Sat. Oct 19th, 2019

११ बुदें समझाैते ने नागरिकाे काे भी सचेत किया है : अब्दुल खानं।

नेपाल मे मधेश स्वतन्त्रता आन्दोलन के सात वर्ष पुरे हाेने के वाद नेपाल सरकार और स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के विच ११ बुदें समझाैता हुई | समझाैता काेई सरकार बनाने और गिराने हेतु नहीं अपितु गरिब कमजाेर और शासन सत्ता से दूर रहे लाेगाे काे सर्वभाैम सत्ता समपन्न बनाने के लिए, राज्य काे भी नागरिक प्रति जिम्मेवार बनाने के लिए तैयार किया गया दस्तावेज है। सात वर्ष के लम्बे अर्से मे बहुत कुच्छ बदलाव आ गया है मधेशी समाज काे एक नईं उम्मीद के साथ नयां रास्ता मिला है बहुत कुच्छ अर्जित करना शेष है। एक राष्ट्र के रुप मे हमे जाे कुछ पाना है वह कैसे हासिल किया जा सकता है और उसके लिए हर किसी काे क्या कुछ करने की जरुरत है इसके वारे मे वि. स. २०७५ फागुन २४ गते काठमाडौं के राष्ट्रिय सभा गृह मे ततकालिन स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के संयाेजक डा. सि के राउत और नेपाल के वर्तमान प्रधानमन्त्री के. पी. शर्मा ओली ने विस्तार मे कह चुके हैं। उन के सन्देश काे सुन्ने, समझने और उसपर अमल करने कि जरुरत है। यदि यह जरुरत हमारी प्राथमिकता वन सके ताे बहुत कुच्छ आसान हाे सकता है।

डा. राउत ने खुल के कहा था कि हमारी मागं जनमतसंग्रह कि थी उस पे नेपाल सरकार सहमती की है और स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन काे लाेकतान्त्रिक शक्ति मानकर जनअभिमत द्वारा जनता की समस्या का समाधान करने की समझाैता हुइ है। समझाैता पश्चात नेपाल के विद्वान से लेकर नेपाल मामिला के जानकार भारतिय विद्वान एस.डी. मुनी ने भी समझाैते काे स्वतन्त्रता आन्दाेलन के पक्ष मे हाेने कि वात कही है। वि. स.२०६८ साल मे जब हमलाेगाे ने स्वतन्त्रता का अभियान प्रारम्भ किया तब सुनहरे कल के तमाम सपने देखे गए थे, कुछ सपने पुरे हुये हैं, कुछ पुरे हाेने काे बांकी हैं और कुछ के पुरे हाेने की प्रतिक्षा है। यह प्रतिक्षा लबीं न खिचने पाए, इसके लिए आम नागरिकाें और सरकार के बीच समझाैते काे पुर्ण रुप से भविष्य मे लाना हाेगा। स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन और नेपाल सरकार के वीच समझाैते ने नागरिकाे काे भी कर्तव्य प्रति सचेत रहने की भी भावना जागृत किया है | आनेवाले समय मे छनिक स्वार्थ के लिए आनेवाले कल काे वर्वाद न करें मताधिकार का सही प्रयाेग करें और जनअभिमत से आनेवाले कल का सफर तय करें।

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सामूहिकता समाज काे कहीं अधिक आसानी से बदलती है और जब समाज बदलता है ताे राष्ट्र अपने आप बदल जाता है। कुछलाेग हम पर आराेप है कि हम मिशन से पिछे ह टगए हैं | मै उन सभी से सवाल करना चाहता हुं आखिर हम सब स्वतन्त्रता अभियान के साथी- सहयाेगी क्याें नहीं बन सके ? जब यह देश हम सब का है,समस्या हम सब की है फिर इसे बनाने संवारने का काम केवल कुछ लाेगाे के ही जिमा कैसे हाे सक्ता है ? जब सभीलाेग मधेश देश निर्माण काे अपना भी फर्ज समझेंगे तभी ताे डा. सि. के राउत का सात वर्ष का सपना साकार हाेगा।

अब्दुल खानं जनमत पार्टी

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