संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र ही हमारी प्रतिबद्धता है : हृदयेश त्रिपाठी
काठमांडू, नेपाल (6 अप्रैल 2025) – नेपाल में मधेश केंद्रित सात दलों ने एकजुट होकर ‘संघीय लोकतांत्रिक मोर्चा’ का गठन किया है। यह कदम सत्तारूढ़ दलों कांग्रेस और एमाले द्वारा निर्वाचन प्रणाली में संशोधन और ‘थ्रेशहोल्ड’ बढ़ाने की बहस के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य संसद में दलों की संख्या को कम करना है। इस मोर्चे में महंथ ठाकुर के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा), उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाली जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल, राजेंद्र महतो के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा, सीके राउत के नेतृत्व वाली जनमत पार्टी, हृदयेश त्रिपाठी के नेतृत्व वाली जनता प्रगतिशील पार्टी, रेशम चौधरी के नेतृत्व वाली नागरिक उन्मुक्ति पार्टी और वृषेशचंद्र लाल के नेतृत्व वाली तराई मधेश लोकतांत्रिक पार्टी (तमलोपा) शामिल हैं।
हालांकि, उपेंद्र यादव की पार्टी से अलग हुए अशोक राय के नेतृत्व वाली जसपा इस मोर्चे में शामिल नहीं हुई है। जनता प्रगतिशील पार्टी के अध्यक्ष हृदयेश त्रिपाठी ने कान्तिपुर संवाददाता के साथ बातचीत में मोर्चे के गठन के उद्देश्य और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। यह समाचार कांतिपुर में हृदेश त्रिपाठी जी के प्रकाशित अन्तर्वार्ता पर आधारित है ।
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मोर्चे की आवश्यकता क्यों पड़ी?
श्री हृदेश त्रिपाठी ने कहा, “लंबे समय से इसकी कोशिश चल रही थी, अब जाकर परिणाम सामने आया है। देश में एक कृत्रिम ध्रुवीकरण हो रहा है। कांग्रेस और एमाले का गठबंधन इसका उदाहरण है। गणतंत्र को चुनौती देने की बातें हो रही हैं। आदिवासी, जनजाति, मधेशी, महिला, दलित और थारू जैसे मुद्दों को छलफल में नहीं लाया जा रहा। इन एजेंडों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। इसे सही दिशा में लाने के लिए मोर्चा बनाया गया है।”
श्री हृदेश त्रिपाठी ने कहा, “लंबे समय से इसकी कोशिश चल रही थी, अब जाकर परिणाम सामने आया है। देश में एक कृत्रिम ध्रुवीकरण हो रहा है। कांग्रेस और एमाले का गठबंधन इसका उदाहरण है। गणतंत्र को चुनौती देने की बातें हो रही हैं। आदिवासी, जनजाति, मधेशी, महिला, दलित और थारू जैसे मुद्दों को छलफल में नहीं लाया जा रहा। इन एजेंडों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। इसे सही दिशा में लाने के लिए मोर्चा बनाया गया है।”
मोर्चे का मुख्य उद्देश्य:
त्रिपाठी ने बताया कि मोर्चा देश में अप्राकृतिक ध्रुवीकरण को रोकने, संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र के एजेंडों की रक्षा करने और विभिन्न आंदोलनों की उपलब्धियों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
त्रिपाठी ने बताया कि मोर्चा देश में अप्राकृतिक ध्रुवीकरण को रोकने, संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र के एजेंडों की रक्षा करने और विभिन्न आंदोलनों की उपलब्धियों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजावादियों की सक्रियता पर:
हाल में राजावादी संगठनों के सक्रिय होने और राजतंत्र की वापसी की मांग पर त्रिपाठी ने कहा, “संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र हमारी प्रतिबद्धता है। मोर्चे के सभी सात दल इसके प्रति दृढ़ हैं। इससे ऊपर-नीचे हमारा कोई विचार नहीं है।”
हाल में राजावादी संगठनों के सक्रिय होने और राजतंत्र की वापसी की मांग पर त्रिपाठी ने कहा, “संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र हमारी प्रतिबद्धता है। मोर्चे के सभी सात दल इसके प्रति दृढ़ हैं। इससे ऊपर-नीचे हमारा कोई विचार नहीं है।”
सरकार के प्रदर्शन पर:
सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के कामकाज पर त्रिपाठी ने कहा, “सरकार हर मोर्चे पर विफल हो रही है। जनता में निराशा है, राजनीतिक दलों और नेताओं के प्रति नकारात्मक धारणा बन रही है। यह स्थिति जोखिम पैदा कर सकती है।”
सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के कामकाज पर त्रिपाठी ने कहा, “सरकार हर मोर्चे पर विफल हो रही है। जनता में निराशा है, राजनीतिक दलों और नेताओं के प्रति नकारात्मक धारणा बन रही है। यह स्थिति जोखिम पैदा कर सकती है।”
मोर्चे में नेतृत्व का सवाल:
नेतृत्व के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया, “मोर्चे में एक नेता नहीं होगा। बैठक जहां होगी, वही उसकी अध्यक्षता करेगा। यह बारीबारी से होगा। नेतृत्व का कोई विवाद नहीं है।”
नेतृत्व के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया, “मोर्चे में एक नेता नहीं होगा। बैठक जहां होगी, वही उसकी अध्यक्षता करेगा। यह बारीबारी से होगा। नेतृत्व का कोई विवाद नहीं है।”
मोर्चा घोषणा में अनुपस्थिति:
मोर्चा घोषणा के मंच पर महंथ ठाकुर और रेशम चौधरी की अनुपस्थिति पर त्रिपाठी ने कहा, “रेशम चौधरी की पार्टी का पश्चिम तराई में बैठक थी, उन्होंने प्रतिनिधि भेजा। महंथ ठाकुर बीमार होने के कारण नहीं आ सके, लेकिन उन्होंने प्रतिबद्धता पत्र पर हस्ताक्षर किया है।”
मोर्चा घोषणा के मंच पर महंथ ठाकुर और रेशम चौधरी की अनुपस्थिति पर त्रिपाठी ने कहा, “रेशम चौधरी की पार्टी का पश्चिम तराई में बैठक थी, उन्होंने प्रतिनिधि भेजा। महंथ ठाकुर बीमार होने के कारण नहीं आ सके, लेकिन उन्होंने प्रतिबद्धता पत्र पर हस्ताक्षर किया है।”
दो दलीय व्यवस्था की बहस:
देश में दो दलीय व्यवस्था की बहस पर त्रिपाठी ने कहा, “हमें उनसे डरने की जरूरत नहीं। उनकी ताकत हम पहले से जानते हैं। वे मिले हैं, लेकिन एक अध्यादेश भी पास नहीं कर सके। उनकी शक्ति का अंदाजा इसी से लगता है।”
देश में दो दलीय व्यवस्था की बहस पर त्रिपाठी ने कहा, “हमें उनसे डरने की जरूरत नहीं। उनकी ताकत हम पहले से जानते हैं। वे मिले हैं, लेकिन एक अध्यादेश भी पास नहीं कर सके। उनकी शक्ति का अंदाजा इसी से लगता है।”
यह मोर्चा नेपाल की राजनीति में एक नया समीकरण बनाता दिख रहा है, जो गणतंत्र और संघीयता के मुद्दों को मजबूती से उठाने का दावा कर रहा है।
साभार कांतिपुर


