एसएलसी मे ग्रेडिङ प्रणाली के कारण सपना चकनाचूर हो गया बहुतों विद्यार्थियों और अभिवावकों का

(लेखक )
एसएलसी परीक्षा के ८३ बर्ष के इतिहास मे पहली बार लेटर ग्रेडिङ प्रणाली अनुसार परीक्षा फल प्रकाशित हुवा है। इस प्रणाली का सीधा असर यह दिखाई दे रहा है की करीब २लाख छात्र सैद्धान्तिक शिक्षा अन्तर्गत कक्षा ११में किसी भी विषय मे दाखिला नहीं ले सकते।सरकार की यह नीति थी कि अब एसएलसी परीक्षा मे किसी को भी अनुतीर्ण का प्रमाण पत्र नही दिया जाएगा पर इस नीति के कारण ही डी और ई ग्रेड लाने वाले करीब २ लाख छात्रों को अघोषित रूप मे अनुतीर्ण किया गया है।क्योंकि अनुतीर्ण तो नही किया गया पर आगे की पढ़ाई से वंचित भी कर दिया गया है।उर्तीण करने के लिए लचकता अपनाया गया है पर कक्षा ११ मे भर्ना होने के लिए नियम कड़ा कर दिया गया है।नया नियम अनुसार कक्षा११ मे भर्ना होने के लिए न्यून्तम जीपीए १.६ होना आवश्यक है।ईतना ही नही पाँच विषय मे न्यूनतम डी प्लस या सी ग्रेड होना अनिवार्य है।किसी एक विषय मे भी इस से लो ग्रेड है तो दाखिला नही होगा।इस नया नियम के अनुसार अंग्रेजी,विज्ञान और गणित के अलावा नेपाली और समाजिक शिक्षा को भी ज्यादा महत्व दिया गया है।यदि विज्ञान पढ़ने वाले बिध्यार्थी का तीन महत्वपूर्ण विषयों अंग्रेजी,विज्ञान और गणित मे अच्छा ग्रेड है पर वह नेपाली या समाजिक शिक्षा मे डीग्रेड लाया है तो वह विज्ञान नही पढ़ सकता।यह निर्णय इस प्रणाली का सबसे कमजोर पक्ष है।इस प्रणाली के कारण बहुसंख्यक औसत बिध्यार्थी और उनके अभिवावकों का सपना चकनाचुर हो गया है।क्योकि वे अपने मन पसंद विषय नही पढ़ सकते।सीधा तौर पर कहा जाए तो यह प्रणाली तय करती है की कौन बिध्यार्थी क्या पढ़ सकता है,बिध्यार्थी की पसंद की कोई मायने नही।फलस्वरूप बिध्यार्थी एंव अभिवावकों में व्यापक निराशा और असंतोष है।परीक्षा फल प्रकाशित होने से पूर्व जो उत्साह और उमंग था बिध्यार्थीयों में अब वह निराशा मे बदल गया है।उनका डाक्टर,ईन्जिनियर,सीए आदि बनने की सपना जो टूट गया है।

