नेपाली कांग्रेस के उपसभापति बने चंद्रकांत भंडारी, मधु आचार्य और विनोद चौधरी
15वें महाधिवेशन में नए नेतृत्व का चयन; खुली श्रेणी में चंद्रकांत भंडारी को सर्वाधिक 3,735 मत, समावेशी श्रेणी से विनोद चौधरी निर्वाचित
काठमांडू, 12 ऑक्टोबर। नेपाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन के तहत उपसभापति पद के चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। पार्टी के उपसभापति पद पर डॉ. चंद्रकांत भंडारी, इंजीनियर मधु आचार्य और उद्योगपति एवं नेता विनोद कुमार चौधरी निर्वाचित हुए हैं। खुली श्रेणी में चंद्रकांत भंडारी ने सर्वाधिक मत प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया, जबकि मधु आचार्य दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, समावेशी श्रेणी के तहत विनोद चौधरी ने जीत दर्ज की।
नेपाली कांग्रेस के नए नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया के दौरान पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर विशेष राजनीतिक चर्चा हो रही है। हालिया चुनावों में पार्टी को मिली पराजय के बाद यह महाधिवेशन कांग्रेस के लिए नेतृत्व परिवर्तन, संगठन के पुनर्गठन और जनविश्वास की पुनर्बहाली के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चंद्रकांत भंडारी को सर्वाधिक 3,735 मत
उपसभापति पद की खुली श्रेणी में डॉ. चंद्रकांत भंडारी ने 3,735 मत प्राप्त किए। उन्होंने इस मुकाबले में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया।
इसी श्रेणी में इंजीनियर मधु आचार्य 2,342 मतों के साथ निर्वाचित हुए। उनके अलावा गोविंद भट्टराई को 1,752, सुरेंद्रराज पांडे को 1,673, धनराज गुरुङ को 1,596, दीपक गिरी को 923 और प्रोफेसर डॉ. चंद्रमोहन यादव को 760 मत प्राप्त हुए।
इन परिणामों से स्पष्ट है कि खुली श्रेणी में उपसभापति पद के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा थी। भंडारी ने सर्वाधिक मत हासिल किए, जबकि आचार्य ने दूसरे स्थान पर रहते हुए उपसभापति पद पर अपनी जगह बनाई।
समावेशी श्रेणी से विनोद चौधरी की जीत
उपसभापति पद की समावेशी श्रेणी में विनोद कुमार चौधरी ने 1,745 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जीवन परियार को 1,658 मत मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 87 मत रहा।
इस श्रेणी में फरमुल्लाह मंसूर को 1,144, सीता गुरुङ को 1,112 और रंजित कर्ण को 562 मत प्राप्त हुए।
चौधरी की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि नेपाली कांग्रेस के नए नेतृत्व में समावेशी प्रतिनिधित्व के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत उन्हें उपसभापति की जिम्मेदारी मिली है। हालांकि, इस परिणाम का वास्तविक राजनीतिक महत्व इस बात से भी तय होगा कि पार्टी के निर्णयों और संगठनात्मक गतिविधियों में समावेशी प्रतिनिधित्व को किस प्रकार प्रभावी बनाया जाता है।
पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे विश्वप्रकाश शर्मा और पुष्पा भुसाल
उपसभापति पद के लिए घोषित परिणामों से पहले विश्वप्रकाश शर्मा वरिष्ठ उपसभापति और पुष्पा भुसाल महिला उपसभापति के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी थीं।
नेपाली कांग्रेस के संशोधित विधान के अनुसार वरिष्ठ उपसभापति सहित कुल पांच उपसभापति पदों की व्यवस्था है। इस प्रकार, वरिष्ठ उपसभापति, महिला उपसभापति, खुली श्रेणी के दो उपसभापति और समावेशी श्रेणी के एक उपसभापति के माध्यम से नई टीम का गठन किया गया है।
पुष्पा भुसाल का निर्वाचन पार्टी के इतिहास में महिला नेतृत्व की दृष्टि से भी उल्लेखनीय है। नेपाली कांग्रेस के आठ दशक के इतिहास में शैलजा आचार्य के बाद भुसाल इस पद तक पहुंचने वाली दूसरी महिला बनी हैं। हालांकि, दोनों की नियुक्ति और निर्वाचन की प्रक्रिया अलग-अलग रही है।
महामंत्री पद पर प्रदीप पौडेल, उदयशमशेर राणा और डिला संग्रौला निर्वाचित
महाधिवेशन में महामंत्री पद के परिणाम भी घोषित किए गए हैं। खुली श्रेणी से प्रदीप पौडेल और उदयशमशेर राणा निर्वाचित हुए, जबकि महिला श्रेणी से डॉ. डिला संग्रौला निर्वाचित हुईं।
प्राप्त परिणामों के अनुसार, प्रदीप पौडेल ने 4,194 मत प्राप्त कर खुली श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया। उदयशमशेर राणा 2,330 मतों के साथ निर्वाचित हुए।
इस श्रेणी में डॉ. सुनील कुमार शर्मा को 2,257, गुरुराज घिमिरे को 1,513, नैन सिंह महर को 1,134, अमरसिंह पुन मगर को 1,125, शंकर तिवारी को 123 और डॉ. संतोष उपाध्याय को 97 मत प्राप्त हुए।
महिला महामंत्री पद पर डॉ. डिला संग्रौला ने 3,118 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी महालक्ष्मी उपाध्याय ‘दीना’ को 2,864 मत मिले, जबकि रीता खनाल को 804 मत प्राप्त हुए।
गगन थापा के नेतृत्व में कांग्रेस के पुनर्गठन की चुनौती
नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में पदाधिकारियों का निर्वाचन ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी अपने राजनीतिक भविष्य और संगठनात्मक दिशा को लेकर महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। गगन कुमार थापा पार्टी के नए सभापति निर्वाचित हो चुके हैं। उनके नेतृत्व में नए पदाधिकारियों का चयन कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
सभापति पद के चुनाव में थापा ने श्यामकृष्ण खड़्गी को बड़े अंतर से पराजित किया था। इस परिणाम के बाद अब पार्टी की नई केंद्रीय नेतृत्व टीम के सामने संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं के बीच खोया हुआ विश्वास वापस हासिल करने की चुनौती है। <Cite refs={[“turn786335news4″,”turn786335view0”]}/>
हाल के प्रतिनिधिसभा चुनावों में नेपाली कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा था। मार्च 2026 के चुनाव में पार्टी की सीटें पहले की प्रतिनिधिसभा के 89 से घटकर 38 रह गईं। इस पराजय ने पार्टी के नेतृत्व, संगठनात्मक कार्यशैली और पारंपरिक मतदाताओं के साथ उसके संबंधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। <Cite refs={[“turn786335news4”]}/>
ऐसे में नए पदाधिकारियों की जिम्मेदारी केवल संगठन के भीतर पद संभालने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें पार्टी की नीतियों, जनसंपर्क और राजनीतिक विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए ठोस पहल करनी होगी।
आंतरिक प्रतिस्पर्धा के बीच एकजुटता बनाए रखना बड़ी परीक्षा
उपसभापति और महामंत्री पदों के लिए हुए चुनाव में कई नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। अलग-अलग श्रेणियों में चुनावी मुकाबले ने पार्टी के भीतर नेतृत्व की आकांक्षाओं और संगठनात्मक समीकरणों को सामने रखा है।
अब नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी प्रतिस्पर्धा के बाद सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की होगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, युवा नेतृत्व, विभिन्न सामाजिक समूहों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा।
नेपाली कांग्रेस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वह महाधिवेशन के दौरान व्यक्त आकांक्षाओं को व्यावहारिक नीतियों में बदल सके। केवल पदाधिकारियों के निर्वाचन से संगठनात्मक संकट दूर नहीं होगा; इसके लिए पार्टी को अपने राजनीतिक एजेंडे, कार्यशैली और जनता से संवाद के तरीकों में भी प्रभावी बदलाव लाना होगा।
निष्कर्ष
नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में चंद्रकांत भंडारी, मधु आचार्य और विनोद चौधरी का उपसभापति पद पर निर्वाचन पार्टी के नए नेतृत्व गठन की महत्वपूर्ण कड़ी है। इनके साथ वरिष्ठ उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा, महिला उपसभापति पुष्पा भुसाल तथा नवनिर्वाचित महामंत्रियों की भूमिका भी संगठन की भावी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
गगन थापा के नेतृत्व में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या नई टीम पार्टी को आंतरिक विवादों से निकालकर जनविश्वास की पुनर्बहाली की दिशा में आगे बढ़ा पाएगी। महाधिवेशन के परिणामों के बाद अब पार्टी की असली परीक्षा संगठनात्मक एकजुटता, राजनीतिक जवाबदेही और जनता के मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाने में होगी।


