आन्दोलन शान्तिपूर्ण है और हम अपनी मांग शान्तिपूर्ण तरीके से ही मनवाना चाहते हैं
मधेश आन्दोलन के करीब तीन महीनों के बाद भी नेपाल सरकार और मोर्चा के बीच सकारात्मक वार्ता द्वारा समाधान नही निकल सका है । मोर्चा के बन्द के कारण पूरे नेपाल का जनजीवन प्रभावित है, जनता आक्रोशित बनती जा रही है । इसी सिलसिला में सद्भावना पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र महतो और हिमालिनी प्रतिनिधि कैलास दास के साथ की गई विशेष वार्ता का संपादित अंश ः—
० अभी तक के मधेश आन्दोलन से जनता को क्या उपलब्धि मिली है ?
आन्दोलन तभी होता है जब असंतोष होता है । मधेश की जनता आज से नहीं सदियों से शोषित है । इस आन्दोलन से जनता में अपने अधिकार के लिए व्यापक रूप से जनचेतना बढ़ी है । अढाई सौ वर्ष से शोषित दमित जनता अपने अधिकारों के प्रति सचेत हुई है । संविधान में उसके साथ बेइमानी हुई है, उसका हक अधिकार छीन लिया गया है, इतना ही नहीं उसे हमेशा के लिए दबाकर रखने की कोशिश की गई है । विगत में जो सम्झौते हुए थे उसे मानने से इन्कार कर दिया गया है । ऐसे संविधान बनाने वाले और नही बनाने वाले का नकाब उतरा है ।
काँग्रेस एमाले पार्टिया जिसके पीछे जनता वर्षों से लगी रही और जब संविधान सभा का निर्वाचन भी हुआ हर निर्वाचन में मधेशी जनता काँग्रेस एमाले एमाओवादीको को समर्थन करती आई । मधेश में रही पार्टीयो को समर्थन नही कर पाई । काँग्रेस एमाले पार्टी के उपर भरोसा करती आई । संविधान सभा निर्वाचन में भी यही हुआ । अधिकांश मत काँग्रेस एमाले को मिला अर्थात संविधान निर्माण की जिम्मेदारी उन्हें दी गई थी । इस अवस्था मे जो विश्वास के आधार में जो मत दिया था, अपना प्रतिनिधि चुनकर भेजा था । जब संविधान निर्माण करने का वक्त आया उस समय जो मधेश से जीते हुए प्रतिनिधि थे काँग्रेस एमाले के उनका असली चेहरा बाहर आ गया । उस प्रतिनिधि का, जिसके बाप दादा सब मधेशी थे जब ३ गते को संविधान पर मतदान हुआ तो उसका असली मालिक काँग्रेस एमाले एमाओवादी और उसका नेता बन गये और मधेशी की हत्या कर दी गई । मधेशी के सम्पूर्ण अधिकार को समाप्त कर दिया । इस आन्दोलन से पहली उपलब्धि भी यही है कि जनता की आँखें खुली हैं उन्हें यह समझ आया है कि हमारे अधिकार का हत्यारा कौन है ? यह संविधान मधेश का हत्या करने वाला है और यह बात मधेशी जनता को समझ मे आ गया है । अगर मधेशी सभासद (काँग्रेस,एमाले और एमाओवादी का) संविधान सभा में हस्ताक्षर नहीं करते तो मधेश भावना विपरित संविधान नही बन पाता । सबसे बड़ी उपलब्धि इस आन्दोलन की यह रही है कि इसने सभी को बेनकाब कर दिया । जो बहुरुपिया थे काँग्रेस एमाले मधेश विरोधी पार्टी और उसके नेताओं को बेनकाब कर दिया है । इसके विरुद्ध मे जनता अधिकार के लिए सड़क पर आ गयी है ।
इस आन्दोलन से मधेशी का हित और अहित करने वाला कौन है उसका पहचान जरुरी था वह पहचान भी हुआ है । मधेश में अभूतपूर्व आन्दोलन से मधेशी जनता में एकता की भावना आई है । मधेशी, दलित, जनजाति, मुस्लिम, थारु सभी में एकता की भावना आयी है । तभी तो सब कहते हैं मधेशी एकता जिन्दावाद, जय मधेश । अपने अधिकार के लिए मधेशी विभाजित नहीं है । मधेश देर वा सबेर अधिकार लेकर रहेगा । अधिकार के लिए जितना दिन आन्दोलन चले लड़ने के लिए तैयार है यह भी एक उपलब्धि है ।
० मधेश आन्दोलन के क्रम में प्रशासन द्वारा चलाई गई गोलियाँे से शहीद हुए परिवारजन के और घायल के परिवारजन के दैनिक जीवनयापन के लिए मोर्चा ने अभी तक कैसा व्यवस्थापन किया है और आगे क्या सोच रखा है ?
जहाँ तक शहादत दिए मधेशी वीर सपूत की बात है तो मोर्चा क्षतिपूर्ति और शहीद घोषित करने की माँग कर रही है और हम यह करवाएँगें भी । लेकिन जो सम्मान मधेशी जनता के अपने शहीदो के प्रति है जब मधेश प्रदेश बनेगा तो मधेश के लोग शहीद के प्रति हमेशा नतमस्तक रहेंगे । शहीदो के प्रति उच्च सम्मान और सहायता सारी बात वह मधेश सरकार करेगी यह हमारी प्रतिबद्धता है, उसके प्रति हम संवेदनशील हैं ।
० नेपाल सरकार का आरोप है कि भारत ने अघोषित नाकाबन्दी किया है । सरकार के ही परराष्ट्र मन्त्री कमल थापा कहते हंै कि मधेश आन्दोलनकारी ने नाका अवरुद्ध किया है, तो सरकार की यह दो प्रकार की नीति षड्यन्त्र तो नही है ?
सरकार की तो कोई नीति ही नहीं है, यह षड्यन्त्र ही है । सरकार का कोई व्यक्ति अघोषित नाकाबन्दी कहे या, कोई मधेश की नाकाबन्दी कहे इससे किसी प्रकार का फर्क नहीं पड़ता है । यह सब बकबास है । सारी दुनियाँ देखती है कि मधेश की जनता सड़क पर है और मोर्चा के आव्हान से नाका बन्द हुआ है । यह तो खोखला राष्ट्रवाद है, भारत विरोधी राष्ट्रवाद है । मधेश की समस्या को अनदेखा करने के लिए अन्धेरे में रखने के लिए भारत अघोषित नाकाबन्दी किया है यह कहकर मधेश की समस्या से भागना चाह रही है सरकार । मधेशी जनता ने नाकाबन्दी किया है अगर इस बात को सरकार स्वीकार करेगी तो दुनियाँ को बताना पड़ेगा कि मधेश की जनता ने क्यों नाकाबन्दी किया है, क्यों विरोध, क्यों संघर्ष, क्याें आन्दोलन कर रही है ? उसकी समस्या का समाधान करो । नेपाल सरकार मधेश की समस्या के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार रूप से अपने को प्रस्तुत नहीं करना चाहती है । इसलिए भारत का नाम लगाना चाहती है । मधेशी जनता ने कठिनाई पैदा किया है यह एक भी नेता में कहने का हिम्मत नही है, यह बेईमानी है, षडयन्त्र है । नेपाल के वर्ग विशेष की जो जनता है, शासकवर्गीय जो लोग हंै उसको भारत विरोधी, मधेश विरोधी राष्ट्रवाद का अफीम की गोली खिलाकर सरकार के विरोध में जो बात आनी चाहिए वह नहीं आकर मधेशी जनता के विरोधी बातों को सामने लाया जा रहा है और सरकार अपनी नाकामी को छुपाने का प्रयास कर रही है ।
० ऐसा भी हल्ला है कि मोर्चा के राजेन्द्र महतो जिन जिन नाका में गए है वह पूर्णरूप से बन्द है । मोर्चा के अन्य नेतागण का प्रभाव नाका में नहीं देखा जा रहा है । क्या इसका मतलव मोर्चा के अन्य नेतागण का प्रभाव कम है ?
शुरु में मोर्चा की जिम्मेदारी थी । कार्य विभाजन हुआ था । हमारी जिम्मेदारी में वीरगञ्ज नाका पड़ा था । विराटनगर नाका और भैरहवा नाका अन्य साथीगण के अन्दर था । वैसे वह लोग भी प्रयास कर रहे हैं । सभी ने सभी जगह प्रयास किया है । हम सभी साथ हैं । कम और अधिक की कोई बात नहीं है और होनी भी नहीं चाहिए । भारत से नेपाल में ट्यांकर नहीं आने देने का नाकाबन्दी हमने किया है । कठिनाईयाँ है, हम जहाँ जहाँ गये है जनता और कार्यकर्ता आती है । पहाड़ी मीडिया बहुत ज्यादा बदनाम करने पर तुली है । ऐसी बातों का प्रचार कर आन्दोलन कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है । जिस जिस नाका से नही भी प्रवेश करता है तो वहाँ से भी प्रवेश किया है ऐसी अपवाहों को समाचार बनाकर प्रसारण करता रहता है ।
० मोर्चा ने सरकार और मोर्चा के बीच यह अन्तिम वार्ता है कहा था । किन्तु इसबार भी कोई निष्कर्ष नही हो सका लेकिन कहा जा रहा है कि वार्ता सकारात्मक रहा इस पर आपकी क्या धारणा है ?
इसलिए वार्ता सकारात्मक कहा गया है कि पहली बार सरकार हमारी माँग को इनडोर किया है । सीमांकन सहित जो भी मोर्चा की माँग थी उस पर सरकार ने बात किया है । उससे पहले सीमाकंन पर बात ही करना नहीं चाहती थी । इससे पहले कहते थे मधेश की कोई समस्या ही नही है, सारी समस्याओं का हल कर दिया गया है इस प्रकार की अभिव्यक्ति आती थी । लेकिन उस दिन का वार्ता हमारी मुख्य एजेण्डा पर हुआ है । सभी एजेण्डा बात करने के लिए तैयार हैं और सभी एजेण्डा पर वार्ता करेगें स्वीकार किया है । लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हमारी सभी माँग पूरी होगी क्योंकि इतनी आसानी से सरकार कुछ भी देनेवाली नहीं है ।
० मधेश की माँग सम्बोधन कराने के लिए भी तो दो तिहाई बहुमत चाहिए, लेकिन नेपाली काँग्रेस प्रतिपक्ष में है अगर नेपाली काँग्रेस ने अस्वीकार किया तो ?
यह तो संविधान बनानेवाले को पारित करना पड़ेगा । जिन लोगाें ने संविधाना बनाया यह उनका काम है । वह चाहे पार्टी मे रहे चाहे न रहे । लेकिन संविधान तो काँग्रेस, एमाले और एमाओवादी ने मिलकर बनाया है । यह तीनाें पार्टी अभी भी देश में है, तीनो का अस्तित्व अभी भी है । जो बनाया है, गलत काम किया है संशोधन भी तो उन्हीं तीनों को करना पड़ेगा ना । यह जिम्मेवारी उन्हीं तीनाें पार्टी की है, कैसे करेगा वह समझे । नहीं करेगा तो मधेश की जनता उसका भी हिसाब किताब करेगी ।
० मधेश आन्दोलन जारी है । एक ओर मोर्चा के नाकाबन्दी से पूरे देश का जनजीवन प्रभावित है । ऐसी स्थिति में चीन नेपाल को सहयोग करने के लिए तैयार हुआ है । पेट्रोलियम पदार्थ सहित का सहयोग करने के लिए तैयार है । चीन की भूमिका मधेश आन्दोलन में कैसी होगी ?
कोई भी देश किसी भी देश से सम्झौता कर सकता है । किसी भी देश से समान ला सकता है और नेपाल सरकार का भी हक है कि कहीं से कुछ ला सकता है, किसी से भी सम्झौता कर सकता है । इसमे कोई दो मत नहीं है । लेकिन अभी के सन्दर्भ में नेपाल में जहाँ देश की आधी आबादी से ज्यादा अपने अधिकार के लिए महीनों से संघर्ष कर रही है आन्दोलित है, नाकाबन्दी कर रही है, ऐसी स्थिति में सरकार का यह कदम अनुचित है क्योंकि नेपाल सरकार तो चाहती है कि यह आन्दोलन किसी प्रकार समाप्त हो जाए । अगर ऐसी स्थिति में मधेश आन्दोलन के विरोध में कोई देश सहयोग करता है तो मधेश विरोधी है । अधिकार प्राप्ति के लिए लाखों जनता सड़क पर है और चीन सरकार नेपाल सरकार को सहयोग करने के लिए तैयार है, ऐसी स्थिति में मधेशी जनता का आक्रोश में आना स्वाभाविक है और चीन भी मधेश विरोधी कहलाएगा ।
० फिर से आन्दोलन सकारात्मक नहीं हुआ तो मोर्चा की आगे की रणनीति कैसी होगी ?
देखिए, मधेश आन्दोलन शान्तिपूर्ण होता आया है और शान्तिपूर्ण ही होगा । आन्दोलन शान्तिपूर्ण है और हम अपनी माँग शान्तिपूर्ण तरीके से ही मनवाना चाहते हैं । मधेश की जनता ने इस आन्दोलन में अपने असीम धैर्य का परिचय दिया है और आगे भी हमें इसकी ही अपेक्षा है हम अपने अधिकारों को अवश्य प्राप्त करेंगे ।


