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पार्वती जी ने शिवजी के एक अंग पर अमृत मला वहीं से भगवान विष्णु प्रकट हुए

 

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काठमांडू, ५ जनवरी | जिस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह मलमास कहलाता है। इन दिनों में कोई भी मांगलिक कार्य करना वर्जित रहता है। परंतु इस दौरान किए गए धर्म-कर्म से जुड़े सभी कार्य विशेष फलदायी रहते हैं। मलमास में केवल ईश्वर के लिए व्रत, दान, हवन, पूजा, ध्यान आदि करने का विधान है। ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य प्राप्त होता है।

आपको बता रहे हैं कि इस दौरान आपको क्या करना चाहिए;

मलमास में आपको ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ मंत्र या गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र का नियमित जप करना चाहिए। इस मास में श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, पुरुषसूक्त, श्रीसूक्त, हरिवंश पुराण और एकादशी महात्म्य कथाओं के श्रवण से सभी मनोरथ पूरे होते हैं। इस दौरान श्रीकृष्ण, श्रीमद् भागवत गीता, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना की जाती है। इस माह में उपासना करने का अलग ही महत्व है।

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पुराणों में बताया गया है कि यह माह व्रत-उपवास, दान-पूजा, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के सभी पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इस माह में आपके द्वारा गरीब को दिया एक रुपया भी सौ गुना फल देता है।

मलमास में दीपदान, वस्त्र और श्रीमद् भागवत कथा ग्रंथ दान का विशेष महत्व है। इस मास में दीपदान करने से धन-वैभव के साथ ही आपको पुण्य लाभ भी प्राप्त होता है।

इस मास में भगवान विष्णु के पूजन के साथ कथा श्रवण का विशेष महत्व है। इस दौरान शुभ फल प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपना आचरण पवित्र और सौम्य रखना चाहिए। इस दौरान मनुष्य को अपने व्यवहार में भी नरमी रखनी चाहिए।

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शिव पुराण में भगवान विष्णु के विषय में सर्वविदित तथ्य दिए गए हैं। जब जगत में कोई नहीं था तब शिवा और शिव ने सृष्टि-संचालन की इच्छा जाहिर की। वह एक ऐसी शक्ति चाहते थे जो उनकी शक्तियों के साथ संसार को चलाए। ऐसी मनोकामना के साथ शिवा यानि पार्वती जी ने शिवजी के एक अंग पर अमृत मल दिया और वहां से एक पुरुष प्रकट हुए। यही पुरुष भगवान विष्णु थे। भगवान विष्णु जी त्रिदेवों में एक है और वहीं जगत के पालक हैं।

विष्णु जी की कांति इन्द्रनील मणि के समान श्याम है। अपने व्यापक स्वरूप के कारण ही उन्हें शिवजी से विष्णु नाम मिला। विष्णु जी का अस्त्र सुदर्शन चक्र है। पीले वस्त्र धारण करने के कारण इन्हें पीतांबर भी कहा जाता है।

पुराणों में बताया गया है कि श्री हरि माता लक्ष्मी के साथ क्षीरसागर में विराजमान हैं। इनकी शैय्या शेषनाग है जिसके फन पर यह संसार टिका है। लक्ष्मी जी और विष्णु जी को हिन्दू पुराणों में विशेष महत्व दिया गया है।

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हर अवतार में लक्ष्मी जी विष्णु जी के साथ अवश्य धरतीलोक पर आती हैं।

विष्णु भक्तों के लिए अष्टाक्षर “ऊँ नमो नारायणाय” मंत्र को श्रेष्ठ माना गया है।

भगवान विष्णु के दस अहम अवतार बताए गए हैं जिनमें से प्रमुख हैं परशुराम, राम और श्री कृष्ण।

1-विष्णु जी का अस्त्र सुदर्शन चक्र है।

2-भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ देव को माना जाता है।

3-श्री राम भगवान विष्णु के मर्यादापुरुषोत्तम अवतार थे।

4-गणेश जी भगवान हरि के प्रिय हैं।

5-श्री कृष्ण को विष्णु जी का पूर्णावतार माना जाता है।

 

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