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माहन इंसान .. गुलज़ार साहेब ! चंद पंक्तियों से उनके जीवन की अनुभूति

 
आज साहित्य की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए में मनीषा गुप्ता हिमालिनी पत्रिका (नेपाल) से आप लोगो के समक्ष जिन साहित्यकार , गीतकार , जिनका एक एक शब्द कागज़ पर ही नही हर एक इंसान के दिलो पर अपनी छाप छोड़ता है मानो हर शब्दों में वो एक आम इंसान की रूह को जी गए जी हां वो माहन इंसान #गुलज़ार साहेब …..!!
मैं हिमालिनी की ह्रदय से आभारी हूँ कि इस पत्रिका के माध्यम से मुझे और मेरे जैसे अनेको लोगो को हमारे साहित्य और उनकी रचना करने वाले महानुभावो से आत्मसात होने का मौका दिया ………
गुलज़ार जी की चंद पंक्तियों से उनके जीवन की अनुभूति 
किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें
उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं
कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं
बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते

जीवन परिचय  गुलजार

जन्म दिन : 18 Aug 1934
आयु : 83
सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ़ गुलज़ार भारतीय गीतकार,कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक तथा नाटककार हैं।  गुलजार को हिंदी सिनेमा के लिए कई प्रसिद्ध अवार्ड्स से भी नवाजा जा चुका है। उन्हें 2004 में भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से भी नवाजा जा चूका है।  इसके अलावा उन्हें 2009 में डैनी बॉयल निर्देशित फिल्म स्लम्डाग मिलियनेयर मे उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हे सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार पुरस्कार मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हे ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
पृष्ठभूमि
सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ़ गुलज़ार का जन्म 18 अगस्त 1936 में दीना, झेलम जिला, पंजाब, ब्रिटिश भारत में हुआ था, जोकि अब पाकिस्तान में है।  गुलज़ार अपने पिता की दूसरी पत्नी की इकलौती संतान हैं। उनके पिता का नाम माखन सिंह कालरा और माँ का नाम सुजान कौर था।  जब गुलजार बेहद मासूम और छोटे थे तभी उनकी माँ का इंतकाल हो गया।  देश के विभाजन के वक्त इनका परिवार पंजाब के अमृतसर में आकर बस गया। वहीं गुलज़ार साहब मुंबई चले आए।  मुंबई आकर उन्होंने एक गैरेज में बतौर मैकेनिक का करना शुरू कर दिया।  वह खाली समय में शौकिया तौर पर कवितायें लिखने लगे।  इसके बाद उन्होंने गैरेज का काम छोड़ हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और हेमंत कुमार के सहायक के रूप में काम करने लगे।
शादी 
गुलज़ार की शादी तलाकशुदा अभिनेत्री राखी गुलजार से हुई हैं।  हालंकि उनकी बेटी के पैदाइश के बाद ही यह जोड़ी अलग हो गयी।  लेकिन गुलजार साहब और राखी ने कभी भी एक-दूसरे से तलाक नहीं लिया।  उनकी एक बेटी हैं-मेघना गुलजार जोकि एक फिल्म निर्देशक हैं।
करियर 
गुलजार का हिंदी सिनेमा में करियर बतौर गीत लेखक एस डी बर्मन की फिल्म बंधिनी से शुरू हुआ। साल 1968 में उन्होंने फिल्म आशीर्वाद का संवाद लेखन किया।  इस फिल्म में अशोक कुमार नजर आये थे। इस फिल्म के लिए अशोक कुमार को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला था। इसके बाद उन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों के गानों के बोल लिखे जिसके लिए उन्हें हमेशा आलोचकों और दर्शकों की तारीफें मिली।  साल 2007 में उन्होंने हॉलीवुड फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर का गाना जय हो लिखा।  उन्हें इस फिल्म के ग्रैमी अवार्ड से भी नवाजा गया।  उन्होंने बतौर निर्देशक भी हिंदी सिनेमा में अपना बहुत योगदान दिया हैं  . उन्होंने अपने निर्देशन में कई बेहतरीन फ़िल्में दर्शकों को दी हैं।जिन्हे दर्शक आज भी देखना पसंद करते हैं।
उन्होंने बड़े पर्दे के अलावा छोटे पर्दे के लिए भी काफी कुछ लिखा है।  जिनमे दूरदर्शन का शो जंगल बुक भी शामिल है।
प्रसिद्ध फ़िल्में बतौर निर्देशक 
मेरे अपने, परिचय, कोशिश, अचानक, खुशबू, आँधी, मौसम,किनारा, किताब,अंगूर, नमकीन, मीरा, इजाजत,लेकिन,लिबास,माचिस, हु तू तू।
गीत लेखन 
ओमकारा,रेनकोट,पिंजर,दिल से,आँधी,दूसरी सीता,इजाजत

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