नेपाल की सुरंगों में फंसे मजदूरों के लिए भारत के ‘रैट माइनर्स’ तैयार, बोले- बुलाइए, हम पहुंचेंगे
*सिलक्यारा में 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालने वाली टीम ने नेपाल को दिया मदद का प्रस्ताव, बेहद संकरी और मलबे से भरी सुरंगों में हाथ से काम करने का है अनुभव*
उदय चंद्र सिंह, नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल में हाल की बाढ़ और भूस्खलन के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने की चुनौती लगातार बनी हुई है। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत के उन ‘रैट माइनर्स’ ने नेपाल की मदद के लिए आगे आने की पेशकश की है, जिन्होंने वर्ष 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
इन माइनर्स का कहना है कि अगर नेपाल सरकार या संबंधित एजेंसियां उनकी मदद स्वीकार करती हैं, तो वे बिना देरी नेपाल पहुंचकर बचाव अभियान में शामिल होने को तैयार हैं।
जब बड़ी मशीनें नहीं पहुंच पातीं, तब काम आता है हाथ का हुनर
सिलक्यारा हादसे के दौरान सुरंग में बचाव अभियान को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। भारी मशीनों से मलबा हटाने की कोशिशों के बाद बचाव अभियान के अंतिम चरण में रैट माइनर्स को संकरी जगह में भेजा गया। उन्होंने बेहद सीमित जगह में हाथ से मलबा हटाकर अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंच बनाने में मदद की थी। 17 दिन चले अभियान के बाद सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
यही अनुभव अब नेपाल की मौजूदा स्थिति में उपयोगी साबित हो सकता है, क्योंकि बाढ़ के बाद कई हाइड्रोपावर सुरंगों में मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त हिस्सों के कारण बचाव दलों के लिए अंदर तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
नेपाल में करीब 900 मजदूरों के लापता होने की रिपोर्ट
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर खिसकने के बाद आई भीषण बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। रसुवा और नुवाकोट समेत प्रभावित इलाकों में कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 900 मजदूर लापता हैं और लगभग 500 के सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई है। नेपाली सेना कई हाइड्रोपावर सुरंगों में खोज और बचाव अभियान चला रही है।
मलबे से बंद सुरंगों के कारण पहले प्रवेश मार्ग को खोलना, पानी निकालना और सुरक्षित रास्ता बनाना बड़ी चुनौती बन रहा है।
भारतीय टीम ने राजनयिक स्तर पर भी मदद की पेशकश रखी
रिपोर्ट के अनुसार पुणे के वॉलंटियर कोऑर्डिनेटर आनंद कंसल ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर इन अनुभवी माइनर्स की सेवाएं नेपाल के बचाव अभियान में लेने की अपील की है। टीम का कहना है कि नेपाल से सामने आ रही तस्वीरों और वीडियो ने उन्हें प्रभावित किया और वे मानवीय आधार पर मदद करना चाहते हैं।
टीम के सदस्य फिरोज कुरैशी के मुताबिक वे तुरंत रवाना होने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि सुरंग के अंदर ऐसी जगहें होती हैं जहां भारी मशीनरी काम नहीं कर पाती और वहां प्रशिक्षित लोगों का हाथ से काम करने का अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।
पहले भी मुश्किल सुरंगों में कर चुके हैं काम
सिलक्यारा के अलावा इस टीम के कुछ सदस्यों ने फरवरी 2025 में तेलंगाना की श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल सुरंग में हुए बचाव अभियान में भी हिस्सा लिया था। वहां भी मलबे और कठिन परिस्थितियों के बीच विशेष बचाव एजेंसियों के साथ काम किया गया था।
अब फैसला नेपाल की अनुमति पर
नेपाल में जारी बचाव अभियान में भारतीय और चीनी विशेषज्ञ दल भी सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में सिलक्यारा का अनुभव रखने वाले रैट माइनर्स की पेशकश एक अतिरिक्त विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, उनके नेपाल जाने और अभियान में शामिल होने का फैसला नेपाल सरकार तथा संबंधित भारतीय अधिकारियों की अनुमति और समन्वय पर निर्भर करेगा।


