Wed. Oct 7th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

काभ्रेपलाञ्चोक की भगवती मंदिर की प्रतिमा पर आया पसीना, श्रद्धालुओं में बढ़ी आस्था

 

काठमांडू/काभ्रेपलाञ्चोक।

नेपाल के काभ्रेपलाञ्चोक जिले के पाँचखाल नगरपालिका–9 स्थित प्रसिद्ध पलाञ्चोक भगवती मंदिर की प्रतिमा पर शनिवार शाम पसीना आने की घटना सामने आई है। शाम की आरती के दौरान मंदिर में मौजूद लोगों ने देवी की प्रतिमा पर पसीने जैसी नमी देखी, जिसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे।

मंदिर प्रबंधन उपसमिति के पूर्व संयोजक किरण श्रेष्ठ के अनुसार स्थानीय मान्यता है कि जब देश पर कोई दैवी आपदा या बड़ा राजनीतिक संकट आने वाला होता है, तब पलाञ्चोक भगवती की प्रतिमा पर विभिन्न संकेत दिखाई देते हैं और प्रतिमा से पसीना निकलता है।

उनका कहना है कि इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण घटनाओं से पहले प्रतिमा पर पसीना आने की बात कही जाती रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, 2081 साल की बाढ़ और भूस्खलन, 2072 साल के विनाशकारी भूकंप, 2058 साल के नारायणहिटी दरबार हत्याकांड तथा हाल के जनजी आंदोलन के समय भी ऐसा संकेत देखा गया था। यह मान्यता 1990 साल से भी पहले की घटनाओं से जुड़ी बताई जाती है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 7 अक्टुबर 2026 बुधवार शुभसंवत् 2083

प्रतिमा पर पसीना दिखाई देने के बाद मंदिर में देवी का स्नान कराया गया और तांत्रिक विधि से क्षमा पूजा संपन्न की गई।

लगभग 1,655 वर्ष पुराना है मंदिर

पलाञ्चोक भगवती मंदिर का निर्माण लगभग ईस्वी सन् 425 में हुआ माना जाता है। इसे नेपाल के सबसे प्राचीन भगवती मंदिरों में से एक माना जाता है। स्थानीय परंपरा में पलाञ्चोक भगवती को अन्य भगवती स्वरूपों की ‘जेठी बहन’ भी कहा जाता है।

प्रतिमा से जुड़ी प्राचीन किंवदंती

किंवदंती के अनुसार, बुच्चाकोट क्षेत्र में रहने वाले एक वृद्ध को सपने में देवी ने दर्शन देकर अपनी प्रतिमा को उत्तर दिशा की ओर ले जाने का आदेश दिया था। प्रतिमा को ले जाते समय रात होने पर वर्तमान मंदिर स्थल पर विश्राम किया गया। अगले दिन प्रतिमा को आगे ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन वह अपनी जगह से हिली नहीं। कहा जाता है कि लगभग 60 परिवारों के लोगों ने मिलकर भी प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसी स्थान पर प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की गई।

यह भी पढें   सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि 'सरकार गिरेगी' कहने वाले लोग खुद बेहोश होकर गिर सकते हैं: रवि लामिछाने

चार भगवती प्रतिमाओं की मान्यता

एक अन्य किंवदंती के अनुसार, उसी काल में एक शिल्पकार ने अपने दाहिने हाथ से पलाञ्चोक भगवती और नाला भगवती की प्रतिमाएं बनाई, बाएं हाथ से नक्साल भगवती तथा पैरों से शोभा भगवती की प्रतिमा का निर्माण किया। दाहिने हाथ से निर्मित और सबसे प्राचीन मानी जाने वाली प्रतिमा होने के कारण पलाञ्चोक भगवती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

दशैं में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

पलाञ्चोक भगवती मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है, लेकिन दशैं के नवरात्र के दौरान यहां सबसे अधिक भीड़ रहती है। इस अवसर पर परंपरा के अनुसार हंस, बकरा और भैंसे की बलि भी दी जाती है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 6 अक्टुबर 2026 मंगलवार शुभसंवत् 2083

इसके अलावा वैशाख पूर्णिमा, माघ संक्रांति और जेठ पूर्णिमा जैसे पर्वों पर भी यहां बड़ा मेला लगता है। वैशाख पूर्णिमा और दशैं की एकादशी के दिन देवी का रथ बनाकर मंदिर की परिक्रमा कराने की परंपरा भी निभाई जाती है।

पृथ्वीनारायण शाह के एकीकरण काल से जुड़ी परंपरा

स्थानीय मान्यता के अनुसार नेपाल के एकीकरण के बाद मंदिर की पूजा-पद्धति और सेवाओं का विभाजन किया गया। पुजारी दैनिक पूजा करते हैं, पहरी समुदाय रथ उठाने और पूजा के लिए फूल लाने का कार्य करता है, कसाई बलि संबंधी कार्य और कुस्ले समुदाय पूजा के समय बाजा बजाने की जिम्मेदारी निभाता है। यह परंपरा आज भी स्थानीय संस्कृति का हिस्सा मानी जाती है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com