भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई पर राेक, परन्तु पाकिस्तान काे राहत की उम्मीद नहीं
भारत और पाकिस्तान के बीच की सेनाओं के महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद सैन्य कार्रवाई नहीं करने पर सहमति बनी है. हालांकि इस सकारात्मक घटनाक्रम के बावजूद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के खिलाफ 23 अप्रैल को लिए गए महत्वपूर्ण फैसले अभी भी लागू रहेंगे. इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान को फिलहाल किसी भी तरह की राहत मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे थे. भारत ने 23 अप्रैल को पाकिस्तान के खिलाफ कुछ अहम फैसले लिए थे. इसमें करतारपुर कॉरिडोर को बंद करना शामिल था. अब भारत ने दोबारा साफ कर दिया है कि ये फैसले अभी भी लागू हैं और उनमें कोई बदलाव नहीं होगा. इसका मतलब है कि पाकिस्तान को अभी भी भारत की तरफ से किसी ढील की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
पाकिस्तान के खिलाफ भारत का रुख हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद और ज्यादा सख्त हो गया है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी. इस हमले ने यह दिखा दिया कि पाकिस्तान की जमीन से चल रहा आतंकी नेटवर्क अब भी सक्रिय है. इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे.
करतारपुर कॉरिडोर रहेगा बंद
करतारपुर कॉरिडोर जो सिख श्रद्धालुओं के लिए खास धार्मिक रास्ता है उसे 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद बंद किया गया था. लेकिन अब भारत ने यह भी साफ किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता तब तक इस कॉरिडोर को नहीं खोला जाएगा. यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है.
आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं
भारत ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत आतंकवाद और बातचीत को एक साथ नहीं देखता. यानी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ सख्त और भरोसेमंद कदम नहीं उठाएगा तब तक भारत किसी भी तरह की बातचीत या समझौते के लिए तैयार नहीं है.
सिंधु जल समझौते पर भारत का रुख साफ
भारत ने यह भी बताया कि सिंधु जल समझौते जैसे द्विपक्षीय समझौतों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. लेकिन पाकिस्तान को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की नीति अब ‘सख्ती और बातचीत’ दोनों का संतुलन है. भारत ने सीजफायर तो कर दी है लेकिन पाकिस्तान को यह भी संदेश दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है. भारत चाहता है कि पाकिस्तान अपनी जमीन से चल रहे आतंकी नेटवर्क को खत्म करे.
अब नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान भारत के इस साफ और सख्त संदेश पर कैसी प्रतिक्रिया देता है. क्या वह वाकई सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस, भरोसेमंद और जमीनी कार्रवाई करेगा? क्या पाकिस्तान सिर्फ बयानों तक सीमित रहेगा या वास्तव में आतंकी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाएगा? क्या भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ेगा या फिर यह सिर्फ सैन्य तक ही सीमित रहेगा? क्या करतारपुर कॉरिडोर दोबारा खुल सकेगा या धार्मिक यात्राएं और कूटनीतिक संवाद अब भी रुके रहेंगे? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान अब एक जिम्मेदार पड़ोसी की तरह व्यवहार करेगा या फिर भारत को अपनी सख्त नीति को और आगे ले जाना पड़ेगा?

