रसुवा बाढ़ त्रासदी: मधेश के 162 लोग अब भी लापता, रो रो के परेशान हैं परिवारजन
जनकपुरधाम, हिमालिनी ऑनलाइन डेस्क, ३१ अगस्त । नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 10 भदौ (अगस्त 2026) को आई इस भयंकर बाढ़ के बाद से मधेश प्रदेश के 8 जिलों के 162 लोग अब भी लापता (संपर्कविहीन) हैं। इन लापता लोगों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में ये परिवार लगातार सरकार, प्रशासन और सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।
आंकड़ों में तबाही: किस जिले से कितने लापता?
पुलिस और प्रशासन से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बाढ़ के बाद मधेश प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग लापता हुए थे, जिनमें से अब तक केवल 30 लोग ही संपर्क में आ पाए हैं। बाकी 162 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
जिलों के आधार पर लापता लोगों का विवरण इस प्रकार है:
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सप्तरी: सबसे अधिक प्रभावित जिलों में सप्तरी है, जहाँ के 49 लोग लापता बताए गए हैं। इनमें से अब तक केवल एक ही व्यक्ति से संपर्क हो पाया है।
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पर्सा: पर्सा जिले के 40 लोग लापता हैं, जिनमें से सिर्फ दो लोग ही प्रशासन और परिजनों के संपर्क में आए हैं।
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बारा: यहाँ के 25 लोगों से संपर्क टूट गया था, जिनमें से केवल दो लोग सुरक्षित मिल पाए हैं।
रुला देने वाली आपबीती: एक महीने की सूतिका पत्नी का बुरा हाल
इस त्रासदी ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। धनुषा जिले की कमला नगरपालिका निवासी 30 वर्षीय इंजीनियर अजय प्रसाद सिंह भी इस बाढ़ के बाद से लापता हैं। अजय रसुवा स्थित ‘दोसान हाइड्रोपावर परियोजना’ में कार्यरत थे।
अजय की पत्नी पूजा सिंह की हालत बेहद दयनीय है। उन्होंने महज एक महीने पहले ही एक बच्चे को जन्म दिया है। नवजात शिशु के साथ यह बेबस माँ अपने पति की सुरक्षित वापसी के लिए हर तरफ मिन्नतें कर रही है। पति किस हाल में है, यह जानने के लिए वह लगातार समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर टकटकी लगाए बैठी है।
इसी तरह, सप्तरी जिले के अजय कुमार यादव सहित कई अन्य लोगों के परिवार वाले भी अपने परिजनों की खोज और बचाव के लिए पुलिस प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। लोग अपने-अपने स्तर से लापता परिजनों की तस्वीरें फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं।
प्रशासन से आस और चुनौतियां
लगातार बीतते समय के साथ लापता लोगों के परिजनों का धैर्य जवाब दे रहा है। हालांकि, पुलिस और बचाव दल घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं, लेकिन खराब मौसम, संचार व्यवस्था के ठप्प होने और जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव कार्य में भारी कठिनाइयां आ रही हैं।
मधेश प्रदेश के लोग अब केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और संबंधित प्राधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि खोज और बचाव कार्य में तेजी लाई जाए और जरूरत पड़ने पर इसके लिए अतिरिक्त कुशल तकनीकी विशेषज्ञों और उपकरणों की मदद ली जाए।
(स्रोत: ऑनलाइन खबर में प्रकाशित जानकारी पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट)





