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बंगबासी मैथिल उन्नयन समिति कोलकाता द्वारा ८ लागों को प्रदान किया गया मिथिला वैभव सम्मान



काठमांडू, चैत १४ –
संमृद्धि की ऊँचाई पर रही मिथिला और मैथिली आज अपने अस्तित्व के लिए संधर्ष कर रही है । ऐसा केवल नेपाल में नहीं हो रहा है । वरन भारत में भी लोग इसके लिए संधर्ष कर रहे हैं और अपने अपने तरीके से इसके उत्थान में लगे हुए हैं । मिथिला और मैथिली की अवस्था में सुधार कैसे हो ? इसकी चर्चा आज चारों ओर चल रही है । इसी बीच बंगबासी मैथिल उन्नयन समिति कोलकाता  और मिथिला नव युवक कीर्तन मंडली के संयुक्त तत्वाधान में विद्यापति पर्व समारोह २०२४ का आयोजन किया गया जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ–साथ मिथिला और मैथिली के विकास के विषय में गहनता के साथ चर्चा हुई ।


कोलकोता के मुकुंदपुर, खुदीराबाद इलाके में सूर्य शिखा क्लब के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में बंगबासी उन्नयन समिति के अध्यक्ष श्री नारायण झा ने हिमालिनी से बात करते हुए कहा कि केवल गौरवमय इतिहास को दिखाकर या बताकर मिथिला और मैथिली का विकास नहीं हो सकता है । मिथिला और मैथिली के विकास के लिए उन्होंने सभी को अपनी अपनी जगह से काम करने और आगे बढ़ने का आग्रह किया ।
श्री नारायण झा ने कहा कि अब केवल इतिहास की बातों को रटने से नहीं होगा कि हमारा इतिहास बहुत समृद्धशाली रहा है । यही राग हम कब तक अलापते रहेंगे ? अभी जो मैथिल मिथिला की अवस्था है यह किसी से छुपी हुई नहीं है । हमें बहुत काम करना होगा । यदि हम सच में मैथिली और मिथिला को समृद्ध बनाना चाहते हैं तो उसके भविष्य को ध्यान में रखकर काम करना होगा ।


कार्यक्रम के दौरान ही हिमालिनी से बात करते हुए संगीत तथा नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त मैथिली रंगमंच की माँ कहलाने वाली प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’ ने कहा कि – मैथिली सबसे ज्याद उपेक्ष्ति अपने ही घरों में हो रही है । घर परिवार में अब लोग अपने बच्चों के साथ भी मैथिली में बात नहीं करते हैं । समय अभाव के कारण लोग किसी भी त्योहार में अब गाँव नहीं जाते हैं । जिससे बच्चें अपनी ही संस्कृति, परंपरा से दूर हो रहे हैं । अहम बात यही है न कि यदि अपनी भाषा, संस्कृति को बचाना है तो स्वयं को आगे करना होगा । ये जो हम एक दूसरे का मुँह देखते रहते हैं इससे विकास नहीं होने वाला है । अगर इतिहास को दुहराना है तो इसकी शुरुआत अपने घर से ही करनी होगी ।
इसी तरह शिव नारायण झा ‘कुणाल’ ने भी हिमालिनी से बात करते हुए कहा कि –हम तब तक आगे नहीं बढ़ पाएंगे जब तक कि हम आधुनिकता का समावेश इसमें नहीं करेंगे । फिर चाहे हमारा गीत संगीत हो, पूजा पाठ हो, या फिर पावनि तिहार हो, आज के जो हमारे बच्चें हैं उन्हें कुछ नया अगर नहीं दिया जाएगा तो वो इसे इसे कभी स्वीकार नहीं कर पाएंगे ।आर्थिक रुप से इसे समृद्ध करना होगा, जिविकोपार्जन से इसे जोड़ना होगा तभी आने वाले दिनों में मैथिली मिथिला का विकास संभव हो पाएगा ।
कार्यक्रम में बंगबासी मैथिल उन्नयन समिति ने लेखक, साहित्यकार एवं विभिन्न क्षेत्र में ख्याति प्राप्त किए नेपाल के २ सहित ८ लोगों को मिथिला वैभव सम्मान प्रदान किया ।
सम्मान प्राप्त करने वालों में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’, शिव नारायण झा ‘कुणाल’ ड‘ा. दयानाथ झा,नवोनाथ झा, डॉ.मो.मंजर सुलेमान तथा मधुबनी के मेयर अरुण राय थे । इसी तरह नेपाल से वरिष्ठ साहित्यकार, तथा नाटककार रमेश रंजन झा तथा कंचना झा को भी सम्मानित किया गया ।


कार्यक्रम में विद्यापति द्वारा रचित गीत एवं नृत्य भी प्रस्तुत किए गए जिसमें मिथिला के सुपरस्टार विकास झा, जिया सिंह, चाादनी चकोर, गौरव झा, स्वाती झा, एवं उद्घोषक अभिषेक झा ने अपनी प्रस्तुति से दर्शको को मंत्र मुग्ध कर दिया ।

 



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