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जनकपुर में दर्जनो भारतीय श्रद्धालु घायल, पुलिस और आन्दोलनकारी बीच झड्प जारी

 

कैलास दास,जनकपुर, पुस १ । धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी जनकपुरधाम में राम जानकी विवाह महोत्सव के अवसर पर भारत सहित से आए  दर्जनौं श्रद्धालुगण घायल हो चुका है । घायल श्रद्धालुओं को जनकपुर अञ्चल अस्पताल में इलाज चल रही है । अधिकांश घायल में बिहार के सीतामढी, मुजफ्फपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, बेगुसराय, मोतीहारी एवं झारखण्ड का है ।

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नेपाल का राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी बुधवार जानकी मन्दिर में दर्शन करने आने पर आन्दोलनकारीयों ने जमकर कला झण्डा दिखाते हुए नारावाजी किया था । नाराबाजी के क्रम में पुलिस ने आन्दोलनकारीयो पर अन्धाधुन अश्रु ग्यास प्रहार किया तो आन्दोलनकारीयो पुलिस उपर ईट पथ्थर फेका था । उसी क्रम में पुलिस भारत से आए श्रद्धालुओं पर लाठी चार्ज किया जिनमें करीबन ७० लोग घायल हो चुका है । एक दर्जन लोग गम्भीर घायल है तो  कुछ समान्य घायल है । ज्यादा लोगो को कपाड, पाँव और हाथों में चोट लगी है ।

2पुलिस की लाठी से संघीय समाजवादी फोरम नेपाल की केन्द्रीय सदस्य चमेली देवी दास गम्भीर घायल है । उनका दायाँ हाथ टुट चुका है तो कपार में ६÷७ टांके लगी है । उनका भी उपचार जनकपुर अञ्चल अस्पताल में चल रहा है ।

क्यो हुआ झड्प3

नेपाली काँग्रेस, नेकपा एमाले और एकीकृत माओवादी ने नेपाल का संविधान बि.सं.२०७२ जारी किया । जिनमे मधेशीयों के अन्तरिम संविधान में मिला अधिकार भी छिन लिया गया । अन्तरिम संविधान में दिया गया मधेशियो को अधिकार संविधान में राखने के लिए मधेश में आन्दोलन चल रहा था । लेकिन एमाले काँग्रेस की सरकार मधेशी जनता को वेवास्ता करते हुए बिना बहस का संविधान लाया । भाद्र ३ गते यह संविधान लाया गया । जबकि श्रावण २९ गते मधेश में आन्दोलन चल रही है । उसी समय से मधेश नेतृत्वकर्ता दलों ने नेपाली काँग्रेस, एमाले और एमाओवादी का सभासद् एवं मन्त्री का ‘मधेश प्रवेश  निषेध’ किया है । लेकिन  विद्यादेवी भण्डारी  को एमाले की ओर से राष्ट्रपति बनाया गया है ।

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राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी जनकपुर दर्शन के लिए आएगी  उसी  समय से जनकपुर में उनका विरोध हो रहा था । उसके वावजूद भी करीबन पाँच हजार से ज्यादा सेना, सशस्त्र, नेपाल पुलिस खटाकर उन्होने जनकपुर आने में सफल रहा । जब जमकर राष्ट्रपति भण्डारी को विरोध हुआ तो पुलिस ने भी जमकर पिठाई की ।

 

कहाँ कहाँ कहर ढाली सुरक्षाकर्मियो ने

 

राष्ट्रपति विद्या देवी भण्डारी आने से पहले पुलिस ने जनकपुर का सभी दुकाने बन्द करा दिया और फाँटफुट पर लगे दुकाने भी उठाबा दिया । जब राष्ट्रपति भण्डारी आई तो आकाश मार्ग से सुरक्षा गस्ती चल रही थी । उतनाही नही जनकपुर के प्रायः घर के छत पर सेना, सशस्त्र और जनपथ पुलिस खडा था । आन्दोलनकारी मुख्य सडक पर नारा लगा रहा था तो पुलिस स्थानीयवासी को घर से निकल्ने पर भी पाबन्दी लगा दिया था । यहाँ तक  पत्रकारो को भी एक जगह से दुसरी जगह जाने नही देता था ।

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विषम परिस्थिति में मनाया विवाह पञ्चमी

 

जनकपुर में विवाह पञ्चमी महोत्सव बहुत ही विषम परिस्थिति में मनाया गया है । सुबह ९ बजे से साम को ४ बजे तक जानकी मन्दिर परिसर में पुलिस और आन्दोलनकारी बीच झड्प चल रहा था । ऐसी स्थिति में भगवान राम और भगवती सीता की डोला कैसे निकाला जाए मुश्किल था । लेकिन स्थानीय युवा क्लव का प्रयास से धार्मिक परम्परा अनुसार जानकी मन्दिर से डोला निकलर रंगभूमी मैदान में पहुँचा था । वैसे राम मन्दिर से भगवान राम का डोला एक घण्टा पहले रंगभूमी मैदान में पहुँच चुका था । भयत्रास के वावजूद जनकपुर का विवाहोत्सव मनाया गया है । प्रत्येक वर्ष विहोत्सव में नेपाल— भारत से जनकपुर में २ लाख श्रद्धालुगण आते है । किन्तु इस बार २० हजार में सीमित देखा गया ।

 

श्रद्धालु यात्रीगण विच्चली में

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भारत सहित कई जगहो से आए हुए श्रद्धालु यात्रीगण पुलिस की ज्यादती देखकर रो रोकर दिन बिताया । बुधवार दिनभर अश्रु ग्यास, लाठी और पथ्थर से बचने के लिए एक जगह से दुसरी जगह भागती रही लेकिन उनलोगो को छुपने तक का स्थान नही मिल रहा था ।

 

श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक आए श्रद्धालुगण भयत्रास में अपना दिन विताया है । खास कर भारत से आए श्रद्धालुगण मध्ये कुछ को समूह विछडने का चिन्ता था तो कुछ घायल हुए अस्पताल के बेड पर रो रहा था । जनकपुर के लिए यह आन्दोलन भले ही नयाँ नही होगा लेकिन बाहर से आएर श्रद्धालु अवश्य चिन्ता में डुबा हुआ था ।

 

कुत्ता से सूँघा गया पूmल और प्रसाद जानकी माँ को चढाया गया

 

नेपाल का राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने जनकपुर में जानकी दर्शन के क्रम में तालिम प्राप्त कुत्ता से सुँघाकर प्रसाद चढाया है । धर्मज्ञाताका कहना है कि यह अपवित्र किसिम से राष्ट्रपति भण्डारी जी ने जानकी माता की दर्शन किया है । इससे बहुत बडा अपसुकन हो सकता है । इतनाही नही राष्ट्रपति के सुरक्षा में खटाया गया सुरक्षाकर्मी भी लेदर का जुत्ता पहनकर ही मन्दिर प्रवेश किया था ।

 

 

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