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विजनेस मन्त्र

 

दशहरा, दीपावली और छठ- पवोर्ं की एक लम्बी कतार आप के सामने में हैं। इस अवसर पर आप भी चाहेंगे आप का व्यापार फले-फूले। इसके लिए पेश हैं पाँच मन्त्र-
पहला मन्त्रः कोई भी ग्राहक जिस दूकान से अपनी अधिकतम अपेक्षाओं की पर्ूर्ति कर पाता है, वह उसी दूकान का स्थायी ग्राहक बनना पसन्द करता है। इसलिए सबसे पहले ग्राहक से सुमधुर सम्बन्ध बनाने के लिए उसकी अपेक्षाओं को समझकर जहाँ तक सम्भव हो उन्हें पर्ूण्ा करने की कोशिश करें। इससे ग्राहक के साथ आपके सम्बन्ध मजबूत होंगे। ऐसे संतुष्ट ग्राहक अन्य ग्राहकों को भी आपके पास भेजेंगे।
दूसरा मन्त्र ः -वार्तालाप) ग्राहक के साथ आप खुले हृदय से बातें करेंगे और उचित सलाह समय-समय पर देते रहेंगे तो ग्राहक से आप का अपनत्व और बढÞेगा। बात करते समय ग्राहक जैसी भाषाओं को आसानी से समझे, उसी भाषा में बात करें। ग्राहक की बात ध्यान और धर्ैय से सुनें। इससे ग्राहक तो खुश होगा ही, आप को भी वस्तुओं के बारें में फीडबैक मिलता रहेगा।
तीसरा मन्त्रः -व्यक्तिगत सम्बन्ध) औपचारिकताओं को कम करते जाईए और ग्राहक की पसन्द-नापसन्द के बारे में जानते जाईए और तदनुसार व्यवहार भी कीजिए। आप को ग्राहकका पर्ूण्ा और अटूट विश्वास प्राप्त होगा। व्यापार फलेगा, फुलेगा।
चौथा मन्त्रः हमेशा हाँ, कहने से काम नहीं चलेगा। जो काम आपसे नहीं होने वाला हो, उसके लिए विनम्रमतापर्ूवक ‘ना’ कहना सीखिए। इससे आप ढेÞर सारे अनावश्यक झंझटों से तो बचेंगे और बात के पक्के व्यापारी के रूप में आपकी छवी बनेगी। इससे ‘टाइम म्यानेजमेन्ट में आपको मदद मिलेगी।
पाँचवा मन्त्रः -सुदर्ीघ सम्बन्ध) एक कहावत हैं, आँख से ओझल मन से बाहर। इसलिए ग्राहकों से आप का निरन्तर सम्बन्ध होता रहे तो अच्छा। आज के जमाने में एसएमएसर्,र् इ-मेल, फोन आदि अनेक साधनों से इसे सम्भव किया जा सकता है। इस तरह सम्बन्धों को मजबूती प्रदान करते जाएं।
ग्राहक को भगवान मान कर आप व्यवहार करें तो आप और ग्राहक दोनों खुश ! हैं न मन्त्र कमाल के – िि
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