Thu. Jul 23rd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

प्रधानमंत्री और राजदूत टकराव के बाद दादागिरी शैली में ओली ने उपाध्याय को वापस बुलाया

 

बीरेन्द्र केएम , काठमांडू, ७ मई |
एमाले सुप्रोमो समेत रहे केपी ओली यानी खड्गप्रसाद ओली ने असहयोग के आरोपों और सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोपों लगाकर भारत से राजदूत दिपकुमार उपाध्य को वापस बुला लिया है । लेकिन राजदूत उपाध्याय सिर्फ एक राजदूत ही नहीं है वे नेपाली काङ्ग्रेस में मन्त्री रह चुके एक केन्द्र स्तर के नेता भी है । और जाहीर सी बात है कि २ दिन पहले केपी ओलीजी की सरकार कोमा मे जा पहुची थी और उसके पिछे नेपाली काङ्ग्रेस का ही हात थी | तो क्या काङ्ग्रेस से बादला लेने के लिये पहला कदम है ? अब नेपाल की सियासी मे यह बडा प्रश्न बनके खडा हो गया है । हालाकी नेपाली काङ्ग्रेस ने अभी औपचारिक रूप से कोइ प्रतिक्रिया नही दिया है लेकिन औनौपचारिक रूप से नेपाली काङ्ग्रेस के नेताओ ने सरकार कि यह फैसलाको बद्ले की राजनीति बता दिया है ।

vidyadevi bhandary

गणतन्त्र के घोर बिरोधी और राजतन्त्र के पक्षधर राप्रपा नेपाल के अध्यक्ष समेत रहे कमल थापा की नेतृत्व बाली विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नेपाली राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की निर्धारित भारत यात्रा रद्द होने को लेकर राजदूत दीप कुमार उपाध्याय का प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से टकराव हुआ था। और इसी टकराव के वाद उन्हे वापस ही बुलाया गया है | जबकि राजदूत खूद ओली से नराज थे और ओ इस्तिफा देने के मूड मे थे  । राजदूत ने खुद बता दिया है कि राष्ट्रपति बिध्यादेवी भण्डारी की भारत मध्यप्रदेश यात्रा रद्द होने के बाद प्रधानमन्त्री ओली के साथ उनकी बात भी हुइ थी । राजदूत महोदय ने ओलीसाहब को साफ साफ कह दिया था कि राष्ट्रपति का भारत भ्रमण की पहल नेपाल की और से किया गया था | इसलिए भ्रमण रद्द का कोई औचित्य नहीं | इसी पर प्रधनमंत्री ने दादागिरी शैली में कमल थापा को बुलाकर राजदूत वापस बुलाने का निर्णय करबाया |

यह भी पढें   वागमती प्रदेश सरकार से नेकपा एमाले बाहर

oli $ upadhyay

मसाला साफ है भारत मध्यप्रदेश के सरकार प्रमुख शिवराज सिंह चौहान ने कटसी मेण्टेन करते हुवे नेपाल के रास्ट्रपति को सिङ्हस्थ कुम्ह मेला मे सामेल होने के लिए न्यौता भेजे थे और उसी न्यौता के तहत रास्ट्रपति के मध्यप्रदेश दौरा को औपचारिक भारत दौरा बनाने की कोसिस मे नेपाल सरकार जुटी थी और ये सभी कम करने की जिम्मेदारी उपाध्य को दी गइ थी । और यही काम सफल नही बनाने के आरोप  मे राजदूत को वापस बुलाया गया है ।
  खबर में यह भी है कि ओली सरकार के कैबिनेट ने उपाध्याय को प्रधानमंत्री से उनकी संक्षिप्त वार्ता के बाद वापस बुलाने का फैसला किया था। लेकिन इसबात की पुष्टि कोइ सरकारी अधिकारी ने नही किया है । नेपाल के हर अखबार और हर टिवि सहित अनलाइन मिडिया ने सुत्रो कि हवाले से ही खबर बनाइ है
भंडारी को मधप्रदेश को उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ कुंभ मेले में 14 मई को ‘शाही स्नान’ में भी शामिल होना था और वाद मे दिल्ली दौरा मे भी जाने कि तैयारी की गइ थी ।
नेपाल सरकार के यह फैसले के वाद नई दिल्ली में सरकारी सूत्रों ने कहा है कि ‘हमें पता चला है कि नेपाल की तरफ से नेपाली राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की भारत यात्रा स्थगित कर दी गई है। हमारा मानना है कि यह नेपाल में राजनीतिक घटनाक्रमों की वजह से हुआ है।’
विपक्षी नेपाली कांग्रेस के नेता उपाध्याय को पिछले साल अप्रैल में भारत में नेपाल का दूत नियुक्त किया गया था। उन पर सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। खबर मे ये भी खा गया है कि उपाध्याय पर विदेश मंत्रालय को सूचित किए बिना भारतीय दूत रंजीत राय के साथ दक्षिणी नेपाल के मधेस जिलों का दौरा करने का भी आरोप है।

यह भी पढें   धरान में अग्रकुलमाता महारानी माधवीजी की 5147वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाई गई

राजदूत के उपर ओली सरकार को अपदस्थ करने के प्रयास में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया है। जब कि ये बात भी कही छिपी हुइ नही है कि प्रधानमंत्री ओली की सरकार कल उस समय खतरे से बची जब प्रचंड के नेतृत्व वाले माओवादियों ने यू-टर्न ले लिया और फैसला किया कि वे ‘कुछ समय तक’ समर्थन वापस नहीं लेंगे।
अन्त मे हम ये जरूर कह सकते है कि ओली सरकार खत्म होने के करार पर है और उसीका एक साइड इफेक्ट है |  ये साइड इफेक्ट उस रात बनाई गई जिस रात ओली जी सरकार जाने की  चिन्ता मे रातभर नही सोए थे | ओर समर्थन वापस लेने की घोषणा करके एमाओवादी सुप्रोमो पुस्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने मोबाइल सुइच अफ करके कान मे तेल लेके सो गए थे | उसी रात मे ओली जी और उनके समर्थको ने इसका निर्णय किया था । और वाद मे प्रचण्ड सहाब ओली जी के उपर एक खास डिल के तहत फिर मेहरवान हुवे और आगामी बजेट तक श्री ओली साहब प्रधानमन्त्री के कुर्सी पर बिराजमान हैं
प्रधानमंत्री और राजदूत टकराव के बाद दादागिरी शैली में ओली ने राजदूत को वापस बुलाया

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.