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नेपालगञ्ज में ‘दङ्गि उर्वशी’ महाकाव्य पर विमर्श कार्यक्रम सम्पन्न

 

नेपालगञ्ज/बाँके, पवन जायसवाल। बाँके जिले के नेपालगञ्ज में शाश्वत आचार्य स्मृति प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में दाङ निवासी डॉ. गोविन्द आचार्य द्वारा रचित महाकाव्य ‘दङ्गि उर्वशी’ पर विमर्श सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष किरण आचार्य ने की, जबकि नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ सभा सदस्य महानन्द ढकाल मुख्य अतिथि रहे।

विमर्शकर्ताओं में पत्रकार विश्वराज पछ्लदंग्या, समालोचक चरित्रा शाह और डॉ. राजकुमार थारू ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके अतिरिक्त राप्ती साहित्य परिषद के केन्द्रीय अध्यक्ष कमलमणि देवकोटा, प्रा. डॉ. जनार्दन आचार्य, डॉ. हरिप्रसाद तिमिल्सेना सहित अन्य वक्ताओं ने भी महाकाव्य के महत्व और रचनाकार डॉ. गोविन्द आचार्य के व्यक्तित्व पर चर्चा की।

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महाकाव्य ‘दङ्गि उर्वशी’ का आधार एक पौराणिक कथा है, जिसमें उर्वशी को ऋषि दुर्वासा द्वारा श्राप दिया जाता है कि वह दिन में घोड़ी और रात में उर्वशी के रूप में धरती पर निवास करेगी। मिथक के अनुसार वह दाङ क्षेत्र के राजा दंगीशरण के सम्पर्क में आई और दोनों के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हुआ। इन्हीं कथाओं को आधार बनाकर डॉ. आचार्य ने महाकाव्य की रचना की है।

डॉ. गोविन्द आचार्य ने कार्यक्रम में रचना प्रक्रिया और राजा दंगीशरण की कथा को पौराणिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से रखते हुए अपने अनुभव साझा किए। अब तक उनकी 26 कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं।

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अन्त में अध्यक्ष किरण आचार्य ने सभी साहित्यकारों एवं उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। नेपालगञ्ज और दाङ जिले से आए करीब दो दर्जन से अधिक साहित्यकारों ने इस विमर्श में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन योगी नरहरिनाथ ने किया।

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