प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के भारत दौरे की कूटनीतिक तैयारी तेज, मंसिर के पहले सप्ताह जा सकते हैं नई दिल्ली
काठमांडू, हिमालिनी डेस्क, 23 सितंबर। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह मंसिर के पहले सप्ताह (नवंबर के तीसरे सप्ताह) में भारत की पहली औपचारिक यात्रा पर जाने की तैयारी में हैं। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के आठ महीने बाद यह उनका पहला आधिकारिक विदेश दौरा होगा।
उच्च कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच 7 और 8 मंसिर (लगभग 22-23 नवंबर) की संभावित तारीखों को केंद्र में रखकर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और तैयारी आगे बढ़ाई जा रही है। तारीखों में एक-दो दिन का आंशिक फेरबदल संभव है, लेकिन मंसिर के पहले सप्ताह यात्रा होना लगभग तय माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मिला था निमंत्रण
प्रधानमंत्री शाह के 13 चैत को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी ने उन्हें टेलीफोन पर बधाई देते हुए भारत भ्रमण का औपचारिक निमंत्रण दिया था। हाल ही में नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता में भी प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को अंतिम रूप देने पर गहन विचार-विमर्श हुआ था। वित्त मंत्री वाग्ले ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट संकेत दिया था कि प्रधानमंत्री का भारत दौरा निकट भविष्य में संपन्न होगा।
प्रमुख परियोजनाएं और कूटनीतिक एजेंडा
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इस बहुप्रतीक्षित दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और कनेक्टिविटी को गति देने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनने की उम्मीद है:
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परियोजनाओं का उद्घाटन: भारत के सहयोग से काव्रे के पनौती में नवनिर्मित अत्याधुनिक नेपाल पुलिस अकादमी, भैरहवा स्थित एकीकृत जांच चौकी (ICP) और दार्चुला में महाकाली नदी पर बने रणनीतिक मोटरपुल का दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से उद्घाटन किए जाने की तैयारी है।
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नया शिलान्यास: सुदूरपश्चिम क्षेत्र के व्यापारिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण कंचनपुर स्थित दोधारा-चांदनी आईसीपी का संयुक्त शिलान्यास भी प्रस्तावित कार्यसूची में शामिल है।
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रणनीतिक वार्ता: ऊर्जा व्यापार, सीमा पार डिजिटल भुगतान प्रणाली के विस्तार और लंबित द्विपक्षीय समझौतों पर दोनों देशों के तंत्र अगले दो महीनों में होमवर्क पूरा करेंगे।
संबंधों में नई गति की उम्मीद
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय से जारी नीतिगत अन्योल को समाप्त कर द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने में यह यात्रा मील का पत्थर साबित हो सकती है। दोनों देशों के विदेश मंत्रालय औपचारिक कार्यक्रम और यात्रा की अंतिम तिथियों की घोषणा जल्द ही संयुक्त रूप से करेंगे।


