल बनाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की कौशिश की। उन्ही के द्वारा शुरू किये गए विकास कार्यक्रम आज भी गरीबोत्थान का आधार बने हुए है। जो हमेशा हमे इन्दिरा जी की याद दिलाते रहेगें।
इन्दिरा गांधी की अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर उनकी विशेष पकड होती थी। साधारण से साधारण कार्यकर्ता को नाम लेकर बुलाना और उन पर विश्वास करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा हुआ करता था। निर्णय लेने की जो क्षमता इन्दिरा गांधी में थी वह क्षमता आज किसी भी दूसरे नेता में देखने को नही मिलती।पाकिस्तान को धुल चटाकर बंगलादेश को जन्म देने वाली इन्दिरा गांधी के दुनियाभर के देश इस कदर कायल थे कि उन्हे 165 देशो के संगठन का अध्यक्ष तक बना दिया था। भारत में ऐसा सम्मान आज तक कोई दूसरा नेता प्राप्त नही कर पाया है। इन्दिरा जी का लोहा उनके विरोधी भी मानते थे।आपात काल के मजबूरीवश लिए गए निर्णय से हुए नुकसान को दरकिनार कर दे तो इन्दिरा हमेंशा अपने लिए गए निर्णयों से फायदे में ही रही। सच यह भी है कि जो विकास प्रथम प्रधानमन्त्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और इन्दिरा गांधी के जमाने में हुआ, उतने विकास की कल्पना फिर कभी साकार नही हुई। कांग्रेस शासन काल में जब जब भी सत्ता की बागडोर नेहरू परिवार के बजाए किसी ओर के हाथों में आई तब तब ही कांग्रेस को विवादो मे धिसटना पडा। हांलाकि पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिहं स्वयं में एक सफल प्रधानमन्त्री रहे है लेकिन उन्हे अपने कई सहयोगी मन्त्रियो के भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने के कारण परेशानी भी झेलनी पडी। वह तो कांग्रेस अध्यक्ष रही सोनिया गांधी की सुझ बूझ से भ्रष्टो के प्रति कोई रियायत न बरतकर एक सही संकेत देने की कौशिश की गई वरना हालात और भी खराब हो जाते । ऐसे में इन्दिरा गांधी की याद हो आती है जिन्होने हमेशा सही वक्त पर सही निर्णय लेकर कांग्रेस को जिन्दा रखा और देश को भी नई सोच दी। उन्होने देश के लिए अपने खून का एक एक कतरा बहाकर यह साबित कर दिया था कि उनकी कथनी और करनी एक समान थी।इन्दिरा गांधी देश की सीमाओं के प्रति और अपने बहादुर सैनिको के हितो के प्रति हमेशा संवेदनशील रही। देश का विकास कैसे हो यह उनकी पहली सोच हुआ करती थी। साथ अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान करना उन्हे बखूबी आता था। कांग्रेस के सत्ता में होते हुए वे कभी अपने कार्यकर्ताओं को सत्ता से जोडना नही भूलती थी। भले ही संजय गांधी की इन्दिरा गांधी के प्रधानमन्त्री पद पर रहते हुए खूब चली हो परन्तु उन्होने कभी भी संजय गांधी को सत्ता में भागीदार नही बनाया। हालाकि संजय गांधी ने देश में परिर्वतन की एक नई कौशिश की थी। जिसमें सीमित परिवार की सोच का उन्होने आगे बढाने का काम किया परन्तु कई जगह जबरन नसबन्दी की धटनाओं के कारण उन्हे विवादो का सामना करना पडा। बहरहाल इन्दिरा गांधी के प्रधानमन्त्री पद पर रहते हुए जो निर्णय हुए उनसे देश आगे बढा और देश को दुनियाभर में विकासशील देश के रूप में नई पहचान मिली। देश की सीमाओं की रक्षा और बंगलादेश के निर्माण के लिए इन्दिरा गांधी हमेशा याद की जाती रहेगी। वही बैंको का राष्टृीयकरण,पाकिस्तान को युद्ध में हराकर उसके धुटने टिकवा देने के लिए भी इन्दिरा गांधी को हमेशा याद किया जाएगा।जब इन्दिरा गांधी की नई दिल्ली में उन्ही के अगंरक्षको द्वारा शहादत की गई तो पूरा देश रो पडा था। इन्दिरा गांधी को बताते है आप्ररेशन ब्लूस्टार के बाद अपने विरूद्ध रचे गए षडयन्त्र का आभास हो गया था परन्तु फिर भी उन्होने अपने अगंरक्षको पर से भरोसा नही खोया उनकी यही आखिरी भूल उनके लिए शहादत का कारण बन गई।देश के लिए बलिदान हुई इन्दिरा गांधी पर यह नारा आज भी सार्थक है कि जब तक सूरज चांद रहेगा इन्दिरा तेरा नाम रहेगा।
(लेखक इन्दिरा गांधी द्वारा शुरू किये गए बीस सूत्री कार्यक्रम के उत्तराखण्ड राज्य स्तरीय सदस्य रह चुके है।)

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