Sun. Sep 13th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

मधेशी आयोग ने संविधान संशोधन करने का सुझाव दिया

 

कार्तिक 9 गते, काठमांडूबड़ी हिम्मत जुटाकर मधेशी आयोग ने संविधान और ऐन संशोधन करने का सुझाव सरकार को दिया है । आयोग बनने के बाद यह पहला महत्वपूर्ण काम मधेशी आयोग ने किया है। 

मधेशी आयोग ने अन्य सभी आयोग में ‘राष्ट्रिय’ शब्द रखा गया है लेकिन मधेशी आयोग के आगे यह शब्द नहीं रखने पर अपनी असन्तुष्टि प्रगट की है  । आयोग ने  संविधान संशोधन करके ‘राष्ट्रिय मधेशी आयोग’ नाम रखने का सुझाव दिया है।

संविधान में अन्य आयोग के रूप में मधेशी आयोग की व्यवस्था है । इसका सुझाव है अन्य आयोग (अन्य आयोगहरु) से अन्य शब्द को ही हटाना चाहिए । तथा संविधान में ही मधेशी आयोग का काम, कर्तव्य और अधिकार भी उल्लेख होना चाहिए । अन्य संवैधानिक आयोग का काम, कर्तव्य औए अधिकार संविधान में ही व्यवस्था है लेकिन मधेशी आयोग का ऐन में  व्यवस्था किया गया है । इस पर आयोग असन्तुष्ट है ।

यह भी पढें   रुकुम पश्चिम में जीप दुर्घटना... दो लोगों की हुई मौत

आयोग का मानना है की ऐसा संशोधन से मधेशी समुदाय राष्ट्र के मूलधार में समावेश होने जा गौरव महसुस जर सकता है तथा विभेद और विषमता की न्यूनीकरण की भ अनुभूति ही सकती है ।

मधेशी आयोग का ऐन २०७४ के दफा ७ संशोधन करके सिफारिश करने ‘सिफारिस गर्ने’ के जगह निर्देशन देने ‘निर्देशन दिने’ शब्द रखने का भी सुझाव आयोग ने दिया है ।

‘संविधान में ही इसका काम कर्तव्य और अधिकार का व्यवस्था अगर नही हुआ तो आयोग से यथावत रुप में वितृष्णता फैलेगी । राज्य को आर्थिक व्ययभार भी बढ़ेगा यह बात आयोग के अध्यक्ष दत्त का कहना है ।  इसलिए  या तो इसको संविधान से खारेज करना पड़ेगा इस संविधान में काम कर्तव्य अधिकार उल्लेख करना पड़ेगा।

यह भी पढें   प्रधानमंत्री की उद्यमियों के साथ चर्चा

मधेशी आयोग ने वर्तमान आरक्षण नीति भी पुनरावलोकन करने के लिए सरकार को सिफारिस किया है । जातीय ने बदला वर्गीय आधार में आरक्षण नीति कार्यान्वयन करने के पक्ष में आयोग है ।

 आयोग के अध्यक्ष विजयकुमार दत्त के अनुसार आरक्षण की व्यवस्था के बारेमें आयोग ने अध्ययन किया है जिसके अनुसार ल आरक्षण का लाभ लक्षित वर्ग को प्राप्त नहीं होने की बात सामने आई है । इसीलिए आयोग ने अभी के आरक्षण नीति पुनरावलोकन करके वर्गीय आधार में बनाने के लिए सरकार से आग्रह किया है ।
 आयोग ने २०७९ चैत में प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड से मिलकर जातीय आरक्षण हटाकर वर्गीय आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए लिखित अनुरोध किया था । लेकिन उसका कार्यान्वयन नही होने से आयोग के पदाधिकारी असन्तुष्ट है ।

जनसंख्या नीति पुनरावलोकन गर्न सुझाव

यह भी पढें   मोटरसाइकिल सड़क डिवाइडर से टकराई...दो लोगों की मृत्यु

आयोग के अध्यक्ष विजय दत्त अनुसार सरकार को जनसंख्या सम्बन्धी नीति भ पुनरावलोकन करना चाहिए । वर्तमान जनसंख्या नीति गलत तथा असन्तुलित अवस्था में है जिसके कारण आयोग ने नीति पुनरावलोकन करने की बात कही है ।

आयोग के अध्यक्ष दत्त ने कहा है कि सरकार द्वारा अभी दी जा रही गरीबी का प्रमाणपत्र भी अनुचित तरीका से वितरित हो रही है उसे भ पुनरावलोकन करना जरूरी है ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com