प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और निजी क्षेत्र के बीच सकारात्मक वार्ता: विनोद चौधरी का बयान
काठमांडू, 11 सितंबर । उद्यमी विनोद चौधरी ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के साथ हुई बैठक के बाद स्पष्ट किया है कि नेपाल सरकार और निजी क्षेत्र अब देश के आर्थिक विकास के लिए एक ही लय में आगे बढ़ सकते हैं। फेसबुक के माध्यम से उन्होंने इस दो घंटे की लंबी और सौहार्दपूर्ण चर्चा के प्रमुख निष्कर्ष साझा किए हैं।
चर्चा के मुख्य बिंदु:
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स्थायी और पारदर्शी सरकार की अपेक्षा: निजी क्षेत्र ने एक ऐसी स्थायी सरकार की उम्मीद जताई है जो भ्रष्टाचार और बिचौलियों को खत्म करे, वित्तीय अपराधों पर सख्त हो, और बेहतरीन काम करने वाले नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करे।
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प्रशासनिक बाधाएं और देरी: सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण के बावजूद वन, खनन और जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं (पीपीए सहित) में जमीनी स्तर पर काम में हो रही देरी और पुरानी कार्यशैली के कारण उद्यमियों में अभी भी कुछ असमंजस की स्थिति है।
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तरलता और निवेश की समस्या: वर्तमान में देश में अत्यधिक तरलता है, ब्याज दरें कम हुई हैं और बैंकों व सरकारी निकायों के पास 50 खरब से अधिक की राशि जमा है। फिर भी आशानुरूप निवेश नहीं हो रहा है। इसके त्वरित समाधान के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में ही एक ‘निर्णय तंत्र’ बनाने का सुझाव दिया गया है।
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बुनियादी ढांचे और पर्यटन का विकास: पूर्व-पश्चिम रेलवे, फर्टिलाइजर (DAP) प्लांट, और रारा, डोल्पा व खप्तड जैसे नए पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर दिया गया है। एयर कनेक्टिविटी बढ़ाकर 50 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने और आईटी (IT) सेक्टर के निर्यात को 2 अरब से 10 अरब तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
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शिक्षा और चिकित्सा हब (Education & Medical Hub): दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को नेपाल लाकर ‘एजुकेशन सिटी’ बनाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि शिक्षा के नाम पर हर साल देश से बाहर जा रहे 170 अरब रुपये को रोका जा सके। साथ ही, नेपाल को दक्षिण एशिया का मेडिकल और नर्सिंग हब बनाने की नीति पर भी चर्चा हुई।
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पीपीपी (PPP) मॉडल पर जोर: चूँकि नेपाल की बैंकिंग प्रणाली 10 साल से अधिक की दीर्घकालिक परियोजनाओं में अकेले निवेश करने में सक्षम नहीं है, इसलिए सरकार को निवेश करना चाहिए और निजी क्षेत्र को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत जोड़ना चाहिए।



