मधेशी आयोग ने संविधान संशोधन करने का सुझाव दिया
कार्तिक 9 गते, काठमांडू । बड़ी हिम्मत जुटाकर मधेशी आयोग ने संविधान और ऐन संशोधन करने का सुझाव सरकार को दिया है । आयोग बनने के बाद यह पहला महत्वपूर्ण काम मधेशी आयोग ने किया है।
मधेशी आयोग ने अन्य सभी आयोग में ‘राष्ट्रिय’ शब्द रखा गया है लेकिन मधेशी आयोग के आगे यह शब्द नहीं रखने पर अपनी असन्तुष्टि प्रगट की है । आयोग ने संविधान संशोधन करके ‘राष्ट्रिय मधेशी आयोग’ नाम रखने का सुझाव दिया है।
संविधान में अन्य आयोग के रूप में मधेशी आयोग की व्यवस्था है । इसका सुझाव है अन्य आयोग (अन्य आयोगहरु) से अन्य शब्द को ही हटाना चाहिए । तथा संविधान में ही मधेशी आयोग का काम, कर्तव्य और अधिकार भी उल्लेख होना चाहिए । अन्य संवैधानिक आयोग का काम, कर्तव्य औए अधिकार संविधान में ही व्यवस्था है लेकिन मधेशी आयोग का ऐन में व्यवस्था किया गया है । इस पर आयोग असन्तुष्ट है ।
आयोग का मानना है की ऐसा संशोधन से मधेशी समुदाय राष्ट्र के मूलधार में समावेश होने जा गौरव महसुस जर सकता है तथा विभेद और विषमता की न्यूनीकरण की भ अनुभूति ही सकती है ।
मधेशी आयोग का ऐन २०७४ के दफा ७ संशोधन करके सिफारिश करने ‘सिफारिस गर्ने’ के जगह निर्देशन देने ‘निर्देशन दिने’ शब्द रखने का भी सुझाव आयोग ने दिया है ।
‘संविधान में ही इसका काम कर्तव्य और अधिकार का व्यवस्था अगर नही हुआ तो आयोग से यथावत रुप में वितृष्णता फैलेगी । राज्य को आर्थिक व्ययभार भी बढ़ेगा यह बात आयोग के अध्यक्ष दत्त का कहना है । इसलिए या तो इसको संविधान से खारेज करना पड़ेगा इस संविधान में काम कर्तव्य अधिकार उल्लेख करना पड़ेगा।
मधेशी आयोग ने वर्तमान आरक्षण नीति भी पुनरावलोकन करने के लिए सरकार को सिफारिस किया है । जातीय ने बदला वर्गीय आधार में आरक्षण नीति कार्यान्वयन करने के पक्ष में आयोग है ।
जनसंख्या नीति पुनरावलोकन गर्न सुझाव
आयोग के अध्यक्ष विजय दत्त अनुसार सरकार को जनसंख्या सम्बन्धी नीति भ पुनरावलोकन करना चाहिए । वर्तमान जनसंख्या नीति गलत तथा असन्तुलित अवस्था में है जिसके कारण आयोग ने नीति पुनरावलोकन करने की बात कही है ।
आयोग के अध्यक्ष दत्त ने कहा है कि सरकार द्वारा अभी दी जा रही गरीबी का प्रमाणपत्र भी अनुचित तरीका से वितरित हो रही है उसे भ पुनरावलोकन करना जरूरी है ।

