सुकून
कुणाल शर्मा:सुबह सुबह सरसों के खेत में टहलना, चौपाल में भाई बंधुओं के साथ ताश खेलते ठहाके लगाना, दोपहर को जामु की छाँव में सुस्ताना और शाम को बैठक में पैर दबबाते हुए पोते से गीता के श्लोक सुनना …बस, यह सब थी रिटायरमेंट के बाद रामनाथ जी की दिनचर्या ।
आज जब पोते के साथ चैत्र का मेला घूमकर आए तो शहर से बड़े बेटे ने उन्हें फोन पर उन्हें शहर रहने के लिए बुलाया । उत्सुकतावश अगले ही दिन वा ट्रेन पकड़कर शहर पहुँच गए । रामनाथ जी को देखकर सारे परिवार की खुशी का ठिकाना ना रहा । बहु ने उनकी पसन्द के पकवान बनाए, पोतियाँ कभी मोबाइल से उनकी फोटा खींचती तो कभी उन्हें अपनी फोटो दिखाती । बेटा उन्हें अपने साथ क्लब घुमाने ले गया । क्लब से लौटकर सभी गाड़ी में शापिंग माल चले गए । रात को होटल से खाना खाकर लौटे तो एयरकंडीशन रुम में उनका बिकस्तर लगाया गया । सभी को बस एक ही ख्याल था कि उन्हें कोइृ परेशानी ना हो । परन्तु अगली सुबह दोनों पोतियों को शगुन देकर जाने क्यों रामनाथ जी गाँव को रवाना हो गए ।

