Thu. Jul 2nd, 2020
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हाईकू गुलदस्ता : डॉ. दीप्ति गौड़

  • हाईकू गुलदस्ता

जीवन यात्रा
बने राह  आसान
न हो हताश
जीवन सारा
समर्पित राष्ट्र को
हम हैं फ़ौजी

युवा जागेगा
त्याग और बलिदान
राष्ट्र विकास

श्रेष्ठ व्यक्तित्व
सद्गुणों का भंडार
महापुरुष


सुख मिलेगा
कर इबादत तू
अक्षर ढाई

होगा सवेरा
मिलेगी मंजिल भी
हौसला रख।

नम हैं आँखें
क्या गुनगुनाता है
मन अकेला

इल्जाम ना दो
तकदीर को तुम
रखो उम्मीद


मन की पीड़ा
समझते हो तुम
हो मनमीत

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मैं हूं चंचल
भावनाओं से भरी
कौन समझा।

सुन रखी थी
गजलों में जुदाई
अंदाजा हुआ

चेहरा नहीं
प्यार दिल से करो
सौंदर्य बोध

कच्चे मकान
थे उस जमाने में
रिश्ते दिल के
कंटीले पथ
हिम्मत न हारना
लक्ष्य साधना ।

अंतस पीड़ा
भावना मुखरित
जन्मी कविता ।

गीत लिखना
दिल मे उलझन
लिख जाएगा ।

रचनाकार:-
डॉ. दीप्ति गौड़ 'दीप'
ग्वालियर मध्यप्रदेश,भारत

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