पर्यटक वीजा पर धार्मिक प्रचार और पादरी प्रशिक्षण का आरोप, 24 दक्षिण कोरियाई नागरिक नेपाल से निष्कासित
विराटनगर।

पर्यटक वीजा का दुरुपयोग कर मोरंग जिले में ईसाई धर्म के प्रचार और पादरी तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण संचालित करने के आरोप में गिरफ्तार 24 दक्षिण कोरियाई नागरिकों को नेपाल सरकार ने देश से निष्कासित कर दिया है।
आव्रजन विभाग ने सभी के वीजा रद्द कर प्रत्येक पर 50 हजार नेपाली रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही नेपाल से प्रस्थान करने की तारीख से तीन वर्ष तक उनके नेपाल प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
आव्रजन विभाग के अनुसार, नेपाल में उनके प्रवास को संदिग्ध पाया गया। उनके आचरण और पर्यटक वीजा के उद्देश्य के विपरीत अवैध धार्मिक गतिविधियों में संलग्न होने के आधार पर निष्कासन तथा पुनः प्रवेश पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई।
मोरंग जिले की सुंदरहरैंचा नगरपालिका-7 स्थित मालाती मार्ग के ‘सुंदर डाँडा’ में संचालित ‘नेपाल न्यू कोवेनेंट कॉलेज’ में अवैध रूप से धार्मिक प्रशिक्षण, शिक्षण और दीक्षांत समारोह आयोजित किए जाने की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने निगरानी बढ़ाकर संबंधित लोगों को हिरासत में लिया था।
जिला प्रशासन कार्यालय, मोरंग ने ‘विदेशी नागरिक निगरानी निर्देशिका, 2075’ की धारा 4.6 की उपधारा (2) और (3) के तहत कार्रवाई के लिए असोज 23 गते को 24 कोरियाई नागरिकों को काठमांडू स्थित आव्रजन विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया था। विभाग की जांच में पाया गया कि उनके वीजा की अवधि समाप्त नहीं हुई थी, लेकिन वे पर्यटक वीजा पर प्रतिबंधित धार्मिक शिक्षा और प्रचार गतिविधियों में संलग्न थे। इसके बाद सभी के वीजा तत्काल रद्द कर दिए गए।
आव्रजन कानून के अनुसार, प्रत्येक पर 50 हजार नेपाली रुपये का जुर्माना वसूलने के बाद उन्हें तीन वर्ष तक नेपाल में प्रवेश नहीं करने देने के लिए काली सूची में डालकर स्वदेश वापस भेज दिया गया। निष्कासित लोगों में दक्षिण कोरिया स्थित ‘लव नेपाल मिशन’ के प्रमुख डॉ. पार्क गुई ह्वान सहित 24 नागरिक शामिल हैं।
यह समूह असोज 20 और 21 गते को काठमांडू से बुद्ध एयर और यति एयरलाइंस के विमानों से दो चरणों में विराटनगर हवाई अड्डे पहुंचा था। पहले दिन 16 और दूसरे दिन आठ नागरिक आए थे। वहां से सभी सीधे सुंदरहरैंचा नगरपालिका-7 स्थित नेपाल न्यू कोवेनेंट कॉलेज पहुंचे थे।
इनमें से छह लोग सुंदरहरैंचा-9 स्थित ‘नेपालरिका होटल’ में और शेष 18 कॉलेज के छात्रावास में ठहरे थे। उनकी योजना 12 अक्टूबर तक विभिन्न चरणों में धार्मिक संगोष्ठियों, दीक्षांत समारोहों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की थी। हालांकि, स्थानीय निवासियों और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता के कारण उनकी योजना पूरी नहीं हो सकी।
बिना सरकारी शैक्षिक अनुमति के संचालन का आरोप
सुंदरहरैंचा-7 में लगभग एक बीघा एक कठ्ठा जमीन पर नेपाल न्यू कोवेनेंट कॉलेज संचालित है। यहां दो मंजिला पक्की इमारत और 22 कमरों वाला आधुनिक भवन है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सरकारी शैक्षिक निकाय से अनुमति लिए बिना संस्थान चलाया जा रहा था। कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से इसे बेलबारी मालपोत कार्यालय में ‘रत्न बैपटिस्ट फाउंडेशन’ नामक सामाजिक एवं धार्मिक गुठी के रूप में पंजीकृत कराया गया था।
गुठी के अंतर्गत ‘बाइबिल अकादमी’ के नाम पर यहां ‘सर्टिफिकेट ऑफ थियोलॉजी’, ‘बैचलर्स ऑफ थियोलॉजी’ और ‘मास्टर्स ऑफ थियोलॉजी’ से लेकर डॉक्टरेट स्तर तक के धार्मिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे थे।
इस कॉलेज में वर्तमान में 300 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत बताए गए हैं। देश के दुर्गम हिमाली, पहाड़ी और तराई क्षेत्रों के गरीब एवं वंचित परिवारों के लगभग 45 विद्यार्थियों को छात्रावास में रखकर कम शुल्क पर धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी।
बताया गया है कि यह संस्थान दक्षिण कोरिया स्थित ‘लव नेपाल मिशन’ की आर्थिक सहायता से संचालित हो रहा था। इसके प्रबंधन में सुनसरी के धरान निवासी महेंद्र गंग सचाई राई और दुहबी-5 निवासी डॉ. शरद केसी सहित अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई है।
स्थानीय स्तर पर संगठित नेटवर्क की आशंका
सुरक्षा एजेंसियों की प्रारंभिक जांच में संकेत मिला है कि मोरंग जिले के उत्तरी क्षेत्रों—सुंदरहरैंचा, लेटांग और मिक्लाजुंग आदि—में कोरियाई नागरिकों के प्रत्यक्ष निवेश और योजनाओं के तहत स्थानीय चर्च, संस्थान तथा कॉलेज खोलकर पादरी तैयार करने का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
इससे पहले 20 चैत 2080 को भी 39 कोरियाई नागरिक पर्यटक वीजा पर नेपाल आए थे और इसी कॉलेज के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। उस समय दो कोरियाई नागरिकों को पढ़ाने के लिए वहीं छोड़ दिया गया था, जबकि बाकी वापस लौट गए थे।
नेपाल के आव्रजन कानून और संविधान के प्रावधानों के अनुसार, विदेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा पर आकर धर्म प्रचार, धार्मिक प्रशिक्षण या पेशेवर शिक्षण गतिविधियों में संलग्न होना प्रतिबंधित है।

