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बाम एकता बनाम मालदार एकता

 

२जुलाई

दूध में मलाई ज्यादा हो तभी तक ही उस में तैरने का मजा है । और जब तक यह एकता मालदार और मलाईदार रहेगी तब तक यह एक बने रहेंगे और दूध में पानी ज्यादा या कहानी में झोल आ गया तब यह भी अपना बोरिया बिस्तर समेट कर एक से बिखर कर फिर अनेक हो जाएँगे । यह राजनीति है भाई यहां कुछ भी हो सकता है ।

बिम्मी शर्मा व्यंग्य
कोई भी मालदार इंसान मालदार इंसान से ही रिश्ता जोड़ना चाहता है ताकि उसका व्यापार आगे बढेÞ और खूब फलता फूलता रहे । नेपाल के विभिन्न राजनीतिक दल भी एक व्यापारिक संगठन जैसे ही हैं वह घाटे का सौदा थोड़े ही करेगें । इसी लिए तो नेकपा एमाले और एकीकृत माओवादी दो से एक हुए हैं ता कि उनका जनता को मूर्ख बना कर खुद तर माल उड़ाने का व्यापार दिन दुगुना और रात चौगुना बढ़ता जाए । यह एकता मालदार होेने के साथ ही दमदार भी है । जब दो व्यक्ति या उन का संगठन नजदीक होते है एक हो जाते है तो उसके पीछे जरुर कोई बड़ा कारण होता है । ऐसे ही हवा में उड़ कर केपी शर्मा ओली और कमरेड प्रचण्ड गले नहीं मिल रहे है या एक, दूसरे की पीठ थपथपा रहे है ।
पिछले साल चुनाव तक दोनो में सिरमौर सम्बद्ध राजनीतिक दल में कुत्ते बिल्ली जैसा रिश्ता था । पर अब दोनो दलों ने अपनी जाति और स्वभाव के अनुसार राजनीतिक दल और उस के सुप्रिमो कुत्ता, कुत्ता या बिल्ली, बिल्ली बन गए हैं । या फिर दोनो रंग बदल कर छिपकली दल हो गए है । आखिर में दोनो दल और उस के सुप्रिमो, नेता तथा पार्टी कार्यकर्ता रंग बदलने में माहिर जो हैं । तरबूजा ही तरबूजे को पहचानता है । इसी तरह दोनों कम्यूनिष्ट दलों नें एक दूसरे को पहचान लिया इसी लिए तो एक हो गए । अब एक तो हो गए है पर कब तक एक बने रहेंगे ? यह देखना बांकी है । क्योंकि एक म्यान में दो तलवार कभी साथ नहीं रह सकते । और यहां तो माशाल्लाह ओली और प्रचण्ड दोनो तलवार से भी तीखे है । कहीं या किसी के गर्दन में गिर जाएँ तो काट ही डालेंगें ।
कम्युनिष्ट अर्थात देश और जनता के प्रति निष्ठा कम होना । जब निष्ठा ही नहीं रहा तो यह खाक के कम्यूनिष्ट हुए । इसी लिए तो यह एक हुए और पार्टी एकता कर ली । पर इन के पास एक, दूसरे के प्रति विश्वास नाम का सुपरग्लू का सर्वथा अभाव है जो इन को हमेशा के लिए जोड़ कर रख सके । हां पर दोनों का विगत एक समान है । जनता को दुख देना और बन्दूक से उड़ा देना या काट डालना । चोर, चोर मौसेरे भाई इसी लिए होते हैं कि दोनो एक, दूसरे की कमजोरी और अपराध को ढक सके । इसी लिए चोर, चोर समधी बन कर गुलछर्रे उडा रहे हैं और देश की अवाम महंगाई से परेशान हो कर खून के आंसू बहा रही है । हाल ही इन के एक मौसेरे भाई पर्यटन मंत्री ने अपने हितचितक संगठनों ंको ६० करोड़ बडी ही दिलदारी से बांट दिया । अपनी अंटी से जाने वाला पैसा होता तब न दुख होता । जनता का दिया हुआ कर का पैसा है उड़ाते जाओ ।
एक धनाढय और चालाक ईंसान दूसरा वैसा ही संपन्न और चलाक ईसान को ही अपना समधी बनाना चाहेगा । कोई भी समझदार ईसान गरीब और दरिद्र से संबंध जोड़ कर या उस को समधी बना कर घाटे का सौदा या अपनी बेईज्जती करना थोड़े ही चाहेगा । अब कमरेड प्रचण्ड और केपी ओली दोनों धनाढय भी हैं और मक्कार भी । इसी लिए तो देश की अवाम को झांसा दे कर एकीकृत माओवादी और नेकपा एमाले एक हो गए हैं । अब एक होने के बाद इन के नए दल का नाम नेकपा हो गया हैं । नेकपा अर्थात नेपाल कमाउ पार्टी । अब कमाउ पार्टी तो मालदार ही होगी ता कि इन का भविष्य शानदार हो । दूध में मलाई ज्यादा हो तभी तक ही उस में तैरने का मजा है । और जब तक यह एकता मालदार और मलाईदार रहेगी तब तक यह एक बने रहेंगे और दूध में पानी ज्यादा या कहानी में झोल आ गया तब यह भी अपना बोरिया बिस्तर समेट कर एक से बिखर कर फिर अनेक हो जाएँगे । यह राजनीति है भाई यहां कुछ भी हो सकता है । इसी लिए न इन की एकता पर प्रसन्न होने की जरुरत है न इन दलों की फूट पर दुखी होने की । इस देश का इतिहास साक्षी है कि यहां कभी भी कोई हमेशा के लिए मिल कर या एकजूट हो कर नहीं रह सकता । क्योंकि इस देश की मिट्टी ने अभी तक विश्वास का वह सुपरग्लू या क्विकफिक्स पैदा ही नहीं किया । इसी लिए निश्चिन्त हो कर रहिए और दोनों दलों के नेता नाम के बदंरो को गुलाटी मारते हुए देखिए और ताली बजाते रहिए । क्योंकि हम ने इसी लिए इन को निर्वाचन मे वोट देरक और चुन कर संसद में भेजा था ताकि यह हमें मूर्ख बना सके । हम जैसों पैसे के लोभ में पड़ कर वोट देनें वालों के लिए ऐसा सबक ही होना चाहिए । पर हम सबक याद नहीं करते और फिर वही गलती दोहराएगें ।

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