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मधेस नेपाल का है, ये सबको सोचना चाहिए… लेकिन, जवाब उपेन्द्र यादव को देना होगा…! : जयप्रकाश गुप्ता

जयप्रकाश गुप्ता
हिमालिनी, अंक जून 2024 । मधेस प्रांत में मुख्यमंत्री और सरकार का नेतृत्व करने वाली पार्टी बदल गयी है । उपेन्द्र यादव की पार्टी ने राज्य में ७ साल से ज्यादा समय तक निर्विरोध शासन किया है । वास्तव में, यह “डबल इंजन’’ सरकार थी । मधेस में जसपा की सरकार थी और केंद्र में कुछ कार्यकाल को छोड़कर उपेन्द्र यादव हमेशा उपप्रधानमंत्री रहे । हालाँकि, इस अवधि में राज्य सरकार ने नीति और कानून के मामले में कुछ उल्लेखनीय कार्य किये होंगे । आशा करते हैं, जसपा या उस सरकार में शामिल लोग इसकी जानकारी देंगे ।
मधेस की प्रदेश सरकार का मूल्यांकन करते समय जसपा ही एकमात्र लक्ष्य नहीं है । मधेस केंद्रित लगभग सभी दल पहले और बाद में सरकार में रहे हैं । उपेन्द्र की पार्टी कुछ समय पहले तक सरकार में बनी हुई थी, जबकि महंथ ठाकुर–राजेन्द्र महत्तो की पार्टी, जनमत पार्टी, नेपाली कांग्रेस, एमाले, माधव नेपाल, माओवादी आदि सभी पार्टियाँ सरकार में शामिल रही हैं । इसलिए मधेश के लाभ और हानि में वे समान रूप से भागीदार हैं । अकेले जसपा को दोषी नहीं ठहराया जा सकता ।
मधेस की जनता, नागरिक समाज और प्रेस पार्टी नेताओं और सरकार का मूल्यांकन उनके गुण–दोष के आधार पर नहीं करती है, बल्कि जातीयता, सामाजिक संबंध और लाभ के मुद्दे मूल्यांकन का आधार हैं । यह तब और भी स्पष्ट हो जाता है जब आप सोशल नेटवर्क या मीडिया में राजबिराज, जनकपुर और बीरगंज के पत्रकारों और नागरिक नेताओं की भूमिका देखते हैं । मधेस में तथ्यों, आंकड़ों और कार्य एवं उत्तरदायित्व के आधार पर मूल्यांकन करने की प्रथा नहीं है । यहां कुछ सरकारी आंकड़े डालकर बताया जा रहा है कि जसपा मधेस के लोगों के जीवन स्तर को कितना बदल पाई है? मैं इसका संक्षिप्त विवरण देना चाहूँगा ।
जसपा के मधेस सरकार से हटने के साथ ही संघीय सरकार का वार्षिक बजट आ गया । इस दौरान बजट को लेकर एक खबर काफी चर्चा में रही । समाचार का सार था, “हमेशा व्यस्त रहने वाली मधेस सरकार, जो सही तरीके से बजट की मांग भी नहीं कर सकी, इस वर्ष संघीय बजट से मधेस प्रांत को जो सब्सिडी बजट मिलना चाहिए वह नहीं मिला । “ इसके साथ ही बजट शेड्यूल भी जारी कर दिया गया । इसमें देश के सभी ७ प्रदेशों को केंद्र सरकार से मिलने वाले विशेष और अनुपूरक अनुदान की आवंटित राशि का उल्लेख किया गया है । आश्चर्य की बात यह है कि मधेस प्रदेश का आवंटन शून्य था । यह एक असामान्य बात है, अपवाद स्वरूप भी ऐसा नहीं होना चाहिए, लेकिन ऐसा हुआ ।
इस संबंध में राष्ट्रीय योजना आयोग के कार्यक्रम निदेशक शिवरंजन पौडयाल ने कहा है कि – ‘‘मधेस प्रदेश की ओर से नई और चालू दोनों योजनाओं के लिए बजट मांगने का कोई प्रस्ताव नहीं आया था । आखिरी दिन तक भी योजना आयोग प्रस्ताव देने को कह रहा था, लेकिन मधेश प्रदेश ने कोई प्रस्ताव नहीं भेजा.’’ इसी तरह, मधेश प्रदेश सरकार के प्रांतीय नीति और योजना आयोग के निवर्तमान उपाध्यक्ष नाथू प्रसाद चौधरी कहते हैं, “समपूरक और विशेष अनुदान लेने के लिए मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् के कार्यालय ने प्रक्रिया को आगे नहीं बढाया । योजना और कार्यक्रम स्वीकृत कर अनुदान मांग के सहित का प्रस्ताव भेजने का काम मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् के कार्यालय का है ।’’
इस चालू वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक, देश के सभी सात प्रदशों की तुलना में मधेस प्रददेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी सातवें स्थान पर यानी सबसे नीचे आ गयी है । मधेस प्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर मात्र ४.८२% है । कर्णाली का शेष ५.४७% और सुदुरपश्चिम का ४.९२% मधेस से अधिक है । केंद्रीय सांख्यिकी विभाग के ‘नेपाल लिविंग लेवल सर्वे २०७९÷८०’ के मुताबिक, सभी ७ प्रदेशों में मधेश में गरीबों की आबादी सबसे ज्यादा है । गंडकी में सबसे कम ४.८८ फीसदी है ।
नेपाल की नवीनतम जनगणना के अनुसार, देश की आर्थिक रूप से निष्क्रिय जनसंख्या ३७.५% है और मधेश प्रांत में सबसे अधिक ४६.५% है । श्रम बल सर्वेक्षण २०७४÷७५ के अनुसार, नेपाल की बेरोजगारी दर ११.४% है, मधेश प्रदेश में सबसे अधिक २०.१% और बागमती में सबसे कम ७% है । सभी सात प्रदेशों की तुलना में मधेस प्रदेश का जिला अब तक पूर्ण साक्षर नहीं हो सका है । पिछले असार, २०७९ तक अन्य प्रदेशों के ६० जिलों को पूर्ण साक्षर घोषित किया जा चुका है । आ.ब. २०७८–०७९ एवं अंतिम आ.ब. ०७९–०८० के दौरान मधेस प्रांत में विकास व्यय सबसे कम रहा । यहां की सरकार विकास के लिए आवंटित राशि खर्च नहीं कर पायी है । यह अक्षमता की पराकाष्ठा है ।
राष्ट्रीय जनगणना २०७८ के अनुसार, नेपाल में विकलांग लोगों की साक्षरता दर ५०.१ प्रतिशत है । कर्णाली प्रांत में साक्षरता दर अन्य प्रांतों की तुलना में अधिक (५३.२%) है जबकि मधेश प्रांत में यह सबसे कम (४२.२%) है । संघीय सरकार ने देश भर से बेरोजगार युवाओं को प्रधान मंत्री रोजगार कार्यक्रम के लिए पंजीकरण करने के लिए आमंत्रित किया है । कुल ८,८५,१५४ बेरोजगार युवाओं ने पंजीकरण कराया है । इस पर खर्च करने के लिए सरकार कुल १० करोड़ रुपये खर्च करेगी । मधेस प्रदेश के १,०७० प्रस्तावों में कुल ५९४ करोड़ ७० लाख रुपये आवंटित हुए जिसमें मात्र ९३ लाख ६० हजार ही खर्च हुए । जबकि कोशी क्षेत्र के सबसे अधिक १७१० रोजगार प्रस्ताव में रु. २३५ करोड़ खर्च हुए. आंकड़ों के मुताबिक सुदूर कर्णाली प्रदेश मधेस प्रदेश से ज्यादा खर्च किया है । ‘वल्र्ड स्टैटिस्टिक्स’२कतबतक) ाभभम के अनुसार, नेपाल दुनिया में सबसे अधिक सार्वजनिक छुट्टियों वाला देश है । जबकि नेपाल के सभी ७ प्रदेशों में सबसे ज्यादा सार्वजनिक छुट्टियाँ मधेस प्रदेश में दी जाती हैं । डेटा का ऐसा क्रम बहुत लंबा है । मैंने इसे यहां संक्षेप में प्रस्तुत किया है ।
मैं ये सब बातें आलोचना के लिए नहीं कह रहा हूं । आधिकारिक सरकारी आंकड़ों में कहा गया है कि मधेस ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, कमजोर समुदायों के उत्थान, उद्योग, सिंचाई, रोजगार और शासन जैसे क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन हासिल किया है । इस बीच आश्चर्य की बात यह है कि इतनी कमजोर उपलब्धियों के साथ शासन करने वाले उपेन्द्र यादव की पार्टी के निवर्तमान मुख्यमंत्री सरोज यादव ५२ बीघे जमीन पर राज्य सरकार का मुख्य प्रशासनिक भवन बनाने की योजना बनाकर चले गये हैं ।
जनता समाजवादी पार्टी जसपा ने सामाजिक न्याय के नारे पर राज किया । जबकि पूरे देश के सभी प्रदेश की तुलना में सबसे ज्यादा दलित उत्पीड़न मधेस प्रदेश में है । मधेस प्रदेश में सबसे ज्यादा महिलाएं खुद आग लगाकर या दूसरों के द्वारा आग लगाए जाने से मर रही हैं । मीटर ब्याज को लेकर बड़ी चर्चा है, पूरे देश से मीटर–ब्याज के शिकार कर्जदारों द्वारा प्रस्तुत की गई १,७६८ शिकायतों में से सबसे अधिक ९८२ पीडि़त मधेश प्रदेश के हैं । यह डेटा मधेस प्रदेश की सामाजिक–आर्थिक स्थिति की भी झलक देता है ।
उपेन्द्र यादव और मधेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालबाबु राउत द्वारा सबसे अधिक प्रचार में लाए गए मधेस प्रदेश सरकार का ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ कार्यक्रम के अन्तर्गत अख्तियार ने निष्कर्ष निकाला कि साइकिल की खरीद में १००.३३ मिलियन का भ्रष्टाचार हुआ और मुख्यमंत्री कार्यालय के तत्कालीन सचिव के साथ–साथ उस व्यक्ति पर मुकदमा चलाने का फैसला किया गया । साइकिल खरीद को लेकर जब अख्तियार ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर छापा मारा तो उसने कहा कि ‘शुरुआती जांच में मुख्यमंत्री कार्यालय की संलिप्तता दिखी है ।’ मधेस प्रदेश ने किसानों की समस्याओं को समझने के लिए एक कार्यदल का गठन किया । उद्घाटन के तुरंत बाद उपेन्द्र यादव की लालबाबू सरकार “खेत खेत सिंचाई और हाथ–हाथ रोजगार’’ के नारे के साथ एक कृषि कार्यक्रम लेकर आई । मुख्यमंत्री लाल बाबू के कार्यकाल के बाद अब सरोज यादव भी मुख्यमंत्री पद से विदा हो चुके हैं । लेकिन समस्या अपनी जगह कायम है । सोचिए “खेत सिंचाई और हाथ–हाथ रोजगारर’’ का कार्यक्रम कैसे चला होगा ?
देश के सभी प्रदेशों में सरकारें बनती और बिगड़ती रहती हैं । मधेस में यह क्रम कम है इसलिए यहां राजनीतिक स्थिरता अधिक है । इसके बावजूद विकास की गति बेहद खराब है । आंकड़े तो यही कहते हैं, लेकिन, मधेस के नेता कोई जागरूकता नहीं दिखाते दिख रहे हैं । यहां का नागरिक समाज, प्रेस सभी इस गंभीर स्थिति पर चुप हैं ।
उपेन्द्र इन सभी वास्तविकताओं को कभी स्वीकार नहीं करना चाहते ।  -हिमालिनी जून २०२४ अंक से

प्रस्तुतिः मुरली मनोहर तिवारी

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