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मोदी पर निशाना साधने वाले पाकिस्तानी मीडिया भी मोदी की तारीफ़ करने लगे : अशोक कुमार बीबीसी संवाददाता

 

10385487_984022784962630_8240690699328949970_n१७,मई |अकसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने वाले पाकिस्तानी मीडिया में कई जगह उनकी तारीफ़ की गई है और वजह है क्रिकेट डिप्लोमैसी.
रोज़नामा जंग लिखता है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए मोदी ने यूएई में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरिज को हरी झंडी दे दी है.
अख़बार के मुताबिक उन्होंने भाजपा के सम्मेलन में कहा कि रिश्ते बेहतर करने के लिए भारत पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना चाहता है.
अख़बार की टिप्पणी है कि मोदी को यूं तो पाकिस्तान के प्रति शुत्रुतापूर्ण रवैए के लिए जाना जाता है लेकिन एक साल सत्ता में रहने के बाद उनकी सोच में पहली सकारात्मक तब्दीली नज़र आई है.
स्वागतयोग्य फ़ैसला

वहीं इस विषय पर रोज़नामा दुनिया ने भी ‘मोदी की क्रिकेट डिप्लोमैसी’ शीर्षक से संपादकीय लिखा है.
अख़बार की राय है कि मोदी का फ़ैसला निश्चित तौर पर स्वागतयोग्य है. लेकिन अख़बार की ये भी राय है कि अगर भारत में अब भी कुछ लोग भारत-पाक क्रिकेट का विरोध करते हैं तो इसका मतलब है कि समस्या यहां नहीं, वहां है.
अख़बार का सुझाव है कि भारत अपनी सोच को बदले और क्रिकेट ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी दोतरफा रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए बातचीत फिर से शुरू करने पर ध्यान दे.
वहीं रोज़नामा पाकिस्तान ने भारतीय ख़ुफिया एजेंसी पर निशाना साधते हुए लिखा है कि पाकिस्तान की ख़्वाहिश है कि भारतीय टीम यहां आकर क्रिकेट खेले, लेकिन रॉ की टीम यहां से चली जाए.
‘तेज़ी से अमल हो’
नवाए वक्त ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे पर संपादकीय लिखा है.

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अख़बार लिखता है कि अपने हालिया पाकिस्तान दौरे में चीनी राष्ट्रपति ने यहां 47 अरब डॉलर के निवेश का एलान किया था, ऐसे में मोदी का तुरत फुरत चीन जाना चीन-पाकिस्तान समझौतों को प्रभावित करने की कोशिश भी हो सकती है.
अख़बार के मुताबिक ज़रूरत इस बात है कि पाकिस्तान चीन से हुए समझौतों पर तेजी से अमल कराए, वरना ऐसा न हो कि भारत अपने समझौतों पर अमल करा ले और हमारे समझौते कागज का ढेर बन जाएं.
वहीं रोज़नामा एक्सप्रेस रोहिंग्या मुसलमानों की दयनीय हालत पर लिखता है कि बर्मा के बौद्धों के हमलों से बचने के लिए ये लोग समंदर के रास्ते भागने की कोशिश करते है, लेकिन बहुत से समंदर की लहरों में ही समा जाते हैं.
अख़बार के मुताबिक़ अंतरराष्ट्रीय समुदाय बर्मा की सरकार पर दबाव डाले कि वो इन लोगों को अपना नागरिक माने और वो सभी अधिकार दे जिसके वो हक़दार हैं.
‘चीन से रहें चौकन्ने’
रुख़ भारत का करें तो दिल्ली से छपने वाले रोज़नामा ख़बरें ने प्रधानमंत्री मोदी के चीन दौरे के मद्देनजर लिखा है कि भारत को अपने इस पडोसी से चौकन्ना रहने की जरूरत है.
भारत और चीन
आर्थिक संबंधों को बढ़ा रहे भारत और चीन के बीच कई राजनीतिक विवाद बराबर बने हुए हैं
अख़बार के मुताबिक़ चीन काशगर से लेकर पाकिस्तान के ग्वादर तक जो इकनॉमिक कॉरिडोर बना रहा है वो आर्थिक ही नहीं बल्कि सैन्य दृष्टि से भी बहुत अहम है.
अख़बार ख़बरें ने जहां हिंद महासागर में चीन की गतिविधियां बढ़ने की बात उठाई है, वहीं पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में चीन की मदद का जिक्र भी किया है.
हमारा समाज का संपादकीय है- पाकिस्तान का मानसिक दिवालियापन. इसमें अख़बार ने पाकिस्तान की तरफ से भारतीय खुफिया एजेंसियों पर अपने यहां अशांति फैलाने के आरोपों पर टिप्पणी की है.
अख़बार का सुझाव है- “पाकिस्तान को अगर दहशतगर्दी से पीछा छुड़ाना है, तो दो काम करने होंगे. पहला दहशतगर्दों में अपने पराए का अंतर खत्म करे और दूसरा भारत के खिलाफ जो जहर भरा है, उसे निकाल फेंके.”

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अशोक कुमार
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

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