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बिहार में बदलते समीकरण ने कई दिग्गजों का खेल बिगाड़ा : आशुतोष

 

आशुतोष, पटना बिहार | बिहार चुनाव अंतिम दौर में हैं लाडाउन के बाद हो रहे इस चुनाव में मोदी लहर की फिजा तो बह ही रही है लेकिन एम वाई समीकरण की परंपरागत आरजेडी भी अच्छा करती नजर आ रही है।वैसे माना जाय तो लोक जनशक्ति पार्टी और विभिन्न तरह के एलाइन्स पार्टी भी अकेले दम पर चुनाव मैदान में है जो जद यू और आरजेडी को खासा नुकसान पहुँचाती नजर आ रही है।

बिहार की आम जनता रोजगार और विकास को अहम मानकर वोट कर रही है इसलिए जद यू को कम कर आकना सही नही होगा।कांग्रेस की परंपरागत रही सीटे भी खिसकती महसूस हो रही है।जिसका मुख्य वजह है एलाइन्स।इस बात से इन्कार कतई नहीं किया जा सकता कि चुनाव बाद एक नया गठजोड़ मिल सकता है जो जातीय समीकरण से पृथक हो राजनीति में कुछ भी असंभव नही! वैसे अकेले दम पर एनडीए अथवा महागठबंधन का सरकार बनाना मुश्किल प्रतीत हो रहा है ।

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वैसे कुल मिलाकर देखा जाय तो पिछले पंन्द्रह सालो में बिहार ने गति पकड़ी है। उद्योग जगत के लिए कुछ न कर पाना सरकार की विफलता है वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री की सफलता नीतियाँ जिसमें अन्न वितरण, किसान समृद्धि योजना एवं उज्जवला योजनाओं ने गहरी छाप छोड़ी है जिसकी दौलत बीजेपी अच्छी करती नजर आ रही है।

चुनाव के बाद एक नया समीकरण दिख सकता ऐसा अनुमान लगाया जाना चाहिए क्योंकि यह चुनाव बीजेपी बनाम आरजेडी भले ही हो लेकिन आरजेडी का उन क्षेत्रों में कमजोर कैनडीडेट देना जहाँ बीजेपी के तगडे और प्रभावशाली उम्मीदवार हैं कुछ न कुछ खिचड़ी पकने की ओर इशारा करती है।

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देखा जाय तो पंन्द्रह साल के शासन में नीतीश कुमार ने एक साफ सुंदरी व्यवस्था दी है इस बेत से इनकार नही किया जा सकता ले कि रोजगार पलायन उद्योग और सुरक्षा के मामले में बिहार आज भी सबसे नीचे खड़ा है।प्रति व्यक्ति आय हमारी राष्ट्रीय औसत से भी कम है स्वास्थ्य शिक्षा और शिक्षकों प्रचार्यो प्रोफेसर नर्स सफाईकर्मी की कमी आज भी पर्याप्त मात्रा में है जिसे भरने मेंआज भी सरकार विफल रही है।

सात निश्च्य, बिजली, सड़क, पोशाक योजना, शराबबंदी, पंचायत चुनाव में महिला आरक्षण, एवं वाल विवाह कुछ ऐसे कार्य हुए है जिसके लिए बिहार एक राइट माॅडल माना जाने लगा है इसलिए राजनीकपंडीत को किसी को कम करके मापना सही नही होगा।कुल मिलाकर देखा जाय तो बदलती परिदृश्य उभरती नजर आ रही है इस बदलाव में ताज किसके सर सजेगा यह आने वाला वक्त तय करेगा लेकिन एक बदलती तस्वीर जरूर नजर आ रही है ।

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बिहार की जातीय गोलबंदी और एम वाई समीकरण के बीच प्रधानमंत्री मोदी की जनता के प्रति विश्वास साफ दिखता है हालाँकि बीजेपी बनाम आरजेडी का यह चुनाव आने वाले समय में एक नया समीकरण प्रस्तुत करेगी इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता।

आशुतोष
पटना बिहार

 

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