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गणतंत्र दिवस पर कार्यकारी प्रमुख द्वारा संबोधन करने की परंपरा टूटी,सत्तारूढ़ पार्टी ने नहीं दी शुभकामना

 

काठमांडू।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर कार्यकारी प्रमुख द्वारा संबोधन करने की परंपरा इस बार पहली बार टूटी है। संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र के 19वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर सैनिक मंच टुँडिखेल में आयोजित विशेष समारोह को शुक्रवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संबोधित किया, जिससे पुरानी परंपरा टूट गई।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह कार्यक्रम में उपस्थित रहे, लेकिन उन्होंने संबोधन नहीं किया। हालांकि, उन्होंने राष्ट्रपति पौडेल से समारोह को संबोधित करने का अनुरोध करते हुए पत्र भेजा था। गणतंत्र दिवस समारोह को पहली बार संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि केवल राजनीतिक व्यवस्था और शासन संरचना में बदलाव से युग की अपेक्षाएँ पूरी नहीं हो सकतीं।

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उन्होंने कहा, “हम सभी को समझना चाहिए कि राजनीतिक व्यवस्था और शासन संरचना में आने वाले परिवर्तन मात्र से युग की अपेक्षाएँ पूरी नहीं होतीं। इसके लिए राज्यसत्ता के चरित्र, आचरण, राजनीतिक निष्ठा और मूल्यों में भी परिवर्तन आवश्यक है। अन्यथा व्यवहार राजनीतिक परिवर्तन की पुष्टि नहीं करता।”

इससे पहले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्य के विशिष्ट पदाधिकारियों और विदेशी प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सरकार प्रमुख द्वारा संबोधन करने की परंपरा रही है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार 26 चैत्र को भक्तपुर स्थित नेपाली सेना के कार्यक्रम में संबोधन देने वाले बालेन शाह ने उसके बाद किसी सार्वजनिक समारोह में भाषण नहीं दिया है।

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गणतंत्र दिवस मूल समारोह समिति के संयोजक रहे प्रधानमंत्री बालेन द्वारा गणतंत्र दिवस की शुभकामना न देने को भी राजनीतिक रूप से अर्थपूर्ण माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) और उसके सभापति रवि लामिछाने ने भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर कोई शुभकामना संदेश जारी नहीं किया। हजारों शहीदों के बलिदान से प्राप्त गणतंत्र के प्रति सरकार प्रमुख और सत्तारूढ़ दल की ओर से शुभकामना न आने से व्यवस्था के अवमूल्यन की आशंका जताई जा रही है।

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