Mon. Nov 18th, 2019

शब्द साधक सैनी के सम्मान में हुआ कवि सम्मेलन

रुड़की,
नगर की साहित्यिक संस्था नवसृजन द्वारा गत दिवस देर शाम होटल ब्लू सफायर में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । यह आयोजन संस्था के संरक्षक एवं वरिष्ठ कवि  एसके सैनी के जन्मदिन के उपलक्ष में किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार  सुबोध पुंडीर  ” सरित ”  ने की तथा बहुत ही प्रभावी एवं सधे हुए शब्दों में कार्यक्रम का संचालन नगर के नवोदित  गजल कार  पंकज त्यागी “असीम ” ने किया । कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में  श्याम सिंह नागयान,चेयरमैन स्कॉलर्स  एकेडमी रुड़की तथा विशिष्ट अतिथि गण के रूप में नगर के जाने-माने साहित्यकार एवं कवि श्रीगोपाल नारसन , कृष्ण सुकुमार, एवं  नरेश राजवंशी जी उपस्थित रहे। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि तथा अन्य आमंत्रित कवियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया , इस अवसर पर  एस के सैनी द्वारा मधुर कंठ से सरस्वती वंदना का पाठ किया गया । उसके बाद कविताओं का दौर शुरू हुआ । नीरज नैथानी ने अपनी कविता ” शिलाएं भी आपस में बात करती हैं ” के द्वारा बिगड़ते हुए पर्यावरण पर गहरी चोट की, वहीं  सुबोध पुंडीर  ने अपनी कविता “आ तुझे मैं राम का प्रमाण दूँ ” सुना कर उन लोगों को करारा जवाब दिया जो राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते रहते हैं । सुविख्यात साहित्यकार एवं विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलसचिव श्रीगोपाल नारसन  ने इस मौके पर  एसके सैनी को अपनी कविता के माध्यम से जन्मदिन की बधाई दी तथा उन्होंने अपने उद्बोधन में साहित्यिक संस्था नव सृजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था हिंदी साहित्य की सेवा का पुनीत कार्य कर रही है, आज हमें हिंदी की अस्मिता को बचाने की आवश्यकता है और इसके लिए हमें साहित्यिक मंचों को फूहडता और हास्य के नाम पर परोसे जाने वाली अश्लीलता से दूर रखना होगा। उन्होंने एस के सैनी और अपने परिवारों के बहुत पुराने संबंधों का स्मरण करते हुए कहा कि यह दोनों परिवार ही स्वतंत्रता सेनानी परिवार हैं जिनका इस देश की आजादी के संघर्ष में बहुत बड़ा योगदान रहा है। कार्यक्रम में सुविख्यात साहित्यकार  कृष्ण सुकुमार की गजलों और छंद मुक्त रचनाओं को श्रोताओं द्वारा बहुत सराहा गया।  नरेश राजवंशी ने अपनी कविता के माध्यम से भ्रष्ट होती राजनीति पर गहरा प्रहार किया तो  एस के सैनी ने अपनी कविता “बड़े हाकिम जो सरकारी ,दिवाली उनकी है प्यारी” सुना कर सदन को गुदगुदाया । प्रख्यात गज़ल कार  केपी अनमोल जी की गजलों को श्रोताओं ने दिल से समर्थन दिया। जिन अन्य कवियों ने इस अवसर पर काव्य पाठ किया उनमें किसलय क्रांतिकारी ,विनीत भारद्वाज ,विकास चौधरी, पंकज त्यागी “असीम”, श्रीमती अलका घनशाला, शौर्य भटनागर, तनीषा त्यागी, ध्रुव गुप्ता , नवीन शरण “निश्चल “, सौ सिंह सैनी ,और इरशाद सेवक आदि शामिल है।  सभी कवियों का काव्य पाठ प्रभावी ,सुंदर, उद्देश्य पूर्ण तथा साहित्यिक दृष्टि से स्तरीय रहा।
      इस कवि सम्मेलन में नगर के गणमान्य लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया ,जिनमें  मुल्की राज सैनी ,के पी सिंह, चंद्रभान सिंह एडवोकेट, प्रदीप सैनी एडवोकेट ,श्रीमती प्रेमलता ,श्रीमती मिथिलेश सैनी ,श्रीमती रश्मि त्यागी, डॉक्टर संजीव सैनी ,श्रीमती प्रियंका सैनी ,दीपिका ,रणवीर सिंह रावत, शशांक सैनी ,श्रीमती निमिता शर्मा, समय सिंह सैनी ,उदयवीर सिंह, श्रीमती स्नेह नागयान, श्री आशीष सैनी ,एवं श्री धीरेंद्र कुमार सैनी आदिअनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
       अंत में मुख्य अतिथि  श्याम सिंह नागयान ने अपने संबोधन में समय-समय पर अच्छे साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए नवसृजन संस्था को बधाई दी तथा इस प्रकार के कार्यक्रमों के लिए अपना भरपूर समर्थन दिए जाने का आश्वासन संस्था को दिया। उन्होंने सभी आमंत्रित कवि गणों और उपस्थित श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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