क्या चैत्र में स्थानीय निर्वाचन हो पायेगा ?
विजेता चौधरी, काठमाण्डू, १३ साउन
नई सरकार की घोषणा होने से पहले नेपाली कांग्रेस तथा माओवादी केन्द्र के बीच चैत्र में स्थानीय निर्वाचन करवाने के उपर हुई समझदारी को लेकर अभी राजनीतिक वृत्त में खास चहल पहल है ।
नई सरकार कैसे गठन होगी ? क्या होगा प्रारुप ? इन सवालों का तथा तर्क विर्तकों से राजनीति का पारा गर्म है । स्थानीय निकाय पुनर्संरचना आयोग ने देश भर में ५ सौ ६५ स्थानीयों के निकाय होने की अवधारना लाने के बाद चैत्र में स्थानीय निर्वाचन करवाने के लिए दोनो दल सहमत हुई है ।
यद्यपि स्थानीय तह पुनर्संरचना आयोग द्वारा प्रस्ताव किया गया ५ सौ ६५ स्थानीय एकाइ व्यवहारिक न होने का निष्कर्ष दो दलों का है । प्राप्त सूचना के मुताविक इस विषय के उपर दोनो दल एमाले तथा मधेसीवादी दलों के साथ भी परामर्श कर आयोग को सुझाव देने का निर्णय लिया है ।
दानो दलों के बीच हुए चार बुंदे सहमति के मुताविक चैत्र महीना के भितर स्थानीय तह का निर्वाचन कराने, राजनीतिक सहमति के लिए एमाले तथा मधेसी मोर्चा के साथ वहस चलाने, स्थानीय तह पुर्नसंरचना आयोग को सहयोग करने तथा निर्वाचन तैयारी करने के लिए निर्वाचन आयोग को आग्रह करने की सहमति हुइ है ।
कहा जा रहा है कि स्थानीय निर्वाचन माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दहाल के नेतृत्व में तथा प्रदेश व संघीय संसद का निर्वाचन कांग्रेस अध्यक्ष देउवा के नेतृत्व में करने की समझदारी भी इस से पूर्व ही दो दलोंं के बीच तय हो चुकी है । अव देखना ये है की ये चहलपहल कितनी स्थायी है ।
यद्यपि इस से पहले केपी ओली के सरकार में अगहन महीने के भीतर ही स्थानीय निर्वाचन करवाने की सहमती हुई थी लेकिन कांग्रेस ने उक्त समय के भीतर निर्वाचन नहीं करवा सकते, यह कहते हुए विरोध किया था । अभी सरकार का गठन भी नही हुआ है । साथ ही मधेसी पार्टियों की समस्या व जनता की समस्या यथावत है । मधेसी पार्टी अपनी समस्याओं के लिए जिद् पर अड़ी है कि जबतक उनकी समस्याओं का समाधान न हो जाए वह सरकार में सहयोग नहीं करेंगे व सीमांकन के सवाल पर भी दोनों दलों की क्या नीति है यह देखना बाकी है । इस स्थिति में क्या ये चुनाव सफल हो पायेगा ?


