Fri. Aug 14th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

पहलगाम हमले से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक: पाकिस्तान पर बढ़ता अविश्वास और आतंकवाद की वास्तविकता : अनिल तिवारी

 


अनिल तिवारी, बीरगंज, 29 अप्रैल 026 । पहलगाम में हुए हमले में एक नेपाली नागरिक सहित 26 पर्यटकों को धर्म के आधार पर अलग कर निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। इस प्रकार की विभेदपूर्ण हिंसा न केवल आतंकवाद की भयावहता को दर्शाती है, बल्कि उसके वैचारिक और कट्टरपंथी चरित्र को भी उजागर करती है। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेन्स फ्रन्ट (टीआरएफ) ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का सहयोगी संगठन माना जाता है। टीआरएफ को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल कर रखा है, जिससे इस घटना की गंभीरता वैश्विक स्तर पर स्पष्ट होती है।

विश्लेषकों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में चुनाव संपन्न होकर जब क्षेत्र विकास और स्थिरता की ओर बढ़ रहा था, उसी समय इस तरह का हमला होना संयोग नहीं है। इसका उद्देश्य शांति प्रक्रिया को कमजोर करना और दोबारा अस्थिरता पैदा करना प्रतीत होता है।

पाकिस्तान को लंबे समय से आतंकवाद से जोड़कर देखा जाता रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय धारणा अब तक पूरी तरह बदल नहीं पाई है। विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों में पाकिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठनों की मौजूदगी की ओर संकेत किया गया है। पहलगाम हमले के बाद यह बहस और भी तेज हो गई है।

यह भी पढें   टूटे सपनों की राख से नई उम्मीद जगाना ही जिंदगी है : बिमल सरार्फ

घटना में शामिल तीन पाकिस्तानी संदिग्धों को जुलाई 2025 में श्रीनगर के पास मार गिराया गया था। इनमें से एक पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर का निवासी बताया गया, जिससे सीमा पार संलिप्तता की आशंका और मजबूत हुई। हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।

इसी संदर्भ में भारत और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर शुरू हो गया है। भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद का संरक्षक बताया है, जबकि पाकिस्तान ने इसे “प्रोपेगैंडा” कहकर नकार दिया है।

पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पाकिस्तान ने भारत के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तान के अनुसार, भारत घरेलू राजनीतिक लाभ के लिए निराधार आरोप लगा रहा है और दुष्प्रचार कर रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इसे “झूठा नैरेटिव” बताया।

इस बीच, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि भारत कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर पाया है और यह घटना “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” भी हो सकती है। वहीं भारत ने अपनी पुरानी नीति दोहराते हुए कहा कि “आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते।”

यह भी पढें   इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं - व्यवहार और संस्कार ही मनुष्य की असली पहचान : बिमल सरार्फ

आतंकवाद का बदलता स्वरूप

आधुनिक समय में आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से होने वाले गुप्त वित्तीय लेनदेन ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इससे आतंकवादी गतिविधियों की पहचान और रोकथाम और अधिक कठिन हो गई है।

जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन नई रणनीतियाँ अपना रहे हैं, जिनमें महिला विंग का गठन और समुद्री प्रशिक्षण का विस्तार शामिल है। यह दर्शाता है कि आतंकवाद अब अधिक संगठित, लचीला और बहुआयामी रूप ले चुका है।
इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता का असफल होना भी बढ़ते अविश्वास का संकेत है। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और रणनीतिक मतभेदों के कारण कोई सहमति नहीं बन सकी।

होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र का मुद्दा भी इससे जुड़ा हुआ है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसी स्थिति में कूटनीतिक विफलता का असर विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

इजरायल जैसे देशों ने भी पाकिस्तान के प्रति अविश्वास जताते हुए वहाँ होने वाली वार्ताओं में भाग लेने से इनकार किया है, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
यह हमला केवल मानव जीवन पर आक्रमण नहीं था, बल्कि कश्मीर के पुनरुत्थान पर भी चोट था। हाल के वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में सुधार के संकेत मिल रहे थे, जो शांति और सामान्य स्थिति की ओर इशारा करते थे। पर्यटन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्निर्माण और आशा का प्रतीक भी है—और हमलावरों ने इसी को निशाना बनाया।

यह भी पढें   "मुस्कान जीवन की" वह औषधि जो बेसकीमती है बिमल सरार्फ

आतंकवाद किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी मानवता की साझा चुनौती है। जब निर्दोष नागरिकों और पर्यटकों को निशाना बनाया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और मानवाधिकारों पर सीधा हमला होता है।

अंततः, पहलगाम की यह घटना केवल एक दुखद स्मृति बनकर नहीं रह जानी चाहिए। यह पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर ठोस कदम उठाने होंगे। दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को जिम्मेदार और दूरदर्शी रवैया अपनाना होगा—अन्यथा, ऐसी त्रासदियाँ भविष्य में फिर दोहराई जा सकती हैं।

अनिल तिवारी
बीरगंज

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com