माता ही सच्चा गुरु हैं : मोरारी बापू

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर
माता ही सच्चा गुरु हैं। बच्चों के संस्कार पिता से नहीं मिलता हैं। माता बच्चों का एक अच्छा गुरु भी हैं। मां कुम्हार है। कुम्हार जिस तरह के वर्तन वनाते है उनके कला पर निर्भर हैं। इसी तरह बच्चों को संस्कार पढाई की कला मां ही सीखाती हैं। उपयुक्त बातें जनकपुरधाम के तिरहुतिया गाछी में कथा के6वें दिन मोरारी बापू ने व्यास पीठ से कहा। बापू ने कहा कि पिता बच्चों के परवरिश में भूमिका निर्वाह करते है लेकिन माता बच्चों के परवरिश के साथ उचित शिक्षा और संस्कार देती है इसलिए मां गुरु हैं। बापू ने बुधवार की रात जानकी मंदिर में सीता राम बिवाहोत्सव के दौरान सखियों ने मिथिला में गाली दी की कौशल्या गोरी थीदशरथ गोरा थे तो राम कैसे श्याम (काला) कैसे हुए? बापू ने कहा कि राम काला कैसे हो सकते है। जो सूर्य वंशी हैं। सूर्य का आभा तेज हैं। तो राम काला हो ही नहीं सकता हैं। बापू ने अमरीका के टैक्सास में मारे गए के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त किए तथा बापू ने कहा कि अगर वह परिवार को एक हजार डॉलर सहायता करेंगेअगर वह परिवार चाहे तो! कथा में मटिहानी केमान महंत जगन्नाथ दास बैष्णव, जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास बैष्णव, जानकी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास बैष्णव सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं।


