ओली समक्ष प्रचण्ड और नेपाल निरीह, सचिवालय बैठक के लिए दौड़धूप
काठमांडू, ७ नवम्बर । सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के भीतर जारी आन्तरिक विवाद चरमसीमा पर है । कई राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि अब नेकपा में विभाजन निश्चित है । लेकिन स्वयम् नेकपा के शीर्ष नेता कहते हैं कि जारी विवाद स्वाभाविक है, नेकपा में विभाजन सिर्फ चर्चा का विषय बन सकता है, हकिकत में नहिं ।
खैर ! ऐसी ही पृष्ठभूमि में नेकपा के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड प्रधानमन्त्री भी रहे दूसरे अध्यक्ष के सामने दिन प्रतिदिन कमजोर एवं निरीह दिखाई देने लगे हैं । पार्टी के भीतर जारी विवाद समाधान के लिए पिछली बार अध्यक्ष प्रचण्ड पार्टी सचिवालय बैठक आह्वान करना चाहते हैं । लेकिन प्रधानमन्त्री ओली की और से चेतावनी है कि अगर बिना सहमति सचिवालय बैठक आह्वान की गई तो उसी दिन को पार्टी विभाजन के लिए प्रस्थान–बिन्दू माना जाएगा और इसकी जिम्मेदार आप लोग होंगे ।
प्रधानमन्त्री ओली की ओर से प्राप्त यही चेतावनी के कारण अध्यक्ष प्रचण्ड सचिवालय बैठक आह्वान करने से डर रहे थे । तब भी शुक्रबार प्रचण्ड की ओर से ‘सविचालय बैठक’ कहकर एक बैठक का आयोजन हो गया । प्रचण्ड ने अपेक्षा किया था कि उक्त बैठक में प्रधानमन्त्री ओली भी सहभागी होंगे । लेकिन बैठक में पूर्व माओवादी नेता तथा गृहमन्त्री भी रहे रामबहादुर थापा सहित प्रधानमन्त्री ओली पक्षधर कोई भी नेता सहभागी नहीं हुए । उसके बाद अध्यक्ष प्रचण्ड तथा माधव नेपाल समूह ओली प्रति निरीह साबित होते जा रहे हैं ।
शुक्रबार आयोजित बैठक असफल होने के बाद शनिबार अध्यक्ष प्रचण्ड सहित नेकपा के ५ शीर्ष नेताओं ने प्रधानमन्त्री ओली से सचिवालय बैठक आह्वान के लिए सहमति मांग किया है । अध्यक्ष प्रचण्ड के साथ वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल, झलनाथ खनाल, उपाध्यक्ष वामदेव गौतम और पार्टी प्रवक्ता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने प्रधानमन्त्री ओली से सचिवालय बैठक के लिए सहमति मांग किया है । प्रवक्ता श्रेष्ठ के अनुसार लिखित रुप में उन लोगों ने सचिवालय बैठक आह्वान के लिए प्रधानमन्त्री समक्ष निवेदन दिया है । लेकिन प्रधानमन्त्री ओली इसके संबंध में मौन हैं ।
स्मरणीय है, नेकपा में पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष के रुप में पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड हैं । अगर प्रचण्ड चहते हैं तो सविचालय बैठक सहज आयोजन हो सकता है, ऐसी मान्यता है । लेकिन ओली की ओर से चेतावनी होने के कारण प्रचण्ड ओली समक्ष निरिह साबित दिखाई दे रहे हैं, जिसको राजनीतिक वृत्त में अस्वाभाविक माना जाता है ।
पार्टी स्थायी कमिटी निर्णय कार्यान्वयन, कोभीड–१९ के कारण सिर्जित स्वास्थ्य तथा आर्थिक संकट और सरकार की प्रभावकारिता जैसे विषयों में विचार–विमर्श के लिए नेकपा सचिवालय के बहुमत सदस्य बैठक के पक्ष में हैं । लेकिन सचिवालय सदस्य भी रहे प्रधानमन्त्री ओली एवं उनके पक्षधर अल्पमत सदस्य बैठक के विपक्ष में होने के कारण बैठक आयोजन नहीं हो पा रहा है । प्रवक्ता श्रेष्ठ के अनुसार जितना जल्द हो सके प्रधानमन्त्री के सहमति में ही नेकपा सचिवालय बैठक आयोजन होनेवाला है ।
पिछली बार तो यहां चक चर्चा होने लगी है कि प्रधानमन्त्री ओली अब नेकपा में पूर्व एमाले और पूर्व माओवादी के बीच विभाजन करना चाहते हैं और नेकपा एमाले पार्टी को पुनर्गठन करना चाहते हैं । इसके लिए उन्होंन आज के दिन प्रचण्ड के पक्ष में रहे माधव नेपाल को भी स्पष्ट संकेत किया है । बताया जाता है कि अध्यक्ष ओली ने नेकपा एमाले पुनर्गठन और पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए नेता नेपाल से प्रस्ताव भी किया है और भावी प्रधानमन्त्री (अगले चुनाव के बाद) का आश्वासन भी दिया है ।

