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कोरोना को हराने में जुट गई है पूरा भारत की जनता

 

*कोरोना को मात करेगा भारत* 

*डॉ. वेदप्रताप वैदिक*

कोरोना के विरुद्ध भारत में अब एक परिपूर्ण युद्ध शुरु हो गया है। केंद्र और राज्य की सरकारें, वे चाहे किसी भी पार्टी की हों, अपनी कमर कसके कोरोना को हराने में जुट गई हैं। इन सरकारों से भी ज्यादा आम जनता में से कई ऐसे देवदूत प्रकट हो गए हैं, जिन पर कुर्बान होने को जी चाहता है। कोई लोगों को आक्सीजन के बंबे मुफ्त में भर-भरकर दे रहा है, कोई मरीजों को मुफ्त खाना पहुंचवा रहा है, कोई प्लाज्मा-दानियों को जुटा रहा है और कोई ऐसे भी हैं, जो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम भी सहज रुप में कर रहे हैं। हम अपने उद्योगपतियों को दिन-रात कोसते रहते हैं लेकिन टाटा, नवीन जिंदल, अडानी तथा कई अन्य छोटे-मोटे उद्योगपतियों ने अपने कारखाने बंद करके आक्सीजन भिजवाने का इंतजाम कर दिया है। यह पुण्य-कार्य वे स्वेच्छा से कर रहे हैं। उन पर कोई सरकारी दबाव नहीं है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की पहल पर ऑक्सीजन की रेलें चल पड़ी हैं।

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हजारों टन तरल आक्सीजन के टैंकर अस्पतालों को पहुंच रहे हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ऑक्सीजन -परिवहन का शुल्क भी हटा लिया है। हमारे लाखों डॉक्टर, नर्सें और सेवाकर्मी अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचा रहे हैं। अब प्रधानमंत्री राहत-कोष से 551 आक्सीजन-संयत्र लगाने की भी तैयारी हो चुकी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उ.प्र. के योगी आदित्यनाथ तथा कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों ने मुफ्त टीके की भी घोषण कर दी है। फिर भी एक दिन में साढ़े तीन लाख लोगों का कोरोना की चपेट में आना और लगभग तीन हजार लोगों का दिवंगत हो जाना गहरी चिंता का विषय है। दिल्ली में इसीलिए एक हफ्ते तक तालाबंदी बढ़ा दी गई है। ऑक्सीजन के लेन-देन और आवाजाही को खुला करने की भी पूरी कोशिश की जा रही है। दुनिया के कई देश दवाइयां, उनका कच्चा माल, ऑक्सीजन यंत्र आदि हवाई जहाजों से भारत पहुंचा रहे हैं लेकिन भारत में ऐसे नरपशु भी हैं, जो ऑक्सीजन, रेमडेसवीर के इंजेक्शन, दवाइयों और इलाज के बहाने मरीज़ों की खाल उतार रहे हैं। उन्हें पुलिस पकड़ तो रही है लेकिन आज तक एक भी ऐसे इंसानियत के दुश्मन को फांसी पर नहीं लटकाया गया है। पता नहीं हमारी सरकारों और अदालतों को इस मामले में लकवा क्यों मार गया है ? अस्पताली लूट-पाट के बावजूद मरीज़ तो मर ही रहे हैं लेकिन उनके घरवाले जीते-जी मरणासन्न हो रहे हैं, लुट रहे हैं। हमारे अखबार और टीवी चैनल बुरी खबरों को इतना उछाल रहे हैं कि उनकी वजह से लोग अधमरे-जैसे हो रहे हैं। वे हमारे घरेलू काढ़े, गिलोय और नीम की गोली तथा बड़ (वटवृक्ष) के दूध जैसे अचूक उपायों का प्रचार क्यों नहीं करते ? कोरोना को मात देने के लिए जो भी नया-पुराना, देसी-विदेशी हथियार हाथ लगे, उसे चलाने से चूकना उचित नहीं।

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक,
Most Senior Journalist

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