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गुप्त नवरात्र 03 जुलाई दिन बुधवार से

 

 

आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से योग नवरात्र प्रारम्भ होता है, इसका संबंध तन्त्रयोग से होने के कारण लौकिक रूप से इसे गुप्त रखा गया है। इस वर्ष यह गुप्त नवरात्र 03 जुलाई दिन बुधवार से प्रारम्भ हो रहा है। मुख्यतः इस नवरात्र में शक्तिपीठ योगिनी की साधना होती है, 51 शक्तिपीठ में 64 योगिनी स्थित हैं, जिनकी आराधना-पूजा इसी नवरात्रि में सिद्ध मानी गई है।

साधकों को गुप्त नवरात्र में 51 शक्ति, 64 योगिनी एवं षोडश (16) मात्रकाओं की मन्त्र सिद्धी प्राप्त होती है। इस नवरात्र को देवी शक्ति के लिए नोड़ता नाम दिया गया है। इसका मूलतः व्यावहारिक संबंध योग शक्ति से है।

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गुप्त नवरात्र में काली-कामाख्या की पूजा

बंगाल और असम के क्षेत्रों में काली-कामाख्या के कारण इस नवरात्र का विशेष महत्व है। काली-कामाख्या शक्तिपीठायै मन्त्र सिद्धेश्वरी नम:। तथाच गौरिपद्माश्चिमेधा सावित्री विजयाजया देवसेना स्वधास्वाहा मातरो लोक मातर:। धृति पुष्टि तथा तुष्टि आत्मन:कुल देवता: पूज्यौ तन्त्र साध्यिका।।

गुप्त नवरात्र का लाभ

गुप्त नवरात्र में नौ दिन देवी दर्शन से वर्ष पर्यंत रोग-व्याधि एवं शत्रु भय नहीं रहता। समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं-

यम यम चिंतयतेकामम तम तम प्राप्नोतिनिश्चितम।

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परम ऐश्वर्यमतुलम प्राप्यस्यते भूतले पुमान।।

अर्थात् इस नवरात्र में जिस इच्छा या कामना से देवी पूजा की जाती है, उसकी प्राप्ति अवश्य होती है। घर में लक्ष्मी की वृद्धि होती है-“ लक्ष्मी वृद्धिप्रदा ग्रहे….स्तुतासंपूजिता चैव धनधान्य समन्वित:।।”

— ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट

दैनिक जागरण से

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